नई दिल्ली: नए साल पर इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट खरीदने पर महंगाई का झटका लगने वाला है। खास तौर पर स्मार्टफोन और स्मार्ट टीवी की कीमत में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। हाल ही में सरकार ने GST की दरें घटाकर लोगों को इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम की कीमत में राहत दी थी। जहां लोग स्मार्टफोन और स्मार्ट टीवी की कीमत में कटौती के कयास लगा रहे थे, वहीं अगले साल से लोगों की जेबें ढ़ीली होने वाली है।
6.9% तक का इजाफा
रिसर्च फर्म काउंटरप्वॉइंट की नई रिपोर्ट के मुताबिक, स्मार्टफोन की एवरेज सेलिंग प्राइस (ASP) की कीमत में 2026 तक 6.9% तक का इजाफा होने वाला है। यह पहले लगाए गए अनुमान के लगभग दोगुना है। हालांकि, स्मार्टफोन की कीमत में ये इजाफा टैक्स की वजह से नहीं होगा। बल्कि यह सप्लाई चेन की वजह से होने वाला है। इन दिनों स्मार्टफोन में यूज होने वाले क्रिटिकल कंपोनेंट्स जैसे कि रैम और मेमोरी कार्ड की कमी है, जिसकी वजह से इनकी कीमत में इजाफा हुआ है। ऐस में स्मार्टफोन कंपनियों के एंड प्रोडक्ट पर भी इसका असर देखने को मिलेगा।
रैम की कमी
स्मार्टफोन, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी समेत कई इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस में सिस्टम मेमोरी की जरूरत होती है। रैम की कमी की वजह से ओरिजिनल इक्वीपमेंट मैन्युफैक्चरर्स को स्मार्टफोन के कंपोनेंट का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इन दिनों मेमोरी कार्ड बनाने वाली कंपनियां एआई डेटा सेंटर के लिए चिप बना रही है, जिसकी वजह से अन्य डिवाइसेज के मेमोरी कार्ड का प्रोडक्शन कम हो गया है। एआई की बढ़ती डिमांड और डेटा सेंटर के एक्सपेंशन की वजह से इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स के लिए इस्तेमाल होने वाली मेमोरी कार्ड की सप्लाई कम हो गई है।
इस समय मेमोरी कार्ड मार्केट को तीन बड़ी कंपनियां कंट्रोल कर रही हैं, जिनमें सैमसंग, SK Hynix और Micron हैं। चिप मार्केट में इन तीनों का 93 प्रतिशत मार्केट शेयर है। इनमें से माइक्रोन ने कंज्यूमर मार्केट से बाहर होने का फैसला किया है यानी कंपनी अब कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइसेज के लिए चिप नहीं बनाएगी। कंपनी का फोकस एआई चिप्स रह रहेगा। फरवरी 2026 से कंपनी अपना कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस के लिए चिप बनाना बंद करने वाली है। इसकी वजह से कंपनियों की निर्भरता केवल Samsung और SK Hynix पर रह गई है।
अन्य कंपोनेंट्स भी हो सकते हैं महंगे
चिप के अलावा अन्य कंपोनेंट्स की कीमत में भी 10 से 25 प्रतिशत तक का इजाफा देखा जा सकता है। कई ब्रांड्स ने अब बजट फोन बनाना कम कर दिया है, जिनमें शाओमी, ओप्पो, ऑनर आदि शामिल हैं। ये कंपनियां कम प्रॉफिट मार्जिन की वजह से बजट फोन के बजाय मिड और प्रीमियम फोन पर फोकस कर रही है।







