नई दिल्ली : व्रिकम संवत 2083 की 19 मार्च से शुरुआत हो गई है। इसी दिन से नया संवत्सर शुरू होता है। चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिंदू नव वर्ष का आरंभ होता है। चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ भी इसी दिन से होता है। मान्यता है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। नव संवत्सर के राजा देवगुरु बृहस्पति, मंत्री मंगल, सेनापति चंद्रमा और वाहन चातक रहेंगे। तो आइए जानते है विक्रम संवत क्या है और कब इसकी शुरुआत हुई।
क्या है विक्रम संवत?
विक्रम संवत प्राचीन हिंदू कैलेंडर है। इसके आधार पर बनाया गया पंचांग उपयुक्त माना जाता है। यह अंग्रेजी कैलेंडर से 57 साल आगे चलता है। विक्रम संवत के आधार पर ही भारत में व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं। इसमें सूर्य और चंद्रमा दोनों के आधार पर समय की गणना की जाती है। विक्रम संवत से पहले युधिष्ठिर संवत, कलियुग संवत भी प्रचलित रहे हैं। विक्रम संवत उत्तर और पश्चिम भारत में व्यापक रूप से प्रचलित है। नेपाल में भी विक्रम संवत को मान्यता दी गई है।
हिंदू नव वर्ष में 13 महीने
विक्रम संवत में 12 महीने होते हैं। जिनको चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन कहा जाता है। लेकिन कई बार अधिक मास लगने के कारण इसमें एक महीना और जुड़ जाता है। व्रिकम संवत 2083 में इस बार 12 की बजाय 13 महीने होंगे। नए साल में अधिक मास 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा।
विक्रम संवत कब शुरू हुआ ?
विक्रम संवत की शुरुआत 57 ईसा पूर्व में हुई थी। माना जाता है कि उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने विदेशी आक्रमणकारियों पर विजय प्राप्त करने के बाद इस संवत की शुरुआत की थी। सम्राट विक्रमादित्य को पराक्रमी और न्यायप्रिय राजा के रूप में जाना जाता है। शकों को खदेड़ने के कारण उन्हें ‘शकारी’ के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि सम्राट विक्रमादित्य जनता की परेशानी जानने के लिए वेष बदलकर राज्य में भ्रमण करते थे। राजा विक्रमादित्य न्याय व्यवस्था के लिए जाने जाते थे।







