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Home व्यापार

UPI पर चार्ज नहीं, फिर कौन उठाता है इसका खर्च?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 13, 2026
in व्यापार
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UPI
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नई दिल्ली। रोजाना किराना सामान से लेकर फल-सब्जी तक की खरीदारी के लिए देश में करोड़ों लोग यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल करते हैं। अब सरकार के नए बिल की वजह से इसपर बहस छिड़ गई है। सरकार ने संसद में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल-2026 पेश किया है। इसमें पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट-2007 की एक धारा (10A) में बदलाव का प्रस्ताव है। इस बदलाव से भविष्य में कुछ खास तरह के UPI लेन देन पर MDR (यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट एक तरह का चार्ज) लगाने के लिए कानूनी रास्ता तैयार किया जा रहा है।

विपक्ष का कहना है कि इससे आम जनता पर आर्थिक बोझ पड़ सकता है। सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में UPI से पेमेंट करने पर आम ग्राहकों को भी चार्ज देना पड़ेगा। हालांकि, सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि आम ग्राहकों से यूपीआई पेमेंट पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। आप पहले की तरह ही किसी भी क्यूआर कोड को स्कैन करके फ्री में पैसों का ट्रांसफर और खरीदारी कर सकेंगे।

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नए बिल पर क्यों छिड़ी है बहस, क्या हैं आंकड़े

UPI देश की सबसे बड़ी डिजिटल पेमेंट सिस्टम बन चुकी है, करोड़ों लोग इस पर निर्भर हैं। ताजा आंकड़ों की मानें तो जुलाई में कुल 23.66 अरब (यानी 2366 करोड़) UPI ट्रांजेक्शन हुए। यह अब तक का सबसे ज्यादा मासिक आंकड़ा है। इसके अलावा, इन सभी लेन-देन की कुल कीमत ₹29.88 लाख करोड़ रही। रोजाना औसतन 76.3 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए। हर दिन औसतन 96,383 करोड़ का लेन-देन हुआ। लोगों के लिए यह पूरी तरह से मुफ्त है। हालांकि, यह सरकार की इंसेंटिव स्कीम पर निर्भर है यानी यह सरकारी मदद से चलता है।

सरकार की इंसेंटिव स्कीम के तहत देश में चीजें बनाने या कारोबार बढ़ाने के लिए कंपनियों को नकद पैसा, टैक्स में छूट या अन्य फायदे दिए जाते हैं। साल 2023-24 में ₹3,631 करोड़ की सरकारी मदद दी गई थी। इसके अलावा, बीते करीब 10 साल से बैंक, फिनटेक कंपनियां, NPCI और RBI मिलकर UPI के इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड-रोकथाम और नए फीचर्स पर लगातार अपने स्तर पर भी निवेश करते आ रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि अगर MDR लागू हुआ, तो भले ही सीधे ग्राहक पर चार्ज न लगे लेकिन यह भविष्य में मर्चेंट के जरिए घूम-फिरकर ग्राहकों तक पहुंच सकता है। इसलिए इस बदलाव को करोड़ों आम लोगों की जेब से जुड़ा मामला बताया जा रहा है। इसका विरोध हो रहा है।

MDR क्या है और कौन देता है?

MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट, यह वह फीस है जो दुकानदार डिजिटल पेमेंट लेने के बदले बैंक और पेमेंट कंपनी को देता है। यह पैसा ग्राहक की जेब से नहीं कटता, बल्कि दुकानदार ही चुकाता है। फिलहाल UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर यह चार्ज 0% है। इस प्रस्ताव में 2,000 से ज्यादा के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर 0.3% से 0.5% तक का एमडीआर (MDR) लगाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि यह नियम केवल ₹1.5 करोड़ से ज्यादा के सालाना टर्नओवर वाले बड़े मर्चेंट्स/दुकानदारों पर ही लागू करने का प्लान है। छोटे व्यापारी और सब्जी-किराना वाले इसके दायरे से बाहर रहेंगे। यह भी बताया जा रहा है कि इससे छोटे दुकानदारों और आम ग्राहकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

सरकार क्यों कर रही है बदलाव?

भारत सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए इस कानून में धारा 10A जोड़ी थी। इस नियम के तहत यूपीआई और रूपे कार्ड लेन-देन पर किसी भी प्रकार का एमडीआर लगाने पर रोक लगा दी गई थी। धारा 10A में संशोधन के बाद सरकार और एनपीसीआई (NPCI) को यह अधिकार मिल जाएगा कि वे जरूरत पड़ने पर बड़े लेन-देन पर सीमित शुल्क (MDR) तय कर सकें, ताकि डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च निकाला जा सके।

UPI पर चार्ज नहीं, फिर कौन उठाता है खर्च?

भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट्स नेटवर्क का खर्च कौन उठाएगा इसको लेकर विवाद है। इसे पूरे विवाद की मुख्य जड़ माना जा रहा है। दरअसल, बैंक और फिनटेक कंपनियों का कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा बनाए रखने के लिए भारी लागत आती है। दूसरी ओर सरकार चाहती है कि आम यूजर्स पर बोझ डाले बिना बैंकों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाया जाए, ताकि UPI सर्विस बिना किसी रुकावट के चलती रहे।

फिलहाल यह सरकार की इंसेंटिव स्कीम पर निर्भर है यानी यह सरकारी मदद से चलता है। बैंक और पेमेंट कंपनियां सीधे मर्चेंट या ग्राहक से पैसा नहीं ले पातीं, इसलिए सरकार खुद एक खास स्कीम के जरिए इस खर्च की भरपाई करती है। इसके अलावा, बैंक, फिनटेक कंपनियां, NPCI और RBI मिलकर UPI के इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड-रोकथाम और नए फीचर्स पर लगातार अपने स्तर पर निवेश करते आ रहे हैं।

अब आगे क्या?

हाल ही में आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मॉनेटरी पॉलिसी के बाद कहा कि इस पर अभी से किसी नतीजे पर पहुंचना बहुत जल्दबाजी होगी। सरकार कानून में संशोधन कर रही है और इसपर चर्चा जारी है। उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को चलाने का खर्च किसी न किसी को तो उठाना ही होगा। उन्होंने कहा कि आरबीआई की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल पेमेंट सुरक्षित, टिकाऊ और सभी के लिए किफायती बना रहे।

दूसरी ओर लोगों का कहना है कि अगर MDR लागू हुआ, तो भले ही सीधे ग्राहक पर चार्ज न लगे लेकिन यह भविष्य में मर्चेंट के जरिए घूम-फिरकर ग्राहकों तक पहुंच सकता है। सरकार और आरबीआई दोनों ने साफ कहा है कि आम ग्राहकों से यूपीआई पेमेंट पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

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