नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखे चलाने को लेकर अहम फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखे चलाने, बनाने, बेचने और स्टोर करने पर पूरे एक साल के लिए रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि हर साल सिर्फ 3-4 महीने के लिए पटाखा बैन करने से कोई फायदा नहीं है। दिल्ली की हवा बहुत खराब हो रही है, इसलिए ये कदम उठाना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में हालात इतने खराब हैं कि किसी भी तरह की छूट नहीं दी जा सकती। यहां तक कि ग्रीन पटाखे भी नहीं चलाए जा सकते। ऑनलाइन पटाखे बेचने पर भी रोक रहेगी।
‘दिल्ली-एनसीआर में हवा के जो हालत हैं…’
जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने यह भी कहा कि दिल्ली-एनसीआर में हवा के जो हालत है, उसे देखते हुए ग्रीन पटाखों को भी छूट नहीं दी जा सकती। यहां तक कि ऑनलाइन पटाखों की बिक्री पर भी रोक रहेगी। कोर्ट ने पटाखा बनाने वाली कंपनियों की इस दलील को भी नहीं माना कि प्रतिबंध से उनके व्यापार और रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा। कोर्ट ने कहा कि हवा में प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा है। हर कोई अपने घर या ऑफिस में एयर प्यूरीफायर नहीं लगा सकता।
‘लोगों को प्रदूषण मुक्त वातावरण में जीने का हक’
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि जो लोग सड़कों पर काम करते हैं, वे प्रदूषण से सबसे ज्यादा परेशान होते हैं। इसलिए, लोगों को प्रदूषण मुक्त वातावरण में जीने का हक है, जो कि संविधान के आर्टिकल 21 के तहत जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने 3 अप्रैल को दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में पटाखों के उपयोग, निर्माण, बिक्री और भंडारण पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है।
ग्रीन पटाखों के बारे में शीर्ष कोर्ट ने क्या कहा
बेंच ने कहा कि प्रतिबंध को कुछ महीनों तक सीमित रखने से कोई फायदा नहीं होगा। पटाखे पूरे साल बेचे जाएंगे और प्रतिबंध की अवधि के दौरान उन्हें स्टोर और इस्तेमाल किया जाएगा। ग्रीन पटाखों के बारे में शीर्ष कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, उनसे निकलने वाला प्रदूषण सामान्य पटाखों से केवल 30 फीसदी कम है। जब तक यह नहीं दिखाया जाता कि ग्रीन क्रैकर्स से होने वाला प्रदूषण बहुत कम है, तब तक उन्हें छूट देने का कोई सवाल ही नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी दिए थे ऐसे निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पटाखा व्यापारियों का भी संविधान के अनुच्छेद 51A के तहत यह दायित्व है कि वे यह सुनिश्चित करें कि दिल्ली प्रदूषण मुक्त रहे। अदालत ने एमसी मेहता मामले के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में प्रदूषण प्रबंधन की निगरानी कर रही है। इसमें पटाखों पर प्रतिबंध, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाना, गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण और ठोस कचरा प्रबंधन आदि शामिल हैं।
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का बुरा हाल
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर प्रतिबंध के अपर्याप्त कार्यान्वयन पर चिंता व्यक्त की थी। 11 नवंबर, 2024 को कोर्ट ने कहा था कि कोई भी धर्म प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को प्रोत्साहित नहीं करता है और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के स्वच्छ वातावरण के अधिकार के अनुरूप प्रतिबंध के सख्त कार्यान्वयन का आह्वान किया था। कोर्ट ने जोर देकर कहा था कि वायु और ध्वनि प्रदूषण दोनों को नियंत्रित करने के लिए इस तरह का प्रतिबंध आवश्यक है।







