Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

होसबोले के बयान पर मचा बवाल, अब उपराष्ट्रपति धनखड़ बोले- ‘ये बदलाव नासूर की तरह’

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
June 28, 2025
in राष्ट्रीय
A A
Vice President Dhankhar
19
SHARES
641
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली: संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने संविधान की प्रस्तावना में ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवाद’ शब्द जोड़ने को लेकर जो बहस शुरू की अब देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने उसको और आगे बढ़ा दिया है. उपराष्ट्रपति भवन में एक कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने कहा कि आपातकाल के दौरान प्रास्तावना में जो शब्द जोड़े गए, वे नासूर हैं; सनातन की आत्मा के साथ किया गया एक पवित्र अपमान है.

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा “किसी भी संविधान की प्रस्तावना उसकी आत्मा होती है. भारतीय संविधान की प्रस्तावना अद्वितीय है. भारत को छोड़कर दुनिया के किसी भी देश की संविधान की प्रस्तावना में बदलाव नहीं हुआ है, और क्यों? प्रस्तावना अपरिवर्तनीय है. प्रस्तावना आधार है जिस पर पूरा संविधान टिका है. यह उसकी बीज-रूप है. यह संविधान की आत्मा है. लेकिन भारत की इस प्रस्तावना को 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम के तहत बदल दिया गया ‘समाजवादी’, ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’ जैसे शब्द जोड़ दिए गए.”

इन्हें भी पढ़े

जन विश्वास बिल

आम आदमी की जिंदगी आसान करेगा जन विश्वास बिल!

April 3, 2026

विदेशी हो जाएगा ये देसी बैंक! RBI ने दी मंजूरी

April 3, 2026
getting rewards for giving garbage

प्लास्टिक बोतल दो, इनाम लो! कचरा देने पर मिल रहा रिवॉर्ड, जानिए क्या है ये अनोखी पहल?

April 3, 2026
fund

2 लाख करोड़ वाले सुरक्षा कवच से देशों की अर्थव्यवस्था में आएगी नई जान!

April 3, 2026
Load More

‘आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे अंधकारमय दौर’

उपराष्ट्रपति ने यह बात उपराष्ट्रपति निवास पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही. धनखड़ ने कहा “आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे अंधकारमय दौर था जब लोग जेलों में थे, मौलिक अधिकार निलंबित थे. उन लोगों के नाम पर ‘हम भारत के लोग’ जो खुद उस समय दासता में थे, क्या सिर्फ शब्दों का प्रदर्शन किया गया? इसे शब्दों से परे जाकर निंदा की जानी चाहिए. केसवनंद भारती बनाम केरल राज्य, 1973 के ऐतिहासिक फैसले में, 13 न्यायाधीशों की पीठ ने प्रस्तावना पर गहराई से चिंतन किया. न्यायमूर्ति एच. आर. खन्ना ने कहा “प्रस्तावना संविधान की व्याख्या के लिए एक मार्गदर्शक का कार्य करती है और यह दर्शाती है कि संविधान की सत्ता का स्रोत कौन है अर्थात भारत की जनता.”

डॉ. अंबेडकर को लेकर क्या बोले उपराष्ट्रपति?

उपराष्ट्रपति ने कहा कि “हमें आत्मचिंतन करना चाहिए डॉ.अंबेडकर ने अत्यंत परिश्रम से यह कार्य किया. उन्होंने अवश्य ही इस पर गहराई से विचार किया होगा. हमारे संविधान निर्माताओं ने प्रस्तावना को सही और उचित समझ कर जोड़ा था. लेकिन इस आत्मा को ऐसे समय बदला गया जब लोग बंधन में थे. भारत के लोग, जो सर्वोच्च शक्ति का स्रोत हैं वे जेलों में थे, न्याय प्रणाली तक पहुंच से वंचित थे. मैं 25 जून 1975 को लागू किए गए 22 महीनों के आपातकाल की बात कर रहा हूँ. तो यह कितना बड़ा न्याय का उपहास है! पहले हम उस चीज़ को बदलते हैं जो ‘अपरिवर्तनीय’ है जो ‘हम भारत के लोग’ से उत्पन्न होती है और फिर उसे आपातकाल के दौरान बदल देते हैं. जब हम भारत के लोग पीड़ा में थे हृदय से, आत्मा से वे अंधकार में जी रहे थे.”

‘सनातन की आत्मा का अपवित्र अनादर’

संविधान संशोधन का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा “हम संविधान की आत्मा को बदल रहे हैं. वास्तव में, यह शब्दों का एक झटके में हुआ परिवर्तन था जो उस अंधकारपूर्ण काल में किया गया, जो भारतीय संविधान के लिए सबसे कठिन समय था. अगर आप गहराई से सोचें, तो यह एक ऐसा परिवर्तन है जो अस्तित्वगत संकट को जन्म देता है. ये जोड़े गए शब्द नासूर हैं. ये उथल-पुथल पैदा करेंगे. आपातकाल के दौरान प्रस्तावना में इन शब्दों का जोड़ा जाना संविधान निर्माताओं की मानसिकता के साथ धोखा है. यह हमारे हजारों वर्षों की सभ्यता की संपदा और ज्ञान का अपमान है. यह सनातन की आत्मा का अपवित्र अनादर है.”

पहले दत्तात्रेय होसबले और अब देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने संविधान की प्रस्तावना में जोड़े गए शब्दों को लेकर जिस तरह से अपने बयान शारीरिक तौर पर व्यक्त किए हैं उसको लेकर अब देश में राजनीति भी शुरू हो चुकी है. पिछले कुछ सालों से विपक्ष लगातार सरकार पर इसी बात को लेकर हमलावर रहा है की सरकार संविधान बदलने की तैयारी कर रही है ऐसे में इस तरह के बयान सामने आने के बाद विपक्ष एक बार फिर इसको लेकर आक्रामक है और देश में संविधान के नाम पर राजनीति फिर से गर्मा रही है.

 

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल

गुटबाजी के साइडइफेक्ट

November 28, 2022
Shubhanshu Shukla

शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक उड़ान… तिरंगा अंतरिक्ष में, भारत का गौरव ISS पर!

June 26, 2025
bank

एसवीबी के बाद डूब गया अब यह अमेरिकी बैंक!

March 13, 2023
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • आम आदमी की जिंदगी आसान करेगा जन विश्वास बिल!
  • अभिषेक शर्मा पर हो गया बड़ा एक्शन, आईपीएल ने क्यों ठोका बड़ा जुर्माना
  • विदेशी हो जाएगा ये देसी बैंक! RBI ने दी मंजूरी

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.