नई दिल्ली: इस समय दुनिया के कई देशों को सांस की बीमारियों ने घेर रखा है. चीन और यूरोप निमोनिया का आंतक जारी है. चीन में निमोनिया के मामले रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रहे हैं. बच्चे इससे बड़ी संख्या में संक्रमित हो रहे हैं और अस्पतालों में बच्चों की संख्या बढ़ रही है. जापान में सालों बाद इन्फ्लूएंजा वायरस ( फ्लू ) के रिकॉर्ड मामले आ रहे हैं. एक सप्ताह में ही फ्लू के डेढ़ साल से अधिक केस आ चुके हैं. जापान में फ्लू इतनी तेजी से फैल रहा है कि हर दिन हजारों की संख्या में केस सामने आ रहे हैं. अमेरिका, सिंगापुर और भारत में कोविड के मामले बढ़ रहे हैं. सिंगापुर में तो बीते सप्ताह करीब 60 हजार कोविड केस दर्ज किए गए हैं. सिंगापुर की सरकार ने लोगों को मास्क लगाने की सलाह दी है.
कई दशकों बाद ऐसा देखा जा रहा है कि एक साथ ही ये तीन बीमारियां फैल रही हैं. इनसे लोग तेजी से संक्रमित हो रहे हैं. फ्लू, निमोनिया और कोरोना तीनों ही सांस की बीमारियां हैं और समय पर इलाज न मिलने से जानलेवा हो सकती हैं. ये लंग्स को नुकसान पहुंचा सकती है और इनसे शरीर में सांस लेने में परेशानी हो जाती है.
तीनों हैं संक्रामक बीमारियां
महामारी विशेषज्ञ डॉ अजय कुमार बताते हैं कि फ्लू, निमोनिया और कोविड तीनों ही रेस्पिरेटरी इंफेक्शन हैं और संक्रामक बीमारियां हैं. ये एक से दूसरे व्यक्ति में फैलती हैं. इनका ट्रांसमिशन भी आसानी से हो जाता है. खांसने या छींकने के दौरान एक से दूसरे व्यक्ति में ये बीमारियां फैल जाती हैं. इन्फ्लूएंजा वायरस की वजह से ही निमोनिया के केस भी बढ़ जाते हैं. इन्फ्लूएंजा दशकों पुरानी बीमारी है जो आजतक दुनिया के लिए खतरा बनी हुई है. दुनिया के कई देशों मे इन्फ्लूएंजा की वजह से लोग बीमार पड़ते हैं और खांसी, जुकाम और बुखार के मामले सामने आते हैं.
क्यों बढ़ रही सांस की बीमारियां
दुनिया भर में लोग एक से दूसरे देश में जाते हैं. इस दौरान संक्रमित व्यक्ति वायरस को फैला देता है. इन बीमारियों के वायरस की संक्रामक क्षमता काफी अधिक होती है और वह तेजी से एक से दूसरे व्यक्ति में फैल जाते हैं. यही कारण है कि सांस की बीमारियां दुनियाभर में फैल रही हैं. हालांकि फिलहाल निमोनिया से हालात कुछ ठीक लग रहे हैं, लेकिन फ्लू के बढ़ते मामलों पर नजर रखनी होगी. साथ ही कोविड को लेकर भी अलर्ट रहना होगा.
कितना है कोविड से खतरा
भारत, अमेरिका और चीन में कोविड के मामले बढ़ रहे हैं. क्या फिर से दुनियाभर में कोरोना का खतरा मंडरा रहा है? इस सवाल के जवाब में राजीव गांधी हॉस्पिटल के कोविड नोडल अधिकारी रहे डॉ अजित कहते हैं कि हर कुछ महीनों बाद कोविड के केस बढ़ते ही हैं. पिछले तीन साल से वायरस का यही पैटर्न है. इस बार भी ऐसा ही हो रहा है. इस बार केस बढ़ने का कारण कोविड का जेएन.1 वेरिएंट है. ये वेरिएंट दुनिया के कई देशों में फैलने के बाद भारत में भी आ गया है.
नया वेरिएंट जब भी आएगा तो केस बढ़ेंगे ही, लेकिन यह देखना है कि वेरिएंट खतरनाक तो नहीं है. इसकी वजह से हॉस्पिटलाइजेशन या मौतों के आंकड़ें में इजाफा तो नहीं हो रहा है. अगर ऐसा नहीं है तो चिंता की कोई बात नहीं है. लेकिन अगर हॉस्पिटाइजेशन बढ़ रहा है तो विश्व स्वास्थ्य संगठन को इस पूरे मामले पर नजर रखनी होगी .







