Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

यूसीसी के बहाने सत्ता में आने के लिए ये है दुष्प्रयास

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 17, 2023
in राष्ट्रीय, विशेष
A A
26
SHARES
862
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

अतुल कुमार अंजान


भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड पर कहा कि एक देश में दोहरी व्यवस्था कैसे चल सकती है. सबसे बड़ी बात ये है कि देश की गरीबी, बेरोजगारी, अर्थव्यवस्था, घटता निर्यात, बढ़ते आयात और देश के अंदर नौकरी के लिए कराहते युवाओं की चर्चा इस देश के अंदर नहीं हो रही है. वे संकीर्ण धार्मिक भावनाओं के बहते ज्वार पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहते हैं. इसलिए, अनावश्यक रुप से यूसीसी पर बहस कर रहे हैं.

इन्हें भी पढ़े

HAL

HAL ने तैयार किया नया स्टील्थ क्रूज़ मिसाइल कॉन्सेप्ट, भारत की मारक क्षमता को मिलेगी और मजबूती

March 25, 2026
Railway

रेल टिकट रिफंड नियमों में बड़ा बदलाव, इस तारीख से होगा लागू

March 25, 2026
pm modi

लोकसभा में इन 4 चार बिल पर चर्चा करेगी मोदी सरकार!

March 24, 2026
gas cylinder

अब हर घर तक पहुंचेगा सिलेंडर, सरकारी कंपनियां बना रही हैं ये धांसू प्लान

March 24, 2026
Load More

भारत के संविधान में यूनिफॉर्म सिविल कोड पर तो सिर्फ डेढ़ लाइनें लिखी गई हैं. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की साफ समझ है कि अनावश्यक रुप से 2024 चुनाव के पहले इस पर चर्चा करके समाज में ध्रुवीकरण कर, उसे हिन्दू-मुसलमान में बांटकर एक बार फिर से वोट लेने और सत्ता में आने के लिए ये दुष्प्रयास है. मैं पूछता हूं कि लॉ कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में खुलेतौर पर ये कहा था कि भारत में यूनिफॉर्म सिविल कोड की जरूरत नहीं है. फिर अकस्मात उसको उछालने की जरूरत क्यों पड़ी?

सरकार की मंशा पर सवाल

यूनिफॉर्म सिविल कोड लाकर आखिर हिन्दू-मुसलमान बनाने की क्या जरूरत है. अगर आप यूसीसी लागू करेंगे तो करीब साढ़े छह सौ कबीलों पर ये लागू होगी. आदिवासियों पर लागू होगी. हिन्दू बहनों पर लागू होगी. हमारी गोद लेने की प्रथा अलग है. हमारी उत्तराधिकार की प्रथा अलग है. संयुक्त परिवार की अलग सोच है. हमारे यहां पर अलग तरह की धाराएं हैं, उन धाराओं को आप क्या करेंगे?

मुसलमान और ईसाई धर्म में गोद लेने की परंपरा नहीं है. वहां गार्जियनशिप की परंपरा है और उनके अपने पर्सनल लॉ है. हमारे एक ही धर्म के अंदर बहुत से पर्सनल निजी लॉ है. जैन समुदाय और बौद्ध धर्म के लोगों के अलग हैं. आप एक डंडे से सबको हांकना चाहते हैं. सुनने में बड़ा अच्छा लगता है, एक देश एक कानून. लेकिन ये विविधता का देश है. इस देश में बहुत से धर्म हैं और उनके अंदर भी विभिन्न धाराएं हैं. हम आस्तिक होकर भी हिन्दू हैं और नास्तिक होकर भी हिन्दू हैं. हम किसी भगवान की पूजा नहीं करते और अगर सूर्य भगवान को सुबह जल चढ़ाते हैं, फिर भी हम हिन्दू हैं. बड़ी परंपराओं से लगा हुआ देश हैं.

इस देश के अंदर बहुत से इलाकों में विवाहित मुस्लिम महिलाएं सिन्दुर लगाती हैं. पर्सनल लॉ में इसका जिक्र है भी या नहीं, ये मुझे नहीं मालूम. मेरा ये मानना है कि इसमें किसी तरह की कोई छोड़खानी की आवश्यकता नहीं है. वोटों के लिए इस समाज को नहीं बांटा जाना चाहिए. धरती बांट दिया, गगन बांट दिया, अब इंसान को नहीं बांटिए. इस पर समझने की कोशिश करिए. इसके साथ ही, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से भी कहना चाहता हूं कि ज्यादा चीखने-चिल्लाने की जरूरत नहीं है. हम अपने देश के ही अंदर तमाम लोगों से ये कहना चाहते हैं.

न सूत न कपास, बुनकरों में लट्ठम लट्ठा

सबसे पहले ये जानना चाहेंगे कि आखिर सरकार का क्या प्रस्ताव है और लॉ कमीशन का क्या प्रस्ताव है? क्या सरकार ने इस बारे में कोई दस्तावेज रखा है क्या? लेकिन, सारे बीजेपी के लोग पहले हिन्दू-मुसलमान कर रहे हैं. फिर श्मशान और कब्रिस्तान और फिर शाहरुख खान और पठान. और अब यूसीसी. क्या यूसीसी राज्यों का विषय वस्तु है? असम और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री क्या कर रहे हैं? आप यूसीसी बना देंगे और राज्य पारित कर देगा, राज्यों के अंदर? ये देश है और संघीय ढांचा भी कोई चीज होती है.

फेडरल व्यवस्था से देश चलता है, जिसका अपना संविधान है. हमारी अनेकता में एकता है. हमारे देश के संविधान निर्माताओं ने बहुत सोचकर संविधान को तैयार किया है. इसलिए, कॉमन सिविल कोड पर सिर्फ डेढ़ लाइन लिखी गई है.

अगर सही मायने में सरकार चर्चा करना ही चाहती है कि दूसरे मुद्दे पर राजनीतिक दलों के साथ बातचीत होनी चाहिए. 2024 चुनाव से पहले इसे लाने का सिर्फ एक ही मकसद है कि किसी तरह से लोकसभा का चुनाव जीता जा सके. हिन्दू-मुसलमान का कार्ड खत्म हो गया. अब एक देश एक संविधान सुनने में बड़ा अच्छा लगता है. पार्लियामेंट में अगर इस तरह के बिेल लाए जाएंगे तो देश की जनता इसे फाड़कर फेंक देगी. स्वीकार नहीं करेगी. हरेक की अपनी परंपराएं हैं, उनके अपना रास्ते हैं.

आप कौन सा देश बनाना चाहते हैं?

बहुत से इलाके में भाई की कलाई पर रक्षाबंधन के मौके पर बहन राखी बांधती है. भाई-भाई बांधता है, एक दूसरे को. ये परंपराओं का देश है. आप इसे डंडे से नहीं हांक सकते हैं.  यूरोप के लोग जब एक दूसरे से मिलते हैं एक दूसरे के गाल से गाल मिलाते हैं. हमारे यहां पर सीने से सीना मिलाते है. हिन्दू मुसलमान मिलाते हैं. तो क्या करें अलग कर दें कि हिन्दू-हिन्दू मिलाएंगे और मुसलमान-मुसलमान मिलाएंगे? अगर यूसीसी का यही मतलब है तो उसे फाड़कर टुकड़े-टुकड़े कर देना चाहिए, जो हमारे बीच में, भाई-भाई में विभेद पैदा करता हो, जो भाई-भाई में खाई पैदा करता हो, जो हमारी संस्कृति को जलाकर खाक कर देता हो.

धर्म की भावनाओं पर, लहरों पर कुछ देर तक राजनीतिक रोटी सेंकी जा सकती है. लेकिन जब धर्म की लहरों के ऊपर उसे संकीर्णता का रूप दिया जाता है तो वो सम्प्रदायवादी दृष्टिकोण हो जाता है. लेकिन, आज धर्म की लहरों को अगर संकीर्ण बताओगे तो क्या होगा? सवाल उठता है कि आप कौन सा देश बनाना चाहते हैं? अखंड भारत या हस्तिनापुर? हम हस्तिनापुर नहीं चाहते हैं. अतुल कुमार अंजान महाभारत के हस्तिनापुर के समर्थक नहीं है. आपका राष्ट्रवाद संकुचित राष्ट्रवाद है. वोट का राष्ट्रवाद है. हमारा राष्ट्रवाद किंकर्तव्यता को जोड़ता है और व्यापक तरीके से सीमाओं के अंदर रहने वाले हर जाति-धर्म, हर मान्यता और परंपराओं को एक साथ जोड़कर मां भारती के कदमों पर रखता है.


नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं.

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
Pahal media group

जरुरतमंदो के शिविरों के आयोजन के लिए राजस्थान पहुंचा ‘पहल’ का कारवां

November 2, 2023
ratan tata

रतन टाटा : विनम्रता और कुशल प्रबंधन का अद्भुत संगम

October 17, 2024
hospitals

मुफ्त इलाज का वादा, चला रहे निजी अस्पताल…

June 24, 2025
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • मीन राशि में शनि-मंगल-बुध की युति, त्रिग्रही योग करेगा इन राशियों पर खुशियों की बौछार
  • मिनटों में खाना पचाता है पान का शरबत, जानें कैसे बनाएं?
  • क्रिमिनल जस्टिस’ को फेल करती है 8 एपिसोड वाली सीरीज, अब आ रहा नया सीजन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.