नई दिल्ली : 23 मई से देशभर में 2000 के नोटों को एक्सचेंज करने का काम शुरू हो चुका है. जिस किसी के भी पास 2000 के नोट रखे हैं वह बैंक से नोटों का बदलने की परिक्रिया में किसी न किसी रूप में लगा है. क्योंकि सरकार ने 23 मई से 30 सितंबर तक 2000 के नोटों को बदलने का डेड लाइन दी है. इसके लिए रिजर्व बैंक ने कुछ गाइडलाइन भी जारी की है.. लेकिन आपके मन में एक सवाल जरूर उठ रहा होगा कि आखिर रिजर्व बैंक इतने सारे 2000 के नोटों का आखिर क्या करेगा? इस आर्टिकल में आपको इन सभी सवालों के जवाब सरल शब्दों में मिल जाएंगे.
ये होती है प्रक्रिया
जानकारी के मुताबिक सबसे पहले बंद हुए नोट आरबीआई के 19 अलग-अलग रीजनल ऑफिस में पहुंचते हैं. इसके बाद करेंसी वेरिफिकेशन एंड प्रोसेसिंग सिस्टम’(CVPS) की प्रक्रिया से नोटों को गुजरना होता है. जिसमें असली व नकली नोटों की पहचान भी की जाती है. उसके बाद आरबीआई की मशीनें नोटों को कतरन में तब्दील करती हैं. आपको बता दें कि देशभर में नोटों को कतरन बनाने वाली रिजर्व बैंक 60 से ज्यादा मशीने लगी हैं. 2000 के नोटों की कतरन बनने के बाद इन नोटों की ब्रिक्स तैयार की जाती है. इसके बाद टेंडर प्रोसेस के जरिए पेपर रिसाइकिल कंपनियों को बेचा जाता है…
बनाए जाते हैं खूबसूरत गिफ्ट
रिसाइकिलिंग कंपनी इन्हें गिफ्ट मेकर्स को सेल कर देती हैं. जिसके बाद इन कतरन के शानदार गिफ्ट पैक बनाए जाते हैं. कार्डबोर्ड, पेन, टेबल लैंप , कोस्टर्स आदि गिफ्ट बनाए जाते हैं. इन गिफ्ट की खरीददारी आरबीआई की सोवेनियर शॉप्स से की जा सकती है. यही नहीं नेशनल स्कूल ऑफ डिजाइन (NID) के बच्चे भी इन कतरन का गिफ्ट आइटम्स बनाते हैं. कोकाता के म्यूजियम में भी आरबीआई की एक दुकान है. जिस पर नोटों की कतरन से बने गिफ्ट आइटम मिलते हैं..







