प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली : झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली – 2025 में ‘हो’ भाषा के अभ्यर्थियों के लिए राज्य सरकार ने मात्र तीन जिला पश्चिम सिंहभूम,सरायकेला-खरसाँवां और पूर्वी सिंह भूम को शामिल किया है। ‘हो’ भाषा के अभ्यर्थियों के लिए खूँटी, राँची, रामगढ़, हजारीबाग, धनबाद, बोकारो, दुमका, गुमला एवं अन्य जिलों को शामिल नही किया गया है।

इन जिलों में भी ‘हो’ भाषा के अभ्यर्थियों के लिए शामिल कराने को लेकर आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा का प्रतिनिधिमंडल, पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के साथ माननीय राज्यपाल से मिला। ‘हो’ भाषा को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया गया है। उपरोक्त जिला में भी ‘हो’ भाषा-भाषा के लोग निवास कर रहे हैं । इसके बावजूद उपेक्षित करने से ‘हो” समाज के लोगों ने नाराजगी जतायी है ।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री,झारखंड सरकार,राँची से भी मुलाकात का प्रयास हुआ। परंतु राज्य से बाहर हैं । आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री का कार्यालय पहुँचा और ज्ञापन के माध्यम से उपरोक्त जिलों में भी ‘हो’ भाषा के अभ्यर्थियों के लिए माँग रखा ।
कौन-कौन रहे मौजूद ?
प्रतिनिधिमंडल में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा,आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष इपिल सामड, उपाध्यक्ष सुरा बिरूली, महासचिव गब्बरसिंह हेम्ब्रम, कोषाध्यक्ष सुरेन्द्र पुरती, संयुक्त सचिव रवि बिरूली, धर्म सचिव सोमा जेराई, प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द बिरूवा, कोषाध्यक्ष शंकर सिधु, जिलाध्यक्ष शेरसिंह बिरूवा, सचिव ओएबन हेम्ब्रम, सदस्य सिकंदर तिरिया आदि लोग मौजूद थे ।







