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ट्रंप के नए टैरिफ का भारतीय फार्मा कंपनियों पर सीमित असर, अमेरिका को दवाओं की आपूर्ति रहेगी जारी

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 22, 2026
in विश्व, व्यापार
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दवा उद्योग
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नई दिल्ली। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से जेनेरिक दवाओं पर लगाए गए नए टैरिफ का अमेरिकी बाजार में दवाओं की आपूर्ति करने वाली भारतीय फार्मा कंपनियों पर बहुत कम असर पड़ेगा, क्योंकि ये 2028 से लागू होने वाले हैं। यह जानकारी एनालिस्ट की ओर से बुधवार को दी गई। कई भारतीय फार्मा कंपनियों की अमेरिका में सहायक कंपनियां हैं। साथ ही, भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले उत्पादों के ट्रांसफर प्राइस और अमेरिकी बाजार में उनकी अंतिम बिक्री कीमत में काफी अंतर होता है। माना जा रहा है कि टैरिफ उस कीमत पर लगाया जाएगा, जिस पर उत्पाद अमेरिकी बाजार में प्रवेश करता है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के एसवीपी एवं इंस्टीट्यूशनल रिसर्च एनालिस्ट (हेल्थकेयर) तुषार मनुधाने ने कहा, “अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली करीब 90 प्रतिशत जेनेरिक प्रिस्क्रिप्शन दवाएं आयात की जाती हैं। ऐसे में जब भी यह टैरिफ लागू होगा, इसका असर अमेरिका को दवाएं निर्यात करने वाले सभी देशों पर होगा, यह केवल भारत तक सीमित नहीं है।”

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उन्होंने कहा, “भारत जैसे देशों को आउटसोर्सिंग का मुख्य कारण यह है कि यहां दवाओं के निर्माण की लागत अमेरिका की तुलना में 40 से 60 प्रतिशत कम है। टैरिफ लागू होने के बाद भी भारत की कम लागत पर उत्पादन करने की यह प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त पूरी तरह खत्म नहीं होगी।” मनुधाने ने बताया कि यदि अमेरिका में नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित भी किया जाता है, तो उसे तैयार होने में कम से कम दो वर्ष लगेंगे। इसके बाद प्लांट का निरीक्षण और उत्पादों की मंजूरी (प्रोडक्ट अप्रूवल) की प्रक्रिया में भी कम से कम 12 से 15 महीने का समय लगेगा। इससे नए प्रतिस्पर्धियों के बाजार में आने में और अधिक देरी होगी।

उन्होंने कहा कि इन सभी कारणों से अमेरिका में जेनेरिक दवाओं के निर्माण संयंत्र स्थापित करने की आर्थिक व्यवहार्यता पर सवाल उठते हैं। इसलिए अमेरिकी बाजार में दवाओं की आपूर्ति करने वाली भारतीय फार्मा कंपनियों पर इसका प्रभाव बेहद सीमित रहने की संभावना है। भारत को अकसर “दुनिया की फार्मेसी” कहा जाता है, क्योंकि वह दुनिया के अनेक देशों को जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करता है।

अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली जेनेरिक दवाओं में मात्रा के आधार पर भारतीय दवाओं की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अमेरिका को 9.7 अरब डॉलर मूल्य की दवाओं का निर्यात किया, जो उसके कुल 25.8 अरब डॉलर के वैश्विक फार्मा निर्यात का 38 प्रतिशत था।

राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि 1 अगस्त 2026 से आयातित जेनेरिक दवाओं को दो वर्षों तक टैरिफ से छूट मिलेगी। इसके बाद इन पर पहले 100 प्रतिशत और फिर 200 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य फार्मास्युटिकल उत्पादन को अमेरिका में स्थानांतरित करना है।

इस घोषणा के तहत विदेशी जेनेरिक दवा निर्माता कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए दो वर्षों का समय मिलेगा। ऐसा नहीं करने पर अमेरिकी बाजार में भेजी जाने वाली दवाओं पर भारी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप ने कहा कि चरणबद्ध टैरिफ व्यवस्था का उद्देश्य दवा कंपनियों को अमेरिका में विनिर्माण सुविधाओं में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है।

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