लखनऊ/वारणसी. काशी विश्वनाथ मंदिर के साथ लगी ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर विवाद को लेकर अब सबकी नजरें बनारस में कोर्ट से 12 सितम्बर को आने वाले फैसले पर टिकी हुई है. 12 सितंबर को आने वाले फैसले के बाद ही ज्ञानवापी मंदिर-मस्जिद विवाद का भविष्य तय होगा. बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कई दावे किए गए, जिसमें कहा गया कि 16वीं सदी में मुगल बादशाह औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर को गिराकर ज्ञानवापी मस्जिद बनवाई थी.
मुस्लिम पक्ष ने इसे फव्वारा बताया था. विवाद इतना बढ़ा कि इस कमीशन की कार्यवाही के खिलाफ अंजुमन इंतेजामिया कमेटी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई. मुस्लिम पक्ष लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि 1947 के बाद किसी धार्मिक स्थल के चरित्र को बदला नहीं जा सकता. साथ ही साथ 1991 के विशेष उपासना स्थल कानून के तहत कमीशन की कार्यवाही भी गलत है.
बता दें कि श्रृंगार गौरी नियमित दर्शन पूजन मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निचली अदालत मुकदमे की मेटेंनबिल्टी पर सुनवाई हो रही थी. आसान भाषा में कहा जाए तो रुल 7/11 यानी की ज्ञानवापी मुकदमे की मेटेंनबिल्टी का मतलब यह हुआ कि क्या ज्ञानवापी मामले में जो मुकदमा दायर किया गया है उस आगे सुनवाई की जाए या फिर नहीं, वाराणसी कोर्ट इस मसले पर अपना बड़ा फैसला सुनाएगा.
जून के आखिरी हफ्ते से लगातार इस मामले पर हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष के वकीलों द्वारा दलीलें पेश की जा रही थीं. सुनवाई पूरी होने के बाद ज्ञानवापी मुकदमा सुनने योग्य है या नहीं, इस मसले पर फैसले को जिला जज ने रिजर्व कर लिया. मामले पर जिला जज ऐके विश्वेश अब 12 सितंबर को फैसला सुनाएंगे. ज्ञानवापी मामले में अदालत का फैसला मंदिर में पूजा अर्चना की मांग के मुद्दे को अदालती मामलों में एक नई दिशा देगी. देखना बेहद अहम है कि पूजा के अधिकार की लड़ाई का भविष्य क्या होता है?







