“हर कोई सोचेगा कि यह शेन वार्न या शोएब अख्तर होंगे या फिर ब्रेट ली या ग्लेन मैकग्रा, लेकिन मुझे उनकी बॉलिंग का सामना करते हुए कोई दिक्कत नहीं हुई। इन गेंदबाजों के सामने तो मुझे अपनी बॉडी या हेलमेट पर ही गेंद लगने का डर रहता था। मैक्ग्रा के सामने ऐसा लगता था कि हम बस उन पर रन नहीं कर सकते।”
लेकिन मुरलीधरन के खिलाफ मामला अलग होता था। मुझे डर रहता था कि पता नहीं मैं उनके खिलाफ स्कोर कैसे कर पाऊंगा? क्योंकि आउट होने का खतरा बरकरार है। मैं उनकी ‘दूसरा’ गेंद को पढ़ने में संघर्ष करता था।”
बता दे कुछ साल पहले वीरेंद्र सहवाग ने खुलासा किया था कि वह ऑफ स्पिनरों को कभी भी वास्तविक गेंदबाज के तौर पर नहीं आंकते हैं। भारत के स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भी पहले यह खुलासा किया है कि वीरेंद्र सहवाग ने बीमार होने के बावजूद हरभजन सिंह की किस तरह से धुनाई की थी और अब वे मुरलीधरन को एक वास्तविक गेंदबाज ना मानने के बावजूद उनसे आउट होने के खतरे को लेकर डरे रहते थे।
सहवाग ने आगे कहा, “मैंने उन्हें कभी रियल गेंदबाज के तौर पर नहीं आंका, लेकिन मैं डरा रहता था। मैं उन्हें हिट करने की कोशिश करता था, लेकिन आमतौर पर आउट हो जाता था। मेरा इगो हर्ट हो जाता था कि कैसे ऑफ स्पिनर मुझे रन नहीं करने दे रहा है। मुझे यह समझने में कई साल लगे कि मुरलीधरन को किस तरह से खेलना है।”







