प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली : दिल्ली शराब नीति घोटाला (Delhi Excise Policy Scam) दिल्ली सरकार की 2021-22 की एक्साइज पॉलिसी से जुड़ा एक विवादास्पद मामला है, जिसमें आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं पर भ्रष्टाचार, रिश्वत और नीति में अनियमितताओं के आरोप लगे थे। यह नीति नवंबर 2021 में लागू की गई थी, लेकिन जुलाई 2022 में वापस ले ली गई।
जांच एजेंसियों CBI और ED ने दावा किया कि नीति में जानबूझकर खामियां छोड़ी गईं, जिससे शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाया गया और AAP को किकबैक मिले। हालांकि, 27 फरवरी को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया, क्योंकि CBI के पास पर्याप्त सबूत नहीं थे। कोर्ट ने कहा कि आरोप “कल्पना पर आधारित” थे और कोई साजिश साबित नहीं हुई।
2021 में नई एक्साइज पॉलिसी लाई
दिल्ली सरकार ने 2021 में नई एक्साइज पॉलिसी लाई, जिसका उद्देश्य शराब माफिया को खत्म करना, राजस्व बढ़ाना और वितरण सुधारना था। इसमें सरकारी दुकानों को बंद कर प्राइवेट लाइसेंसी को बिक्री सौंपी गई। दिल्ली को 32 जोनों में बांटा गया, हर जोन में 27 दुकानें। नीति में होम डिलीवरी, रात 3 बजे तक दुकानें खुली रखना, असीमित डिस्काउंट और MRP के बजाय फ्लेक्सिबल प्राइसिंग जैसी सुविधाएं थीं। इससे राजस्व 27% बढ़कर 8,900 करोड़ रुपये हो गया। लेकिन आरोप लगे कि नीति में बदलाव बिना उचित अनुमति के किए गए, जिससे शराब कार्टेल को फायदा पहुंचा।
केजरीवाल और सिसोदिया पर आरोप
CBI और ED के अनुसार, नीति में अनियमितताएं थीं, जिनमें रिश्वत मांगना, किकबैक और नीति में बदलाव शामिल थे। मुख्य आरोप निम्नलिखित थे नीति में अनधिकृत बदलाव मनीष सिसोदिया (तत्कालीन एक्साइज मंत्री) पर आरोप था कि उन्होंने LG या कैबिनेट की मंजूरी के बिना नीति में बदलाव किए, जैसे लाइसेंस फीस पर 144.36 करोड़ रुपये की छूट (कोविड का बहाना बनाकर) और बीयर पर इंपोर्ट पास फीस हटाना। यह दिल्ली एक्साइज रूल्स 2010 और ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स 1993 का उल्लंघन था।
रिश्वत और किकबैक
AAP नेताओं पर “साउथ ग्रुप” (शराब कारोबारियों का समूह) से 100 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप था। ED ने दावा किया कि नीति में 12% थोक मार्जिन प्राइवेट कंपनियों को दिया गया, बदले में 6% किकबैक AAP को मिला। फंड्स को पंजाब और गोवा चुनावों में इस्तेमाल किया गया। BRS नेता के. कविता को ब्रिज के रूप में बताया गया, जो साउथ ग्रुप और AAP के बीच मध्यस्थ थी।
कार्टेलाइजेशन और अनुचित फायदे: नीति से शराब कार्टेल (जैसे ब्रिंडको स्पिरिट्स के अमनदीप ढल, इंडोस्पिरिट के समीर महेंद्रू) को फायदा पहुंचाया गया। क्रेडिट नोट्स के जरिए फंड्स पब्लिक सर्वेंट्स को डायवर्ट किए गए। AAP के विजय नायर और मनोज राय जैसे मध्यस्थों पर आरोप थे।
AAP के शीर्ष नेताओं को फंसाने की कोशिश
ED ने आरोप लगाया कि केजरीवाल ने मुख्य आरोपियों से संपर्क किया और सहयोग की सलाह दी। उन्हें नीति में साजिश का हिस्सा बताया गया, हालांकि शुरुआती FIR में उनका नाम सीधे नहीं था। दिल्ली के मुख्य सचिव की रिपोर्ट में 580 करोड़ रुपये से ज्यादा के नुकसान का दावा किया गया। AAP ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया, जिसमें PM मोदी और HM अमित शाह शामिल थे। केजरीवाल ने कहा कि यह AAP के शीर्ष नेताओं को फंसाने की कोशिश थी।
नवंबर 2021 में नई एक्साइज पॉलिसी लागू। जुलाई 2022 में मुख्य सचिव नरेश कुमार की रिपोर्ट LG को, CBI जांच की सिफारिश। पॉलिसी वापस ली गई। अगस्त 2022 में CBI ने सिसोदिया के घर पर छापा मारा, FIR दर्ज। 15 लोगों के नाम, जिसमें सिसोदिया मुख्य। सितंबर 2022 में AAP के विजय नायर गिरफ्तार। फरवरी 2023 में सिसोदिया गिरफ्तार। मार्च 2024 में ED ने केजरीवाल को 9 समन भेजे, लेकिन वे पेश नहीं हुए। 22 मार्च को गिरफ्तार। 2024-2025 में सुप्रीम कोर्ट से बेल मिली, लेकिन मामला चला। 27 फरवरी 2026 में राउज एवेन्यू कोर्ट ने CBI केस में सभी आरोपियों को बरी किया। कोर्ट ने CBI की जांच पर सवाल उठाए, कहा कि चार्जशीट में गवाह या सबूत नहीं थे।
बरी होने के बाद क्या बोले केजरीवाल
बरी होने के बाद केजरीवाल और सिसोदिया ने इसे “सत्य की जीत” बताया। AAP समर्थकों ने जश्न मनाया, रैली निकाली। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने BJP पर हमला किया, इसे उनकी “नैतिक मौत” कहा। कुछ ने CBI की जांच पर सवाल उठाए। ED का मनी लॉन्ड्रिंग केस अभी अलग से चल सकता है, लेकिन CBI केस खत्म हो गया।







