नई दिल्ली। भारत ने साल 2047 तक विकसित देश बनने का लक्ष्य बनाया है, लेकिन इसके लिए कितनी विकास दर की जरूरत होगी. सांख्यिकी सचिव सुभाष गर्ग ने 16 अक्टूबर को बताया कि भारत को अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए हर साल कम से कम 8 से 9 फीसदी विकास दर की जरूरत होगी. उन्होंने कहा कि अगर लंबे समय में अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करना है तो भारत को अगले 2 दशक तक 8 से 9 फीसदी की दर से ग्रोथ करना होगा.
गर्ग ने कहा कि भारत अगले 20 साल में अपनी अर्थव्यवस्था को करीब 9 गुना बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है. लेकिन, इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तेज ग्रोथ की जरूरत है. उन्होंने कहा कि यह भारत के आगे बढ़ने का सही समय है और देश की आर्थिक प्रगति अगले दो दशक तक तेज गति से आगे बढ़ती रहेगी. ग्लोबल लेवल पर भले ही अभी दबाव दिख रहा है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी गति से बढ़ रही है और यह 8 फीसदी के आसपास है, जो उसके लक्ष्य की तरफ जाती दिख रही है.
जीडीपी कोई तय मानक नहीं है
गर्ग ने कहा कि किसी देश की ग्रोथ और उसकी मजबूती के लिए सिर्फ जीडीपी को ही तय मानक नहीं माना जा सकता है. हालांकि, जीडीपी एक बड़ा जरिया होता है किसी देश की प्रगति को मापने का. ऐसे में देश की आर्थिक कीमत को मापने के लिए अब और भी स्रोत की जरूरत होगी. इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं उत्पादन के आंकड़े. अगर आप इन आंकड़ों पर नजर रखेंगे तो यह देश की बेहतर आर्थिक स्थिति समझा सकेंगे.
संसाधन निभाते हैं बड़ी भूमिका
गर्ग ने कहा कि विकास दर बेहतर बनाने और अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए संसाधन बड़ी भूमिका निभाते हैं. इसमें प्राकृतिक संसाधन और मानव संसाधन दोनों शामिल हैं. भारत तो वैसे भी युवाओं का देश है और आने वाले समय में देश की तेज विकास दर के लिए यूथ पॉवर की काफी जरूरत होगी. बेहतर होगा कि देश को 8 से 9 फीसदी की विकास दर पर बनाए रखने के लिए युवाओं को पेशेवर बनाना चाहिए. भारत के युवाओं की डिमांड आज दुनियाभर में हो रही है और भारत की जीडीपी में सर्विस सेक्टर का योगदान भी तेजी से बढ़ता जा रहा है.







