Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home विशेष

संघ के संगठनों का क्या मतलब

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 23, 2022
in विशेष
A A
RSS chief
1
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

हरिशंकर व्यास

केंद्र में जब भी भाजपा की सरकार बनती है तो पार्टी, सरकार और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के रिश्तों को लेकर खूब चर्चा होती है। विपक्षी पार्टियां आरोप लगाती हैं कि सरकार संघ के एजेंडे पर काम कर रही है। आजकल यहीं आरोप राहुल गांधी लगाते हैं। वे हर जगह कहते हैं कि उनको संघ की विचारधारा के खिलाफ लडऩा है। वे हर जगह कहते हैं कि देश की सारी संस्थाओं को नष्ट किया जा रहा है, वहां संघ के लोगों को बैठाया जा रहा है। राहुल ने कई बार कहा कि देश की हर संस्था में संघ का एक आदमी बैठा है। हो सकता है कि संस्थाओं में संघ के लोगों की नियुक्ति हुई हो। आखिर केंद्र सरकार को कहीं न कहीं से तो लोग लाकर संस्थाओं में रखने हैं तो संभव है कि संघ से लोग लाए गए हों। लेकिन इन लोगों का नीतिगत मामलों में कोई दखल होता है या कोई बड़ा फैसला करते हैं, ऐसा नहीं है।

इन्हें भी पढ़े

अनादि समर

अनादि समर : छावा के बलिदान से जाग उठा हिन्दू

April 13, 2026
cm yogi

थारू आदिवास को मिला जमीन का अधिकार

April 12, 2026
college student

बदल गई पढ़ाई की परिभाषा, अब कॉलेज जाने की टेंशन होगी खत्म

April 11, 2026
RSS

संघ की वैचारिक यात्रा का ऐतिहासिक दस्तावेज ‘आरएसएस @100’

April 1, 2026
Load More

चाहे संघ की ओर से नियुक्त कराए लोग हों या संघ के संगठन हों उनका कोई मतलब नहीं रह गया है। सारे नीतिगत फैसले सरकार करती है और उसका संघ की विचारधारा से कोई लेना-देना नहीं होता है। तभी संघ की संस्थाएं आर्थिक नीतियों से लेकर कृषि नीति, श्रम नीति, विनिवेश नीति आदि का विरोध करती रही हैं और सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया। एक जमाना था, जब स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल जैसे संगठन खूब सक्रिय थे। देश भर में लोग अशोक सिंघल और प्रवीण तोगडिय़ा को जानते थे। लेकिन आज किसी को पता नहीं है कि ये संगठन कौन चला रहा है, इनका एजेंडा क्या है और कार्यक्रम क्या हैं।

मिसाल के तौर पर स्वदेशी जागरण मंच को देखें। वैश्वीकरण के हल्ले के समय इसका गठन किया गया था। दत्तोपंत ठेंगड़ी, मदनदास देवी, एस गुरुमूर्ति आदि के साथ मुरलीधर राव भी इसमें शामिल थे। भाजपा में जाने से पहले उन्होंने कई साल इस संगठन को चलाया। लेकिन आज मुरलीधर राव कहां हैं और यह संगठन कहां है! इस संगठन का गठन देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और छोटे कारोबारियों को बचाने के लिए हुआ था। इसने आर्थिक मामलों में जितनी राय दी, जो सुझाव दिए लगभग सब मोदी सरकार ने कूडेदानी में फेंक दिए। सरकार ने किसी पर ध्यान नहीं दिया। स्वदेशी जागरण मंच ने राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयर इंडिया को बेचने का विरोध किया था। मंच का कहना था कि एयर इंडिया के पास बेहिसाब संपत्ति है और सरकार को उसमें से कुछ संपत्ति बेच कर पैसे का इंतजाम करना चाहिए ताकि एक राष्ट्रीय विमानन सेवा चलती रह सके। लेकिन सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। सीधे सीधे राष्ट्रीय विमानन कंपनी को लगभग मुफ्त में टाटा समूह को दो दिया गया।

इसी तरह स्वदेशी जागरण मंच बरसों से इस बात का आंदोलन चला रहा है कि चीन की कंपनियों को भारत में ठेका देना बंद करना चाहिए। चीन के साथ कारोबार कम करने के लिए मंच का आंदोलन चलता है। लेकिन सरकार उलटे ज्यादा से ज्यादा ठेका चीनी कंपनियों को दे रही है और चीन के साथ भारत का कारोबार बढ़ता ही जा रहा है। भारी घाटे के बावजूद चीन के साथ भारत का कारोबार पहली बार एक सौ अरब डॉलर से ज्यादा का हुआ है। चीन की कंपनियां भारत में खुल कर कारोबार कर रही हैं। यहां तक कि ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में भी चीन के निवेश वाली कंपनियों को जगह मिली है। ऐसे ही मंच ने अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों को रोकने के लिए आंदोलन किए। उनका कहना था कि इससे देश के छोटे कारोबारियों को बड़ा नुकसान होगा। लेकिन रोकने की बजाय विदेशी रिटेल कंपनियों को कई तरह की छूट दी गई। स्वदेशी जागरण मंच चाहता है कि हेल्थ इंश्योरेस के क्षेत्र में विदेशी कंपनियां न आएं, मंच चाहता है कि इंडिया नाम समाप्त करके सिर्फ भारत नाम रखा जाए, मंच चाहता है कि छोटे कारोबारियों को बढ़ावा दिया जाए लेकिन सरकार को इसकी परवाह नहीं है। यहां तक कि स्वदेशी जागरण मंच के स्वावलंबी भारत का नारा भी प्रधानमंत्री ने नहीं अपनाया। उसकी जगह आत्मनिर्भर भारत कहा गया।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
Army

GST में कटौती कैसे साबित होगा सेना के लिए गेमचेंजर?

September 6, 2025
US attacks on Iran

ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका के हमले… अब तक क्या-क्या हुआ !

June 22, 2025
Anantnag Police

अनंतनाग पुलिस ने पहलगाम के आतंकियों की तस्वीरें की जारी !

April 24, 2025
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • सीएम रेखा गुप्ता का निर्देश, दिल्ली में सरकारी शराब की दुकानों का होगा ऑडिट
  • शांतिवार्ता फेल होते ही पाकिस्तान हुआ बर्बाद!
  • कैसे-कब और क्यों शुरू हुआ नोएडा का मजदूर आंदोलन?

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.