Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home जुर्म

क्या होती है ‘नजूल भूमि’, जिसकी वजह से उत्तराखंड में भड़का दंगा

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
February 11, 2024
in जुर्म, राज्य
A A
हलद्वानी हिंसा
16
SHARES
535
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

हलद्वानी: उत्तराखंड के हलद्वानी जिले में गुरुवार (8 फरवरी) को हिंसा भड़क उठी, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई लोग घायल हैं. दरअसल, जिला प्रशासन ‘नजूल भूमि’ पर कथित तौर पर अवैध रूप से बनी एक मस्जिद और मदरसे को ध्वस्त करने पहुंची थी. इसके बाद लोग उग्र हो गए और यह हिंसा में बदल गया. हलद्वानी हिंसा के बाद पहाड़ के दूसरे जिलों में भी तनाव है. पुलिस अलर्ट पर है.

आखिर नजूल भूमि (Nazool Land) क्या होती है? ऐसी भूमि का मालिक कौन होता है? नजूल जमीन उपयोग कैसे किया जाता है? और जिस ज़मीन पर तोड़फोड़ की कार्रवाई हुई, क्या वह नज़ूल जमीन थी? समझते हैं इस Explainer में…

इन्हें भी पढ़े

Sri Ram Katha

हैदराबाद : श्री राम नवमी पर हुई 9 दिवसीय श्री राम कथा की भव्य पूर्णाहुति, सूर्य तिलक बना आकर्षण

March 27, 2026
pm modi

PM मोदी कल मुख्यमंत्रियों संग करेंगे हाई लेवल मीटिंग, मिडिल ईस्ट के हालात होगी चर्चा

March 26, 2026
Electricity bill

उत्तराखंड : बकाया बिल पर UPCL सख्त, कई सरकारी दफ्तरों की बिजली काटी

March 25, 2026
Delhi Police

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल का बड़ा एक्शन, किया आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़

March 24, 2026
Load More

क्या होती है नजूल भूमि?

देश के तमाम तशरों, कस्बों वगैरह में ऐसे साइन बोर्ड लगे मिल जाएंगे जिन पर लिखा होता है- ‘यह नजूल की जमीन (Nazool Land) है’. ब्रिटिश शासन के दौरान, भारत में देसी रियासतें हुआ करती थीं. कुछ रियासतें ब्रिटिश हुकूमत की समर्थक थीं तो कुछ ने इनके खिलाफ विद्रोह किया. ब्रिटिश फौज और विद्रोह करने वाली रियासतों के बीच कई लड़ाइयां हुईं. युद्ध में जो राजा अथवा विद्रोही हार जाता, अंग्रेज अक्सर उनसे उनकी ज़मीन छीन लेते थे.

1947 में जब भारत आजाद हुआ तो ये अंग्रेजों ने ये जमीनें खाली कर दीं, लेकिन उस वक्त राजाओं और राजघरानों के पास इन जमीनों पर अपना पूर्व स्वामित्व साबित करने के लिए उचित दस्तावेज़ों थे ही नहीं. ऐसे में सरकार ने इन ज़मीनों को ‘नजूल भूमि’ (Nazool Land) के रूप में चिह्नित किया. चूंकि अंग्रेजों के खिलाफ पूरे देश में विद्रोह हुआ और विद्रोहियों की जमीनें कब्जे में ली गईं, इसीलिये पूरे देश में नजूल की जमीनें पाई जाती हैं.

कौन होता है नजूल भूमि का मालिक?

नजूल की जमीन (Nazool Land) का स्वामित्व संबंधित राज्य सरकारों के पास होता है, लेकिन अक्सर इसे सीधे राज्य संपत्ति के रूप में प्रशासित नहीं किया जाता है. राज्य सरकार, आम तौर पर ऐसी भूमि को किसी को एक निश्चित अवधि के लिए पट्टे पर आवंटित करता है. लीज की अवधि 15 से 99 साल के बीच हो सकती है.

यदि पट्टे की अवधि समाप्त हो रही है, तो कोई व्यक्ति स्थानीय प्रशासन के राजस्व विभाग को एक लिखित आवेदन जमा करके पट्टे को नवीनीकृत करने का अनुरोध कर सकता है. एक बात और महत्वपूर्ण है. सरकार नजूल भूमि को वापस लेने या पट्टे को नवीनीकृत करने या इसे रद्द करने के लिए स्वतंत्र है.भारत के लगभग सभी प्रमुख शहरों में, तमाम संस्थाओं को नजूल भूमि आवंटित की गई है.

क्या कहता है कानून?

अलग-अलग राज्यों में नजूल भूमि से संबंधित अलग नियम और कानून हैं. हालांकि, नजूल भूमि (स्थानांतरण) नियम, 1956 वह कानून है जिसका उपयोग ज्यादातर नज़ूल भूमि निर्णय के लिए किया जाता है, सरकार आम तौर पर नज़ूल भूमि का उपयोग सार्वजनिक उद्देश्यों जैसे स्कूलों, अस्पतालों, ग्राम पंचायत भवनों आदि के निर्माण के लिए करती है. भारत के कई शहरों में नज़ूल भूमि के रूप में चिह्नित भूमि के बड़े हिस्से को आम तौर पर पट्टे पर हाउसिंग सोसाइटियों के लिए उपयोग किया जाता है.

क्या हलद्वानी की जमीन नजूल थी?

हलद्वानी जिला प्रशासन के अनुसार, जिस जमीन पर मस्जिद और मदरसा बना है, वह नगर निगम (नगर परिषद) में नजूल भूमि के रूप में पंजीकृत है. प्रशासन का कहना है कि पिछले 15-20 दिनों से सड़कों को जाम से मुक्त कराने के लिए अवैध संपत्तियों को तोड़ने का अभियान चल रहा है. इसी क्रम में मस्जिद और मदरसा संचालकों को 30 जनवरी को नोटिस देकर भूमि स्वामित्व के दस्तावेज उपलब्ध कराने अथवा तीन दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाने को कहा था.

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
Spy Satellite

भारत की ‘तीसरी आंख’ से नहीं बचेंगे पाकिस्तानी आतंकवादी!

April 27, 2025
india economy

क्या भारत कभी विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन पाएगा?

June 10, 2024
exchange for bottles

प्लास्टिक की बोतलों के बदले बच्चों की भूख मिटा रहा है 23 साल का ये लड़का!

June 21, 2023
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • हैदराबाद : श्री राम नवमी पर हुई 9 दिवसीय श्री राम कथा की भव्य पूर्णाहुति, सूर्य तिलक बना आकर्षण
  • होर्मुज स्‍ट्रेट खुलवाने को भारत और फ्रांस आए एक साथ, मानेगा ईरान?
  • पश्चिम एशिया संकट के बीच फुल एक्शन में केंद्र सरकार!

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.