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Home जुर्म

क्या होती है ‘नजूल भूमि’, जिसकी वजह से उत्तराखंड में भड़का दंगा

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
February 11, 2024
in जुर्म, राज्य
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हलद्वानी हिंसा
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हलद्वानी: उत्तराखंड के हलद्वानी जिले में गुरुवार (8 फरवरी) को हिंसा भड़क उठी, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई लोग घायल हैं. दरअसल, जिला प्रशासन ‘नजूल भूमि’ पर कथित तौर पर अवैध रूप से बनी एक मस्जिद और मदरसे को ध्वस्त करने पहुंची थी. इसके बाद लोग उग्र हो गए और यह हिंसा में बदल गया. हलद्वानी हिंसा के बाद पहाड़ के दूसरे जिलों में भी तनाव है. पुलिस अलर्ट पर है.

आखिर नजूल भूमि (Nazool Land) क्या होती है? ऐसी भूमि का मालिक कौन होता है? नजूल जमीन उपयोग कैसे किया जाता है? और जिस ज़मीन पर तोड़फोड़ की कार्रवाई हुई, क्या वह नज़ूल जमीन थी? समझते हैं इस Explainer में…

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क्या होती है नजूल भूमि?

देश के तमाम तशरों, कस्बों वगैरह में ऐसे साइन बोर्ड लगे मिल जाएंगे जिन पर लिखा होता है- ‘यह नजूल की जमीन (Nazool Land) है’. ब्रिटिश शासन के दौरान, भारत में देसी रियासतें हुआ करती थीं. कुछ रियासतें ब्रिटिश हुकूमत की समर्थक थीं तो कुछ ने इनके खिलाफ विद्रोह किया. ब्रिटिश फौज और विद्रोह करने वाली रियासतों के बीच कई लड़ाइयां हुईं. युद्ध में जो राजा अथवा विद्रोही हार जाता, अंग्रेज अक्सर उनसे उनकी ज़मीन छीन लेते थे.

1947 में जब भारत आजाद हुआ तो ये अंग्रेजों ने ये जमीनें खाली कर दीं, लेकिन उस वक्त राजाओं और राजघरानों के पास इन जमीनों पर अपना पूर्व स्वामित्व साबित करने के लिए उचित दस्तावेज़ों थे ही नहीं. ऐसे में सरकार ने इन ज़मीनों को ‘नजूल भूमि’ (Nazool Land) के रूप में चिह्नित किया. चूंकि अंग्रेजों के खिलाफ पूरे देश में विद्रोह हुआ और विद्रोहियों की जमीनें कब्जे में ली गईं, इसीलिये पूरे देश में नजूल की जमीनें पाई जाती हैं.

कौन होता है नजूल भूमि का मालिक?

नजूल की जमीन (Nazool Land) का स्वामित्व संबंधित राज्य सरकारों के पास होता है, लेकिन अक्सर इसे सीधे राज्य संपत्ति के रूप में प्रशासित नहीं किया जाता है. राज्य सरकार, आम तौर पर ऐसी भूमि को किसी को एक निश्चित अवधि के लिए पट्टे पर आवंटित करता है. लीज की अवधि 15 से 99 साल के बीच हो सकती है.

यदि पट्टे की अवधि समाप्त हो रही है, तो कोई व्यक्ति स्थानीय प्रशासन के राजस्व विभाग को एक लिखित आवेदन जमा करके पट्टे को नवीनीकृत करने का अनुरोध कर सकता है. एक बात और महत्वपूर्ण है. सरकार नजूल भूमि को वापस लेने या पट्टे को नवीनीकृत करने या इसे रद्द करने के लिए स्वतंत्र है.भारत के लगभग सभी प्रमुख शहरों में, तमाम संस्थाओं को नजूल भूमि आवंटित की गई है.

क्या कहता है कानून?

अलग-अलग राज्यों में नजूल भूमि से संबंधित अलग नियम और कानून हैं. हालांकि, नजूल भूमि (स्थानांतरण) नियम, 1956 वह कानून है जिसका उपयोग ज्यादातर नज़ूल भूमि निर्णय के लिए किया जाता है, सरकार आम तौर पर नज़ूल भूमि का उपयोग सार्वजनिक उद्देश्यों जैसे स्कूलों, अस्पतालों, ग्राम पंचायत भवनों आदि के निर्माण के लिए करती है. भारत के कई शहरों में नज़ूल भूमि के रूप में चिह्नित भूमि के बड़े हिस्से को आम तौर पर पट्टे पर हाउसिंग सोसाइटियों के लिए उपयोग किया जाता है.

क्या हलद्वानी की जमीन नजूल थी?

हलद्वानी जिला प्रशासन के अनुसार, जिस जमीन पर मस्जिद और मदरसा बना है, वह नगर निगम (नगर परिषद) में नजूल भूमि के रूप में पंजीकृत है. प्रशासन का कहना है कि पिछले 15-20 दिनों से सड़कों को जाम से मुक्त कराने के लिए अवैध संपत्तियों को तोड़ने का अभियान चल रहा है. इसी क्रम में मस्जिद और मदरसा संचालकों को 30 जनवरी को नोटिस देकर भूमि स्वामित्व के दस्तावेज उपलब्ध कराने अथवा तीन दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाने को कहा था.

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