नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपने 8 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है. बीजेपी ने अपने किसी भी मौजूदा राज्यसभा सांसद को दोबारा टिकट न देकर नए चेहरों पर दांव लगाया है. पार्टी ने इन उम्मीदवारों के जरिए जातीय समीकरण साधने के साथ-साथ क्षेत्रीय संतुलन बनाने की बड़ी रणनीति बनाई है. बीजेपी ने किसी भारी-भरकम या बाहरी चेहरे के बजाय संगठन से जुड़े निष्ठावान नेताओं को ही प्राथमिकता दी है.
बीजेपी ने योगी सरकार में मंत्री धर्मपाल सिंह को प्रत्याशी बनाया है, जो आंवला से आते हैं और लोध समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं. वहीं झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार को भी राज्यसभा का टिकट मिला है. इसके अलावा दलित चेहरे के रूप में प्रियंका सिंह रावत और विद्या सागर सोनकर को चुनावी मैदान में उतारा गया है.
राज्यसभा के लिए बीजेपी द्वारा घोषित सभी 8 उम्मीदवारों की विस्तृत प्रोफाइल नीचे दी गई है:
धर्मपाल सिंह: योगी सरकार में मंत्री और लोध चेहरा
धर्मपाल सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में पशुपालन एवं डेयरी विकास कैबिनेट मंत्री हैं और बरेली की आंवला सीट से विधायक हैं. वे पांच बार से विधानसभा के सदस्य हैं और ओबीसी वर्ग के लोध समुदाय से आते हैं, जो बीजेपी का परंपरागत वोटर माना जाता है. वे सूबे में सिंचाई और श्रम जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. पार्टी संगठन में उनकी छवि एक समर्पित और अनुभवी नेता की रही है.
बीजेपी ने बीएल वर्मा को दोबारा मौका न देकर धर्मपाल सिंह को उम्मीदवार बनाया है. रुहेलखंड बेल्ट में लोध वोटर्स को साधे रखने के मकसद से पार्टी ने उन्हें उच्च सदन भेजने का फैसला किया है. बीजेपी ने उनकी लंबी सियासी पारी को देखते हुए केंद्र की राजनीति में एक्टिव करने का फैसला किया है.
प्रियंका सिंह रावत: पासी और प्रमुख महिला चेहरा
प्रियंका सिंह रावत उत्तर प्रदेश की प्रमुख महिला नेता हैं और बाराबंकी लोकसभा सीट से सांसद रह चुकी हैं. अपने संसदीय कार्यकाल के दौरान उन्होंने क्षेत्र के विकास और जनसमस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाई. वे संगठन में भी लगातार सक्रिय रही हैं और वर्तमान में पंकज चौधरी की टीम में प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रही हैं.
प्रियंका रावत पासी समुदाय से आती हैं. अवध बेल्ट में पासी मतदाताओं को पार्टी से जोड़े रखने के लिए बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा भेजा है. 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अपने सामाजिक और महिला वोट बैंक को मजबूत करने के लिए पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है.
विद्या सागर सोनकर: निष्ठावान दलित चेहरे पर दांव
विद्या सागर सोनकर उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) के सदस्य हैं और जौनपुर इलाके से आते हैं. वे बीजेपी में प्रदेश महामंत्री और अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण सांगठनिक पदों पर रह चुके हैं. पार्टी के भीतर वे एक समर्पित गैर-जाटव दलित चेहरे के रूप में पहचाने जाते हैं.
विद्या सागर सोनकर खटिक समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जो बीजेपी का कैडर वोटर है. पूर्वांचल के दलित वोट बैंक में पकड़ मजबूत करने और संगठन के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए पार्टी ने उन्हें प्रमोट कर राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया है.
राम प्रताप सिंह: ठाकुर समुदाय को सियासी संदेश
राम प्रताप सिंह चौहान उत्तर प्रदेश के आगरा जिले की एत्मादपुर सीट से पूर्व विधायक हैं और वर्तमान में प्रदेश महामंत्री के रूप में सांगठनिक जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वे यूपी बीजेपी संगठन में लंबे समय से विभिन्न पदों पर कार्य कर चुके हैं और पश्चिमी यूपी में पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं.
राम प्रताप सिंह ठाकुर समुदाय से आते हैं. आगरा और आसपास के इलाके में यूजीसी समेत अन्य मुद्दों को लेकर ठाकुर समाज में दिख रही नाराजगी को दूर करने के लिए बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला किया है.
श्रुति गंगवार: संतोष गंगवार की बेटी और मजबूत कुर्मी चेहरा
श्रुति गंगवार उत्तर प्रदेश बीजेपी की उभरती हुई महिला नेता और प्रदेश पदाधिकारी हैं. वे पूर्व केंद्रीय मंत्री व झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी हैं. वे बरेली और रुहेलखंड क्षेत्र में बीजेपी का एक सशक्त महिला और कुर्मी (OBC) चेहरा मानी जाती हैं.
श्रुति गंगवार वर्तमान में अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक की चेयरपर्सन हैं और बरेली के बहेड़ी विधानसभा क्षेत्र में सामाजिक-राजनीतिक रूप से काफी सक्रिय हैं. संगठन में महिला सशक्तीकरण और पार्टी जनाधार को विस्तार देने में उनकी अहम भूमिका रही है. रुहेलखंड के कुर्मी मतदाताओं के बीच उनका अच्छा प्रभाव है.
प्रकाश पाल: अति-पिछड़ा चेहरा और संगठन से नेता
प्रकाश पाल उत्तर प्रदेश बीजेपी के समर्पित और अनुभवी सांगठनिक नेता हैं. वे पार्टी के अति-पिछड़े (OBC) चेहरे के रूप में जाने जाते हैं और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष संभाल चुके हैं. ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है.उन्होंने लंबे समय तक संगठन में कार्य करते हुए बूथ स्तर तक अपनी मजबूत पकड़ बनाई है.
RSS और एबीवीपी (ABVP) पृष्ठभूमि से आने वाले प्रकाश पाल तीन दशकों से अधिक समय से संगठन सेवा में सक्रिय हैं. वे यूपी बीजेपी में प्रदेश महामंत्री, प्रदेश उपाध्यक्ष और कई जिलों के संगठन मंत्री रह चुके हैं. कानपुर-बुंदेलखंड के साथ-साथ पूरे प्रदेश में पिछड़े वर्गों को बीजेपी के पाले में लाने के लिए उन्हें प्रत्याशी बनाया गया है.
गोपी कृष्ण पांडेय: संघ पृष्ठभूमि से आने वाला ब्राह्मण चेहरा
गोपी कृष्ण पांडेय उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ बीजेपी नेता हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं. वे यूपी में पार्टी के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में से एक हैं. एबीवीपी से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले गोपी कृष्ण पांडेय ने संगठन में लंबे समय तक विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं.
वे पार्टी के प्रदेश मंत्री रह चुके हैं. संघ परिवार से जुड़ाव के कारण उनकी पहचान गुटबाजी से दूर रहने वाले और रणनीतिक रूप से कुशल नेता की रही है. वे मूल रूप से बलिया जिले के रसड़ा से ताल्लुक रखते हैं. पूर्वांचल में ब्राह्मण समाज के साथ-साथ बीजेपी के वैचारिक वोट बैंक को साधे रखने के उद्देश्य से पार्टी ने उन्हें संसद भेजने का फैसला किया है.
राधाकांत ओझा: कानूनी समुदाय से जुड़ा प्रबुद्ध चेहरा
राधाकांत ओझा प्रयागराज के जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं. कानूनी और राजनीतिक गलियारों में उनका बड़ा नाम है और वे लंबे समय से सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय हैं.
बीजेपी ने कानूनी समुदाय और राज्य के प्रबुद्ध (ब्राह्मण) वर्ग के बीच अपनी पैठ और मजबूत करने के उद्देश्य से उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है. वकीलों के अधिकारों और न्यायिक क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए पार्टी ने उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी दी है.






