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Home राजनीति

बीएमसी चुनाव: ठाकरे बंधुओं को मुंबई की जनता ने क्यों कह दिया ‘टाटा’?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
January 16, 2026
in राजनीति, राज्य
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thackeray brothers
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नई दिल्ली। बीएमसी चुनाव 2026 में महायुति की जीत महज एक चुनावी कामयाबी नहीं, बल्कि मुंबई की सियासत में यह बहुत बड़ा शिफ्ट माना जा रहा है। दशकों से जिस मुंबई की राजनीति का केंद्र ‘मराठी अस्मिता’ और इमोशनल अपीलें रहीं, अब फोकस उसके बजाय डेवलपमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो गया है। इस BMC इलेक्शन ने साफ कर दिया है कि मुंबई के वोटर अब पहचान की सियासत से आगे निकल चुके हैं। BMC में बीजेपी, पहली बार उद्धव की पार्टी के बिना बहुमत पा गई है। इस आर्टिकल में समझिए बीजेपी की इस बड़ी जीत के बड़े कारण क्या हैं?

विकास के नैरेटिव पर जनता का भरोसा

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BJP की लीडरशिप वाली महायुति ने BMC चुनाव में साफ और आक्रामक तरीके से विकास के एजेंडे को जनता के सामने रखा। मेट्रो, सड़कें, क्लस्टर रीडेवलपमेंट, झुग्गी के पुनर्विकास और जरूरी सेवाओं को फोकस में रखकर यह मैसेज दिया गया कि बीएमसी में मुंबई की जनता अब सिर्फ सियासत नहीं, बल्कि प्रोफेशनल अर्बन एडमिनिस्ट्रेशन चाहती है। यह मुद्दा शहर के मिडिल क्लास और यंग वोटर्स में गहराई तक पैठ बना पाया।

ठाकरे बंधुओं की एकता नहीं आई काम

उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक साथ आए और अपनी-अपनी पार्टियों का गठबंधन करके BMC चुनाव में उतरे। लेकिन ये भी काम नहीं आया। ठाकरे बंधुओं की एकता धरी की धरी रह गई और बीजेपी के महायुति गठबंधन ने उन्हें बीएमसी की सत्ता से बाहर कर दिया। ठाकरे बंधु अपने साथ आने को चुनावी गेमचेंजर मानकर चल रहे थे लेकिन यह सियासी प्रयोग जमीन पर असर दिखा नहीं पाया। ठाकरे बंधुओं का गठबंधन, मतदाताओं को यह विश्वास नहीं दिला पाया कि वह BMC को अच्छी तरह से चलाने में सफल हो सकते हैं। BMC चुनाव में उनकी इमोशनल अपील भी फीकी पड़ गई।

मराठी वोट का हुआ बंटवारा

BMC चुनाव में मराठी वोट एकजुट नहीं हो पाया। वह शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस और बीजेपी-शिवसेना शिंदे गुट की महायुति के बीच बंट गया। इसकी वजह से BJP को बड़ा फायदा हुआ। महायुति ने इसी विभाजन का लाभ उठाया और गैर-परंपरागत वोटरों के साथ मराठी वोटर्स के बड़े हिस्से को भी अपने पक्ष में कर लिया।

बीजेपी का माइक्रो-मैनेजमेंट आया काम

बीजेपी ने ठाकरे बंधुओं की तरह इमोशनल अपील की जगह बूथ लेवल प्लानिंग, डेटा बेस्ड कैंपेन और लोकल मुद्दों पर फोकस किया। इन सभी ने महायुति को ठाकरे बंधुओं के गठबंधन पर बढ़त दिला दी। BMC चुनाव में BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन महायुति के लिए उनकी पार्टियों की संगठनात्मक ताकत भी बहुत काम आई।

विपक्ष के बिखराव का BJP को फायदा

BMC चुनाव में विपक्ष में स्पष्ट नेतृत्व और एक साझा स्ट्रैटेजी का अभाव नजर आया। इसमें ठाकरे बंधु अलग और कांग्रेस अलग चुनाव लड़ी। उनके साथ शरद पवार का गुट भी नहीं था। याद करिए जब लोकसभा चुनाव 2024 में उद्धव गुट, कांग्रेस और शरद पवार गुट एक साथ मिलकर चुनाव लड़े थे तो उन्होंने पूरे महाराष्ट्र में अच्छा प्रदर्शन किया था। लेकिन BMC और महाराष्ट्र की बाकी महानगरपालिकाओं के चुनाव में ऐसा होता नहीं दिखा।

बीएमसी चुनाव 2026 यह इशारा करता है कि मुंबई की सियासत अब पहचान नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस की तरफ बढ़ चुकी है। वोटर्स ने इमोशनल अपील के बजाय डेवलपमेंट पर फोकस किया। यही कारण है कि अब तमाम पॉलिटिकल पंडित मानने लगे हैं कि BMC की सत्ता निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है।

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