पीएम मोदी के अमेरिका दौरे से पहले कई विवादास्पद मुद्दे जोर पकड़ने वाले हैं। बीबीसी डॉक्यूमेंट्री का ‘जिन्न’ एक बार फिर से निकल आया है। पीएम की 21 जून से शुरू हो रही अमेरिका की राजकीय यात्रा से पहले दो मानवाधिकार समूह वाशिंगटन में बीबीसी की विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ की स्क्रीनिंग का फैसला किया है।
मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि भारत में इस डॉक्यमेंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। ऐसे में इसके कारण का अध्ययन आवश्यक है। इसको लेकर ट्वीटर पर वार छिड़ गया है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल नाम के दो मानवाधिकार संगठन 20 जून से डॉक्यूमेंट्री ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ की स्क्रीनिंग करने जा रहे हैं। इसके लिए पॉलिशी मेकर्स और जर्नलिस्ट और विश्लेषकों को आमंत्रित किया गया है।
इस हफ्ते सोमवार (13 जून) को दोनों मानवाधिकार संगठनों की ओर से संयुक्त रूप से ये घोषणा की गई। बता दें कि पीएम मोदी पर बनी डॉक्यूमेंट्री के पहले पॉर्ट में गुजरात दंगों का जिक्र किया गया है। डॉक्यूमेंट्री के कंटेंट्स दंगों में मौजूदा सरकार के मुखिया नरेंद्र मोदी नेतृत्व और कार्यशैली पर बड़ा संदेह खड़े करते हैं।
केंद्र सरकार ने इस डॉक्यूमेंट्री को एक प्रोपगंडा बताया और देश में इस के प्रसारण और बिक्री पर रोक लगा दी। केंद्र ने डॉक्यूमेंट्री के वीडियो लिंक को यूट्यूब और ट्विटर से हटाने का आदेश दिया।
वहीं प्रतिबंध के बावजूद, छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने जनता के देखने के लिए वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया। वहीं धिकारियों ने इस साल फरवरी में दिल्ली और मुंबई में बीबीसी के कार्यालयों का निरीक्षण किया। प्रवर्तन निदेशालय ने विदेशी मुद्रा नियमों के उल्लंघन के आरोपों पर अप्रैल में यूके ब्रॉडकास्टर की जांच शुरू की। सरकार ने इस कार्रवाई को बदले के भावना से लिया गया एक्शन मानने से इनकार किया। वहीं बीबीसी ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ के लिए गंभीरता से शोध किया गया। इसमें किसी भी प्रकार कोई एजेंडा छिपा नहीं है।







