लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सीटें हैं। यही वजह है कि यूपी की चुनावी लड़ाई काफी अहम हो जाती है। पिछले दो लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने यूपी में एकतरफा जीत हासिल कर देश की सत्ता पर काबिज हो चुकी है। प्रदेश की आठ सीटें तो ऐसी हैं, जिन पर लोकसभा चुनाव में भाजपा हैट्रिक लगा चुकी है। वहीं, 48 सीटें ऐसी है, जहां पार्टी के सामने हैट्रिक लगाने की चुनौती है। यूपी में एक तरफा बढ़त हासिल करने के लिए इस चुनौती को पार करना ही होगा। अब देखना है कि I.N.D.I.A. और एनडीए के बदले समीकरणों के साथ भाजपा इस चुनौती को किस तरह पार कर पाती है।
लंबे समय से भाजपा के गढ़
यूपी में यूं तो कई ऐसी सीटें हैं, जहां लंबे समय से भाजपा का कब्जा रहा है। लेकिन, 2004 और 2009 में उनमें भी कई सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। लखनऊ लोकसभा ऐसी सीट है, जहां 1991 से भाजपा लगातार आठ बार जीत दर्ज कर चुकी है। बरेली में 1989 से लगातार जीत दर्ज कर रही थी। 2009 में एक बार यह सीट कांग्रेस ने जीती। यहां 2014 से फिर भाजपा काबिज है। इसी तरह वाराणसी में 1999 से अब तक चार जीत दर्ज करने वाली भाजपा को 2004 में हर का सामना करना पड़ा था।
गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद लोकसभा सीटें 2009 में नई बनी। गाजियाबाद पहले हापुड़ सीट के नाम से जानी जाती थी। इस सीट पर 1991 के बाद से केवल 2004 में एक बार बीजेपी हारी है। गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट को पहले खुर्जा नाम से जाना जाता था। यहां 1998 से लगातार भाजपा जीत रही है।
लोकसभा चुनाव के बदले समीकरण
लोकसभा चुनाव में इस बार समीकरण कुछ बदले हुए हैं। मुख्य लड़ाई I.N.D.I.A., खास तौर पर कांग्रेस और सपा गठजोर से है। राष्ट्रीय लोक दल इस बार भाजपा के साथ है। ऐसे में जिन 49 सीटों पर भाजपा लगातार दो बार जीत चुकी है, उनमें से एक बागपत इस बार रालोद के खाते में गई है। इस तरह 48 पर इस बार हैट्रिक की चुनौती है।
2014 से लंबी छलांग
भाजपा का प्रदर्शन 2004 और 2009 में बहुत अच्छा नहीं रहा। बीजेपी ने 2004 में 11 और 2009 में 10 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी थी। उस समय यूपी के सियासी मैदान में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का प्रदर्शन काफी अच्छा था। उसके बाद 2014 से भाजपा ने एकतरफा जीत दर्ज की है। 2014 में भाजपा ने 71 सीटें जीती और सहयोगी पार्टी अपना दल एस ने दो सीटों पर जीत हासिल की। उसके बाद 2019 में सपा और बसपा मिलकर चुनाव लड़े।
लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा की कुछ सीटें कम हुईं। लेकिन, प्रदर्शन तब भी एकतरफा ही रहा। भाजपा 62 और अपना दल एस दो सीटों पर जीती। इसी प्रदर्शन की बदौलत बीजेपी ने 49 सीटों पर लगातार दूसरी बार और 8 सीटों पर लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की थी।







