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Home राष्ट्रीय

भारत को रूस को लेकर मजबूरी में उठाना पड़ेगा ये कदम?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
November 19, 2022
in राष्ट्रीय, विश्व
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नई दिल्ली : यूरोपीय यूनियन और जी-7 समूह की ओर से घोषित प्राइस कैप की तारीख नजदीक आते ही भारतीय तेल कंपनियां रूस से तेल खरीदने में सावधानी बरतनी शुरू कर दी है. जी-7 और यूरोपीय यूनियन समूह ने घोषणा की थी कि 5 दिसंबर से रूस के तेल की एक कीमत तय कर दी जाएगी. रूस का तेल इस प्राइस कैप के भीतर ही खरीदा जा सकेगा.

सूत्रों के अनुसार, जी-7 प्राइस कैप मैकेनिज्म पर सरकार का रुख स्पष्ट नहीं होने के कारण भारतीय तेल कंपनियां सतर्क हैं. चीन की तेल कंपनियों ने पहले से ही रूस से तेल खरीद में कमी कर दी है. पिछले कुछ समय से भारतीय कंपनियां रूस से बड़ी मात्रा में सस्ता तेल खरीद रही थीं लेकिन अब उनके सामने दुविधा खड़ी हो गई है.

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रूस के राजस्व को कम करना मकसद

जी-7 के सदस्य देश 2 सितंबर को रूस पर प्राइस कैप लगाने के लिए सहमत हुए थे. जबकि यूरोपीय यूनियन प्राइस कैप के प्रस्ताव पर अक्टूबर महीने के पहले सप्ताह में सहमत हुए थे. प्राइस कैप का मुख्य मकसद रूस के राजस्व को कम करना है. यूरोपीय यूनियन और जी-7 के इस कदम पर रूस ने चेतावनी दी है कि इस प्राइस कैप में शामिल होने वाले किसी भी देश को वह तेल आपूर्ति नहीं करेगा. कहा जा रहा है कि 5 दिसंबर से प्राइस कैप के लागू हो जाने के बाद रूस को नया तेल खरीददार खोजना पड़ सकता है.

भारतीय कंपनियों ने भी ऑर्डर देना किया बंद

रूस यूक्रेन युद्ध के कारण पश्चिमी देशों की ओर से रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद एशिया की तीन बड़ी तेल कंपनियां रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीद रही हैं. इन सभी तेल कंपनियों ने भी रूस से तेल खरीद में कमी कर दी है. दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफायनरी कंपनी रिलाइंस इंडस्ट्रीज ने भी 5 दिसंबर के बाद के लिए एक भी रूसी कार्गो का ऑर्डर नहीं दिया है. भारत पेट्रोलियम ने भी 5 दिसंबर के बाद एक भी रूसी कार्गो का ऑर्डर नहीं दिया है.

देश की टॉप तेल रिफाइन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने भी 5 दिसंबर के बाद की सभी तेल कार्गो शिपमेंट का ऑर्डर कई नियम और शर्तों के साथ दिया है.

विदेशी बैंकों की कार्रवाई का डर
सूत्रों के अनुसार, पश्चिमी देशों के वित्तीय प्रणाली और रिफाइन उत्पादों की बिक्री को देखते हुए रिलायंस विदेशी बैंकों की कार्रवाई की खतरे को देखते हुए सतर्क है. तेल कंपनियों का कहना है कि प्राइस मैकेनिज्म में कई प्रकार की दुविधाएं हैं. हमें पता नहीं है कि पेमेंट मैकेनिज्म और प्राइस कैप लेवल क्या होगा.

रूस और रोजनेफ्ट (Rosneft) की 49 फीसदी स्वामित्व वाली कंपनी नायरा ने अभी भी रूस से तेल खरीदना जारी रखा है. इसका परिणाम यह हुआ है कि विदेशी बैंकों ने नायरा से लेनदेन पर रोक लगा दी है. नायरा सिर्फ भारतीय बैंकों के साथ लेनदेन कर पा रही है.

भारतीय तेल निगम ने दिया विकल्प

सूत्रों के अनुसार, भारतीय तेल निगम (आईओसी) तेल खरीद को लेकर सतर्क रहना चाहता है. आईओसी का कहना है कि अगर भारतीय रिफाइनरी कंपनियों को रूस से तेल खरीदने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है तो वे अपने तेल कान्ट्रैक्ट को पूरा करने के लिए मध्य पूर्व देशों के तेल आपूर्तिकर्ताओं के साथ भी नियम और शर्तों के साथ तेल खरीद को बढ़ा सकते हैं.

भारत के पास क्या है विकल्प
प्राइस कैप से जहां भारतीय रिफाइनरी कंपनियां सतर्क हैं, वहीं, भारत और रूस ने भी तेल के व्यापार के लिए एक विकल्प खोज रखा है. दोनों देश पश्चिमी बीमा, वित्त और समुद्री सेवाओं के द्वारा व्यापार करेंगे. चूंकि, भारत रूसी बीमा को स्वीकार करता है. इसलिए भारतीय कंपनियां रूस से बीमा, कार्गो, पी एंड आई और हुल (hull) सप्लाई चेन के तहत कच्चा तेल खरीदती हैं.

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