नई दिल्ली। हाल ही में दुनिया की सबसे बड़ा कोरल यानी मूंगा दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत महासागर में पाया गया है. नेशनल जियोग्राफ़िक सोसाइटी की प्रिस्टीन सीज़ टीम के ने यह कोरल खोजा है, जो ब्लू व्हेल से भी बड़ा है और इसे अंतरिक्ष से भी देखा जा सकता है. इतना बड़ा होने के बावजूद हैरानी इस बात की है कि यह अब तक छिपा रहा. यह कोरल 112×105 फ़ीट का है और 42 फ़ीट की गहराई पर मौजूद है, जिसकी ऊंचाई 16 फीट बताई जा रही है. अनुमान है कि यह लगभग 300 साल या फिर इससे भी ज्यादा पुरानी है.
अभियान की प्रमुख वैज्ञानिक मौली टिमर्स का कहना है कि उन्हें यह उस रात मिली जब टीम दूसरे सेक्शन में जाने वाली थी. एक वीडियोग्राफर यह समझने की कोशिश कर रहा था कि जलवायु परिवर्तन ने प्रशांत महासागर को कैसे प्रभावित किया है और इसी दौरान उसे यह मेगा कोरल मिला. टिमर्स ने कहा कि यह जीव एक प्रकार का कठोर कोरल है जिसे पावोना क्लैवस या शोल्डर ब्लेड कोरल कहा जाता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि इसमें स्तंभ हैं जो ‘कंधों की तरह दिखते हैं.’ यह मुख्य रूप से भूरे रंग का है, जिसमें पीले, लाल, गुलाबी और नीले रंग भी दिखाई दे रहे हैं.
कैसा दिखता है कोरल या मूंगा?
फोटोग्राफर मनु सैन फेलिक्स ने कहा कि कोरल को देखना ‘पानी के नीचे गिरजाघर’ देखने जैसा अनुभव होता है. फोटोग्राफर आगे कहा,’यह बहुत भावनात्मक है. मैंने उस चीज़ के लिए बहुत सम्मान महसूस किया जो एक ही स्थान पर रही और सैकड़ों वर्षों तक जीवित रही.’ शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने जो पाया है वह कोरल कॉलोनी है जो लगभग एक अरब छोटे जीवों से बनी है जो एक जीव की तरह एक साथ काम करते हैं. उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों ने इसे एक बड़ी चट्टान समझ लिया होगा.
कोरल गर्म होते महासागरों और जलवायु परिवर्तन के कारण खतरे में हैं. वे जेलीफ़िश और समुद्री एनीमोन से संबंधित जानवर हैं. हज़ारों कोरल पॉलीप्स एक कॉलोनी बनाने के लिए एक साथ आते हैं और येकॉलोनियां एक रीफ़ बनाती हैं. सबसे बड़ा कोरल कुछ कोरल रीफ़ की तुलना में बहुत गहरे पानी में रहता है और ऐसा लगता है कि इसने समुद्र की सतह पर उच्च तापमान के खतरों को रोका है.
कोरल के बारे में कुछ जरूरी जानकारी:
कोरल या मूंगा एक बेहद खूबसूरत और महत्वपूर्ण समुद्री जीव है. ये लाखों-करोड़ों की तादाद में एक ग्रुप में रहते हैं और अपने आसपास एक बहुत ही सख्त शंख जैसी संरचना बना लेते हैं. इसी संरचना को हम कोरल कहते हैं.
सूक्ष्म जीव: कोरल बहुत छोटे-छोटे जीवों से मिलकर बने होते हैं जिन्हें पॉलीप्स कहते हैं.
कैल्शियम कार्बोनेट: ये पॉलीप्स अपने शरीर से कैल्शियम कार्बोनेट नामक एक पदार्थ निकालते हैं.
सख्त ढांचा: समय के साथ ये कैल्शियम कार्बोनेट जमकर एक सख्त ढांचा बना लेता है.
नई पीढ़ी: जब एक पॉलीप मर जाता है तो उसके ऊपर एक नया पॉलीप उग आता है और इस तरह से कोरल की चट्टानें बढ़ती जाती हैं.
रंगीन: कोरल कई तरह के रंगों में पाए जाते हैं जैसे लाल, गुलाबी, पीला, हरा आदि.
आकार: कोरल कई तरह के आकारों में पाए जाते हैं जैसे शाखाओं जैसी, पंख जैसी या गोलाकार आदि.
समुद्री जीवन: कोरल कई तरह के समुद्री जीवों के लिए घर का काम करते हैं जैसे मछली, झींगा, समुद्री घोड़ा.







