नई दिल्ली। आप भारतीय रेलवे से अक्सर रात में यात्रा करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है. अगर आप रात में सफर करते समय मोबाइल या पॉवर बैंक चार्जिंग पर लगाकर चैन की नींद सो जाते हैं, तो अब सावधान हो जाइये. इसको लेकर भारतीय रेलवे ने एक नया नियम लागू किया है.
रेलवे बोर्ड ने ट्रेनों में रात 11 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक मोबाइल चार्जिंग पर रोक लगा दी है. बोर्ड ने ट्रेनों में इन समय के दौरान सभी मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट को बंद रखने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ-साथ इस नियम को सख्ती से लागू करने को भी कहा है. ऐसे में रेल यात्रियों को रात के समय इन 6 घंटों में ट्रेन कोच में लगे चार्जिंग प्वाइंट को प्रयोग करने में असुविधा हो सकती है. रेलवे बोर्ड ने यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेन के डिब्बों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से यह फैसला किया है.
बोर्ड ने ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए अधिकारियों और पर्यवेक्षकों से औचक निरीक्षण करने को भी कहा है. यह फैसला दक्षिण पूर्व रेलवे सहित कई ऐसी घटनाओं के बाद लिया गया है, जिनमें से एक मामले में चार्ज होते समय एक यात्री का पावर बैंक फट गया और उससे धुआं निकलने लगा. स्टाफ को दिए गए निर्देशों के अनुसार, रेलवे यह सुनिश्चित करेगा कि ट्रेन में मौजूद कर्मचारी रात के समय चार्जिंग पॉइंट बंद रखने के नियम का सख्ती से पालन करें, और इसमें कोई छूट नहीं दी जाएगी. बोर्ड ने कर्मचारियों की काउंसलिंग और ट्रेनिंग कराने के लिए भी कहा है.
रेलवे का आदेश
ये निर्देश सुरक्षा के संबंध में रेलवे बोर्ड के उस पत्र का हवाला देते हैं, जिसमें कहा गया था कि तय छह घंटे की अवधि के दौरान कोचों में मौजूद मोबाइल चार्जिंग पॉइंट बंद रखे जाएं. यह यात्री ट्रेनों में सुरक्षा से जुड़ी एक लगातार बनी रहने वाली चिंता की ओर इशारा करता है, रात भर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस चार्ज करने से जुड़े जोखिम, खासकर तब जब यात्री सो रहे हों और उन्हें ओवरहीटिंग, धुआं या बिजली/बैटरी से जुड़ी किसी खराबी के संकेतों का तुरंत पता न चल सके.
पॉवर बैंक में विस्फोट से चिंताएं पैदा हुईं
रेलवे बोर्ड के अनुसार, SER (दक्षिण पूर्व रेलवे) में यह घटना तब हुई जब ट्रेन के कर्मचारियों ने तय समय के दौरान मोबाइल चार्जिंग पॉइंट बंद नहीं किए. इस दौरान चार्ज हो रहा एक यात्री का पॉवर बैंक फट गया, जिससे धुआं निकलने लगा. मुंबई-हावड़ा मेल में भी ऐसी ही एक घटना हुई, जिसके बाद ट्रेन को बांदामुंडा स्टेशन के पास कुछ मिनटों के लिए रोकना पड़ा.
पॉवर बैंक की बैटरी से जुड़ी समस्या
पॉवर बैंक में रिचार्जेबल लिथियम-आयन या लिथियम-पॉलिमर बैटरी होती हैं. यदि कोई बैटरी क्षतिग्रस्त या खराब हो जाए, बहुत अधिक गर्म हो जाए, या उसमें इंटरनल शॉर्ट सर्किट हो जाए, तो ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जिसे ‘थर्मल रनअवे’ कहा जाता है. इससे तापमान तेजी से बढ़ सकता है, धुआं निकल सकता है, आग लग सकती है और कुछ मामलों में विस्फोट भी हो सकता है. चार्ज होते समय अगर पॉवर बैंक को तकिए के नीचे, बिस्तर के अंदर या किसी ठसाठस भरे बैग में रख दिया जाए, तो वह गर्म हो सकता है. ऐसी स्थितियों में गर्मी बाहर नहीं निकल पाती, जिससे यात्रियों या साथ सफर कर रहे लोगों के लिए असामान्य तापमान या किसी तरह की गंध का पता लगाना मुश्किल हो जाता है.
यात्रियों की सुरक्षा
ट्रेन के डिब्बे में चार्जिंग से जुड़ी कोई घटना काफी चिंताजनक हो सकती है, क्योंकि यात्री एक सीमित जगह में बैठे या सो रहे होते हैं, और अक्सर अपने सामान व बिस्तर के काफी करीब होते हैं. डिब्बे में धुआं फैल सकता है, और अगर कोई डिवाइस बिना निगरानी के छोड़ दी जाए, तो आग लगने का पता चलने में देरी हो सकती है. अगर डिब्बे के अंदर किसी पावर बैंक से धुआं निकलने लगे या उसमें आग लग जाए, तो यात्रियों के बीच भारी अफरा-तफरी मच सकती है. असल में, डिब्बे में सफर कर रहे बुजुर्गों और बच्चों के लिए आग लगने की स्थिति में एक डिब्बे से दूसरे डिब्बे में जाकर खुद को बचाना सबसे मुश्किल होता है.
रात भर डिवाइस चार्ज करना जोखिम भरा क्यों हो सकता है
मोबाइल फोन, पॉवर बैंक, टैबलेट और अन्य पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस यात्रा के दौरान बहुत जरूरी चीजें बन गई हैं. लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्री अक्सर अपनी बर्थ या सीट के पास लगे चार्जिंग सॉकेट का इस्तेमाल करते हैं, ताकि पूरी यात्रा के दौरान उनके डिवाइस चार्ज रहें. लेकिन, बिना देखरेख के लंबे समय तक डिवाइस को चार्ज पर लगा छोड़ने से कोई खराबी होने पर भी उसका पता नहीं चल पाता है. ऐसा नहीं है कि हर डिवाइस ओवरचार्ज हो ही जाएगा. आजकल के फोन और पॉवर बैंक में आमतौर पर चार्जिंग-मैनेजमेंट और प्रोटेक्शन सर्किट लगे होते हैं.
छह घंटे का शटडाउन क्यों मायने रखता है
रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक का अनिवार्य शटडाउन समय उस अवधि को कवर करता है, जब रात भर चलने वाली ट्रेनों में बड़ी संख्या में यात्री सो रहे होते हैं. बैटरी की कोई ऐसी खराबी, जो दिन के समय तुरंत पकड़ में आ सकती है, रात के समय लंबे समय तक बिना पता चले रह सकती है.
जोखिम कम करने के लिए यात्रियों को क्या करना चाहिए
हालांकि निर्धारित शटडाउन का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी रेलवे कर्मचारियों की है, फिर भी यात्री अनुमत घंटों के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को चार्ज करते समय कुछ व्यावहारिक सावधानियां बरत सकते हैं. यात्रियों को असली या उपयुक्त चार्जर और सही-सलामत केबल का ही इस्तेमाल करना चाहिए. उन्हें फूले हुए, क्षतिग्रस्त या असामान्य रूप से गर्म हो रहे फोन और पॉवर बैंक को चार्ज करने से बचना चाहिए. साथ ही, अपने उपकरणों को बिस्तर, तकिए या ऐसी अन्य चीजों से दूर रखना चाहिए, जिनमें गर्मी फंस सकती है.







