Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home धर्म

बद्रीनाथ मंदिर के बारे में 10 ऐसी बातें जो आपने नहीं सुनी होंगी!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
April 23, 2026
in धर्म, राज्य
A A
badrinath dham
26
SHARES
855
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली। बद्रीनाथ धाम के कपाट भक्तों के लिए खुल चुके हैं। मंदिर के कपाट आज यानी 23 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। कपाट खुलने के साथ ही इस वर्ष की चारधाम यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। आपको बता दें कि बद्रीनाथ मंदिर को ‘धरती का वैकुंठ’ भी कहा जाता है। यह मंदिर भगवान विष्णु के रूप ‘बद्री विशाल’ को समर्पित है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने यहां कठोर तपस्या की थी। हिंदू धर्म में बद्रीनाथ को मुक्ति का द्वार माना जाता है। तो चलिए अब जानते हैं बद्रीनाथ मंदिर से जुड़े पौराणिक रहस्यों के बारे में।

बद्रीनाथ धाम की 10 अद्भुत जानकारियां

इन्हें भी पढ़े

राशन कार्ड

उत्तराखंड में अमीर खा रहे थे गरीबों का राशन, जांच में हुआ खुलासा

August 20, 2026
cm Dhami

इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन बनाते हुए विकास को आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता : CM धामी

August 20, 2026
हर्बल आर्ट म्यूज़ियम

हरिद्वार में बना दुनिया का अनोखा हर्बल आर्ट म्यूज़ियम, 65 हजार से ज्यादा दुर्लभ वनस्पति कलाकृतियां

August 19, 2026
पान मसाला

भारत में जब बैन है तो पान मसाला के विज्ञापन कैसे कर लेते हैं स्टार्स?

August 18, 2026
Load More

शंख बजाना है वर्जित-  बद्रीनाथ मंदिर में शंख बजाना पूर्ण रूप से वर्जित माना गया है। मंदिर में पूजा के दौरान शंख नहीं बजाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी लक्ष्मी यहां तपस्या कर रही थीं। उसी समय, भगवान विष्णु ने शंखचूर्ण नाम के एक राक्षस को मारा था, हिन्दू धर्म में जीत होने पर शंख बजाते हैं, पर विष्णु जी लक्ष्मी जी के ध्यान को भंग नहीं करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने शंख नहीं बजाया। यही कारण है कि बद्रीनाथ में शंख नहीं बजाया जाता है।

वनतुलसी की माला- विष्णु जी को तुलसी अति प्रिय है लेकिन बद्रीनाथ मंदिर में नारायण को तुलसी की जगह ‘वनतुलसी’ की माला  चढ़ाया जाता है। यह वनतुलसी केवल इसी ऊंचाई पर उगती है और इसमें एक अलग सुगंध होती है।

नर और नारायण- बद्रीनाथ धाम अलकनंदा नदी के तट पर नर और नारायण नाम के दो पर्वत के बीच स्थित है। यहां नर-नारायण विग्रह की पूजा होती है।

भगवान बद्रीनाथ की मूर्ति- बद्रीनाथ मंदिर में श्रीहरि विष्णु की मूर्ति शालग्रामशिला से बनी हुई, जो चतुर्भुज ध्यानमुद्रा में निवास करते हैं। कहते हैं जो भी भक्त अपनी मुराद लेकर बद्रीनाथ धाम आते हैं वो जरूर पूरा होता है। बद्रीनाथ धाम की यात्रा करने वाले भक्तों पर सदैव भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है।

6 महीने की खुले रहते हैं मंदिर के कपाट-  हर साल बद्रीनाथ  मंदिर के कपाट भक्तों के लिए छह महीने के लिए बंद कर दिए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बद्रीनाथ को सृष्टि का आठवां बैकुंठ कहा जाता है, यहां  विष्णु जी 6 माह जागते हैं और 6 माह निद्रा अवस्था में रहते हैं।

शंकराचार्य द्वारा मूर्ति का पुनरुद्धार-  पौराणिक कथा के अनुसार, शंकराचार्य ने अलकनंदा नदी में शालिग्राम पत्थर से बनी भगवान बद्री नारायण की एक काली पत्थर की प्रतिमा खोजी थी। उन्होंने मूल रूप से इसे तप्त कुंड के गर्म झरनों के पास एक गुफा में स्थापित किया था। सोलहवीं शताब्दी में, गढ़वाल के राजा ने मूर्ति को मंदिर के वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित कर दिया।

तीन चाबियों से खुलता है बद्रीनाथ मंदिर के कपाट- बद्रीनाथ धाम मंदिर के कपाट एक चाबी से नहीं बल्कि तीन-तीन चाबियों से खुलता है और ये तीनों चाबियां अलग-अलग लोगों के पास होती हैं।

मंदिर के रक्षक ‘घंटाकर्ण’- बद्रीनाथ धाम के द्वारपाल भगवान शिव के परम भक्त ‘घंटाकर्ण’ माने जाते हैं। मंदिर खुलने से पहले उनकी अनुमति और पूजा अनिवार्य मानी जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, घंटाकर्ण ने बद्रीनाथ में उसी स्थान पर तपस्या की, जहां भगवान नारायण ने अपनी तपस्या की थी, जिसके बाद श्रीकृष्ण ने घंटाकर्ण की तपस्या से प्रसन्न होकर दर्शन दिए और उसे बद्रीनाथ धाम का क्षेत्रपाल नियुक्त किया।

भविष्य बद्री- मान्यताओं के अनुसार, कलयुग के अंत में जब नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जाएंगे, तब बद्रीनाथ का रास्ता बंद हो जाएगा। इसके बाद भगवान बद्रीनाथ की पूजा ‘भविष्य बद्री’ नामक स्थान पर होगी, जो जोशीमठ के पास स्थित है।

तप्त कुंड- मंदिर के ठीक नीचे ‘तप्त कुंड’ है, जहाँ प्राकृतिक रूप से गर्म पानी निकलता है। बाहर तापमान माइनस में होने के बावजूद इस कुंड का पानी हमेशा गर्म रहता है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है।

 

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
india-Iran

ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद भारत और अरब देशों का रुख… कूटनीति, संयम और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर!

June 22, 2025

राहुल गांधी की ‘पनौती’ टिपप्णी पर भड़की जनता

November 25, 2023
Demonetization

विमुद्रीकरण को मिली न्यायिक वैधता

January 9, 2023
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • पानी पीने के बाद भी प्यास लग रही, ये दिक्कत तो नहीं?
  • WhatsApp पर PAN और Aadhaar शेयर करने वाले सावधान, आपकी एक गलती बढ़ा सकती है परेशानी
  • छात्र आंदोलन के बाद बीजेपी ने बदली रणनीति! ‘एक दिन, एक यूनिवर्सिटी’ दौरे का बना प्लान

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.