चंडीगढ़ । रेलवे से जमीन की सही कीमत न मिलने पर बद्दी के किसानों ने चंडीगढ़-बद्दी रेललाइन का काम रोक दिया है। उन्होंने रेलवे बोर्ड और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सोमवार सुबह ही किसान काम रोकने के लिए पहुंच गए थे। अचानक कार्य बंद होने से ठेकेदार को प्रति घंटा एक लाख रुपये तक नुकसान हो रहा है। उधर, सूचना मिलते ही रेलवे विभाग के एसएससी लखविंद्र नारंग ने मौके का जायजा लिया। उन्होंने चंडीगढ़ मुख्यालय और प्रदेश सरकार को इसकी सूचना भेजी।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उन्हें चार गुना जमीन की कीमत तो दूर, जो अन्य किसानों को रेट मिला है उसके हिसाब से भी नहीं मिल रहा है। स्थानीय निवासी हरबंस ठाकुर ने कहा कि जब तक उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया जाएगा, काम शुरू नहीं होने देंगे। किसान एक साल से फसल नहीं लगा पाए हैं। रातोंरात उनकी जमीन खोद दी गई है।
नंबरदार हरबंस लाल ने बताया कि उनकी उनकी 1352-745 खसरा नंबर की जमीन को रेलवे विभाग ने खोद दिया है, लेकिन अभी मुआवजा नहीं मिला है। मदन गोपाल ने बताया कि दो बीघा जमीन का उन्हें मुआवजा नहीं मिला है। बिट्टू, राज कुमार और विधिचंद की जमीन भी खोद दी, लेकिन अभी मुआवजा नहीं मिला है। हरिपुर संडोली के गुरबचन सिंह की 13 बीघा जमीन का मुआवजा नहीं मिला है।
उधर, रेलवे लाइन बनाने वाले कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर अरविंद ने कहा कि सुबह से उनकी 22 गाड़ियां बना कार्य से खड़ी हैं। उन्हें प्रतिघंटा एक लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। रेलवे बोर्ड ने जमीन अधिग्रहण करने से पहले किसानों को उसकी कीमत देनी चाहिए थी अब उनका कार्य प्रभावित हो रहा है।
दूसरी ओर रेलवे बोर्ड के एसएससी लखविंद्र नारंग सूचना मिलते ही मौके आए और उन्होंने अपने मुख्यालय चंडीगढ़ को सूचित कर दिया है। चंडीगढ़ से हिमाचल के राजस्व विभाग को इसकी सूचना दी गई है और जल्द कार्य शुरू करने की मांग की है।







