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Home राष्ट्रीय

अल्पसंख्यकों के लिए सबसे बेहतरीन देश है भारत

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
February 7, 2023
in राष्ट्रीय, विशेष
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धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिहाज से भारत को दुनिया में सबसे सुरक्षित देश बताया गया है। द ऑस्ट्रेलिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अल्पसंख्यकों पर सेंटर फॉर पॉलिसी एनालिसिस (CPA) की रिसर्च के अनुसार, धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति समावेशी उपायों के लिए भारत को 110 देशों की लिस्ट में नंबर एक पर रखा गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक अल्पसंख्यकों के लिए भारत सबसे बेहतरीन देश हैं। भारत के संविधान में जिस प्रकार अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षिक प्रचार के लिए विशेष प्रविधान है। ऐसे प्रविधान किसी और देश में नहीं है। ग्लोबल माइनारिटी रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।

भारत की अल्पसंख्यक नीति है शानदार
इस शोध के मुताबिक, भारत की अल्पसंख्यक नीति एक ऐसे दृष्टिकोण पर आधारित है जो विविधता बढ़ाने पर जोर देती है। भारत के संविधान में संस्कृति और शिक्षा में धार्मिक अल्पसंख्यकों की उन्नति के लिए विशिष्ट और अनन्य प्रावधान हैं। रिपोर्ट के अनुसार, किसी अन्य संविधान में भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यकों को बढ़ावा देने के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

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ब्रिटेन भारत से काफी पीछे
ग्लोबल माइनॉरिटी रिपोर्ट में दस लाख से अधिक आबादी वाले 110 देशों में भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्वीकृति का उच्चतम स्तर है, इसके बाद दक्षिण कोरिया, जापान, पनामा और अमेरिका का स्थान है। मालदीव, अफगानिस्तान और सोमालिया सूची में सबसे नीचे हैं, यूके और यूएई क्रमशः 54वें और 61वें स्थान पर हैं।

भारत में किसी भई धार्मिक समुदाय पर प्रतिबंध नहीं
इस रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि कैसे अन्य देशों के विपरीत भारत में किसी भी धार्मिक संप्रदाय पर कोई प्रतिबंध नहीं है। इस रिपोर्ट में लिखा गया है कि भारत में सभी धर्मों को लेकर समावेशिता और एक दूसरे संप्रदायों के खिलाफ भेदभाव की कमी के कारण यह संयुक्त राष्ट्र की अल्पसंख्यक नीति के लिए एक आदर्श मॉडल हो सकता है। वह इसका उपयोग अन्य देशों में कर सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि भारत की अल्पसंख्यक नीति अक्सर अपेक्षित परिणाम प्रदान नहीं करती है क्योंकि क्योंकि बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच कई बार संघर्ष की रिपोर्ट दर्ज हुई हैं।

अल्पसंख्यक नीति पर प्रकाश डाला गया
इस रिपोर्ट में व्यापक रूप से भारत की अल्पसंख्यक नीति पर प्रकाश डाला गया है जिसकी समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए और फिर से जांच की जानी चाहिए। इसमें आगे कहा गया है कि, यदि भारत खुद को संघर्षों से मुक्त रखना चाहता है, तो उसे अल्पसंख्यकों के प्रति अपने दृष्टिकोण को तर्कसंगत बनाना होगा। यह शोध उन मुद्दों पर भी विचार करता है जिनसे विभिन्न धार्मिक समूह और संप्रदाय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निपटते हैं।

इस आधार पर हुआ वर्गीकरण
इस शोध में, देशों को इस आधार पर वर्गीकृत किया गया है कि वे अल्पसंख्यक धर्मों और धर्मवादियों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। वे धार्मिक अल्पसंख्यकों में कितने समावेशी हैं, और वे अपने कानूनों और नीतियों के माध्यम से धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव का व्यवहार कैसे करते हैं। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह देखना बेहद हैरत भरा था कि कई राष्ट्र जिन्हें पिछड़ा माना जाता है और जिनकी अर्थव्यवस्था कमजोर है, उनके पास कई विकसित और धनी देशों की तुलना में अधिक प्रगतिशील धार्मिक कानून थे।

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