नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने एकजुट विपक्ष पेश करने की बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कोशिश अब तेज होती दिख रह हैं. हालांकि कांग्रेस ने कर्नाटक में जीत के बाद कई विपक्षी नेताओं को न्योता नहीं देकर उनकी इस कोशिश को झटका दिया है, लेकिन अब भी वे अपने प्लान ऑफ एक्शन पर काम कर रहे हैं. इसके लिए नीतीश कुमार और उनके डिप्टी तेजस्वी यादव एक बार फिर दिल्ली पहुंचे और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से बात की. इस मुलाकात के थोड़ी देर बाद ही इस जोड़ी का ‘सेमीफाइनल प्लान’ सामने आ गया, जिसमें लोकसभा चुनाव से पहले ही भाजपा को पटखनी देकर विपक्ष को एकसाथ खड़ा करना शामिल है. अब इसी प्लान के तहत केजरीवाल मराठा नेता शरद पवार, उद्धव ठाकरे और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात करने जा रहे हैं. साथ ही उन्होंने हर राज्य के मुख्यमंत्री से मुलाकात करने की बात कही है ताकि विपक्षी एकता के लिए उनके और नीतीश के ‘प्लान ऑफ एक्शन’ पर सबका साथ लिया जा सके.
केंद्र के ऑर्डिनेंस को ‘एकता का हथियार’ बनाने की तैयारी
नीतीश कुमार (Nitish Kumar) रविवार को केंद्र सरकार के उस ऑर्डिनेंस के खिलाफ केजरीवाल सरकार को समर्थन देने के लिए दिल्ली आए, जो दिल्ली सरकार के पर कतरते हुए प्रशासनिक ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार एक बार फिर उपराज्यपाल को सौंप देगा. इसके लिए केंद्र सरकार गवर्मेंट ऑफ नेशनल कैपिटल टैरेटिरी ऑफ दिल्ली एक्ट, 1991 में संशोधन का ऑर्डिनेन्स लेकर आ रही है. इसी आर्डिनेंस को केजरीवाल और नीतीश मिलकर ‘विपक्षी एकता का हथियार’ बनाने की जुगत में हैं.
क्या कहा नीतीश-केजरीवाल ने मीटिंग के बाद
केजरीवाल से मुलाकात के समय नीतीश कुमार के साथ बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) भी थे. मीटिंग के दौरान केजरीवाल और नीतीश ने इस मुद्दे पर राज्यसभा में विपक्ष को एकसाथ खड़ा करने के प्लान ऑफ एक्शन पर चर्चा की. मीटिंग के बाद केजरीवाल ने मीडिया से कहा, नीतीश कुमार ने कहा है कि वे केंद्र के इस अन्याय के खिलाफ हमारे साथ खड़े होकर लड़ाई लड़ेंगे. नीतीश कुमार अब पूरे देश में विपक्ष को एकजुट करेंगे. यदि राज्यसभा में इस बिल के खिलाफ पूरा विपक्ष एकजुट होकर आ गया तो इसे खारिज कराया जा सकता है. यह एक सेमीफाइनल की तरह होगा, यदि ऊपरी सदन में बिल पर भाजपा को शिकस्त मिली तो पूरे देश में एक संदेश जाएगा कि भाजपा 2024 में सत्ता में वापस नहीं लौट रही है. नीतीश कुमार ने भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को काम करने का अधिकार दिया है तो आप उसे कैसे वापस ले सकते हैं? यह हैरान करने वाला है. हम आप के साथ हैं और ज्यादा से ज्यादा विपक्षी दलों को एकसाथ जोड़कर इस मुद्दे पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाएंगे.
अब क्या करने वाले हैं केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) दो दिन के दौरे पर मुंबई जा रहे हैं. वे इस दौरे पर 24 मई को शिवसेना (ठाकरे) के प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) से मुलाकात करेंगे. इसके बाद 25 मई को वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) से मिलेंगे. इस मुलाकात में वे इस ऑर्डिनेंस पर राज्यसभा में एकजुट विपक्ष का साथ मांगेंगे. साथ ही लोकसभा चुनाव 2024 में पूरे विपक्ष के एकसाथ होकर भाजपा के खिलाफ लड़ने के लिए भी ठाकरे और पवार का मन टटोलेंगे.
इससे पहले ममता से होगी केजरीवाल की मुलाकात
पवार और ठाकरे से मुलाकात से पहले केजरीवाल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलेंगे. उनसे भी केजरीवाल इस ऑर्डिनेंस के खिलाफ राज्य सभा में विपक्षी एकजुटता के साथ जुड़ने की अपील करेंगे. केजरीवाल ने कहा है कि इसके बाद वे देश के अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी मुलाकात करेंगे और इस मुद्दे पर राज्यसभा में उनके दलों का समर्थन मांगेंगे.
केजरीवाल कर रहे ‘एक पंथ दो काज’
अरविंद केजरीवाल दरअसल ‘एक पंथ दो काज’ की कहावत चरितार्थ करने की कोशिश में हैं. यदि वे ऐसा करने में सफल रहे तो इससे एकतरफ विपक्ष एकसाथ खड़ा होकर भाजपा और पीएम मोदी को पटखनी देगा, जो लोकसभा चुनाव से पहले ‘सेमीफाइनल में जीत’ जैसा होगा. दूसरी तरफ, केजरीवाल अपनी दिल्ली सरकार के लिए सुप्रीम कोर्ट के जरिये मिला ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार भी बरकरार रखने में सफल रहेंगे.
क्या सफल हो पाएगी केजरीवाल की यह कवायद
राज्य सभा में भाजपा सरकार के खिलाफ कोई भी कवायद तभी सफल हो पाएगी, जब उसे कांग्रेस का समर्थन मिले. फिलहाल कांग्रेस ने खुद को केजरीवाल से दूर रखने का इशारा किया है. हालांकि इसके बावजूद यह माना जा रहा है कि राज्य सभा में कांग्रेस एकजुट विपक्ष का ही साथ देगी. इसके बावजूद भाजपा को अब तक राज्य सभा में ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजद और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी का साथ मिलता रहा है. साथ ही तमिलनाडु में भी अन्ना द्रमुक ने भाजपा के पक्ष में ही रुख रखा है. ऐसे में भाजपा को हराने के लिए केजरीवाल और नीतीश कुमार को सही मायने में पूरे विपक्ष के ही समर्थन की जरूरत होगी, जो अभी तक की परिस्थितियों में टेढ़ी खीर जैसा लग रहा है.







