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Home राष्ट्रीय

नई संसद में मोदी के साथ क्यों खड़ीं हैं माया?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
May 26, 2023
in राष्ट्रीय, विशेष
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new parliament
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नई दिल्ली: नई संसद भवन (New Sansad Bhavan) के उद्घाटन से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष में जोरदार तकरार देखन को मिल रही है। विपक्ष के 21 दल नई संसद के उद्घाटन का बहिष्कार करने का ऐलान कर चुके हैं। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के तमाम नेता विपक्षी दलों से बड़ा दिल करके इस समारोह में शामिल होने की अपील कर रहे हैं। इन सबके बीच बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती ने विपक्षी एकता की मांग को दरकिनार करते हुए नई संसद के उद्घाटन में समारोह में शामिल होने का ऐलान कर दिया है। ऐसा पहली बार नहीं है जब पूरे विपक्ष की सत्ता पक्ष के खिलाफ लामबंदी के बीच बीएसपी ने अलग रुख अपनाया हो। बीएसपी सुप्रीमो पहले भी कई मौकों पर अलग दांव चल चुकी है। कुछ एक्सपर्ट माया के इस फैसले को दूसरे नजरिए से भी देख रहे हैं। चूंकि राजनीति अनिश्चतताओं का खेल होता है तो भविष्य में इन दोनों दल के पास आने की सूरत भी बन सकती है। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले हर दल अपना पासा सोच-समझकर फेंक रहा है।

मायावती ने चल दिया दांव

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कभी केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिराने में अहम भूमिका निभाने वालीं मायावती के दांव से विपक्ष भी हैरान है। कांग्रेस समेत 21 विपक्षी दलों के विरोध के बीच मायावती ने गुरुवार को ट्वीट कर नई संसद भवन के उद्घाटन पर अपनी राय रखी। उन्होंने लिखा, ‘केंद्र में चाहे कांग्रेस पार्टी की सरकार रही हो या अब वर्तमान में बीजेपी की, बीएसपी ने देश और जनहित के मुद्दों पर हमेशा दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उनका समर्थन किया है। 28 मई को संसद के नए भवन के उद्घाटन को भी पार्टी इसी संदर्भ में देखते हुए इसका स्वागत करती है।’ उत्तर प्रदेश में बीजेपी के खिलाफ ताल ठोकने वाली बीएसपी ने अचानक से विपक्ष दलों के सुर के इतर अलग रुख अपना लिया है।

बीएसपी ने कई मौकों पर बीजेपी को ‘बचाया’

2019 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी और एसपी 24 साल बाद साथ आए थे। लोकसभा चुनाव में दोनों दलों ने मिलकर 15 सीटों पर जीत दर्ज की। बीएसपी को 10 सीटों पर जीत मिली जबकि एसपी महज 5 सीटों पर ही जीत सकी। दोनों दल ने उम्मीदों के मुताबिक सीट नहीं मिलने पर एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने लगे। एसपी के कुछ नेता तो यहां तक कहने लगे कि बीएसपी ने चुनाव में गुपचुप तरीके से बीजेपी की मदद की। इसके बाद दोनों दलों ने गठबंधन तोड़ लिया।

2022 के विधानसभा चुनाव में लगे आरोप

समाजवादी पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और बीएसपी के गुपचुप गठबंधन का आरोप लगाया था। एसपी ने कहा कि बीएसपी बीजेपी को इस चुनाव में फायदा पहुंचा रही है। इस चुनाव में बीजेपी ने लगातार दूसरी बार राज्य में सरकार बनाया था। बीएसपी का विधानसभा चुनाव में काफी खराब प्रदर्शन रहा था पार्टी केवल एक सीट ही जीत पाई थी। यही नहीं, बीएसपी का वोट प्रतिशत में भी कमी आई थी।

राष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी कैंडिडेट का साथ

पिछले साल हुए राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी बीएसपी चीफ मायावती ने एनडीए राष्ट्रपति कैंडिडेट द्रौपदी मुर्मू का समर्थन किया था। मायावती ने कहा था कि उनका दल आदिवासी समाज को अपने आंदोलन का हिस्सा मानता है और वो मुर्मू को अपना समर्थन दे रही हैं। गौरतलब है कि विपक्ष की तरफ से राष्ट्रपति पद के कैंडिडेट यशवंत सिन्हा थे।

नई संसद पर भी बीजेपी के साथ बीएसपी

नई संसद के उद्घाटन का जहां एसपी, आरएलडी समेत कई विपक्षी दल बहिष्कार कर रही तो मायावती ने अलग राह अपनाई है। उन्होंने तो विपक्ष की उस मांग को भी सिरे से खारिज कर दिया कि नई संसद का उद्घाटन राष्ट्रपति मुर्मू को करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने इसको बनाया है इसलिए उसके उद्गाटन का उसे हक है। इसे आदिवासी महिला सम्मान से जोड़ना भी ठीक नहीं है। मायावती ने तो विपक्ष पर तंज भी कस दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी राष्ट्रपति निर्विरोध न चुनकर उनके खिलाफ उम्मीदवार खड़ा करते वक्त विपक्ष को यह सोचना चाहिए था।

बीजेपी संग बना चुकी हैं सरकार

यूपी की चार बार सीएम रह चुकीं मायावती तीन बार बीजेपी की मदद से सीएम बनी थीं। पहली बार 1995 में बीजेपी की मदद से मायावती सीएम बनी थीं। 137 दिन बाद ही यह सरकार गिर गई और राज्य में चुनाव हुआ। इस चुनाव के बाद फिर बीजेपी और बीएसपी एक साथ आई। इस दौरान दोनों दलों के बीच समझौता हुआ कि 6-6 महीने का सीएम होगा। पहले मायावती सीएम बनीं। फिर कल्याण सिंह के सीएम बनते ही बीएसपी ने समर्थन वापस ले लिया। इसके बाद काफी हंगामा हुआ था। 2002 में दोनों दल फिर एकसाथ आए और मायावती सीएम बनीं। यह सरकार करीब 16 महीने चली थी। 2007 के विधानसभा चुनाव में मायावती ने अपने दम पर बहुमत हासिल किया और 5 साल तक शासन किया।

 

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