नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के पूर्व मुखिया और बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न के मामलों के तहत पटियाला हाउस कोर्ट में चार्जशीट दायर कर दी है. हालांकि, दिल्ली पुलिस ने डब्ल्यूएफआई के एक्स-चीफ के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामला रद्द करने की सिफारिश भी है. बता दें कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ एक नाबालिग समेत कुल सात महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था. नाबालिग पहलवान के आरोपों के कारण बृजभूषण के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों को सुरक्षा देने वाले पॉक्सो अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया.
नाबालिग पहलवान ने आरोप लगाया था कि डब्ल्यूएफआई एक्स-चीफ ने तस्वीर लेने के बहाने उसे कसकर पकड़ लिया. फिर उसके शरीर के ऊपरी हिस्सों पर हाथ फिराना लगे. अब अगर पटियाला हाउस कोर्ट पुलिस की सिफारिश मान लेता है, तो बृजभूषण पर पॉक्सो एक्ट के तत मुकदमा नहीं चलेगा. बता दें कि इस एक्ट में दोषी पाए जाने पर पांच से सात साल तक की कैद की सजा दी जाती है. अब सवाल ये उठता है कि दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत केस वापस लेने का फैसला क्यों किया? इससे फैसले पर क्या असर पड़ सकता है?
पॉक्सो केस वापस क्यों लेना चाहती है पुलिस?
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से कहा कि डब्ल्यूएफआई एक्स-चीफ के खिलाफ पॉक्सो की धारा के तहत अपराध का संकेत देने के लिए कोई पुख्ता सबूत उपलब्ध नहीं है. वहीं, पॉक्सो एक्ट के तहत केस रद्द करने की रिपोर्ट तब दायर की जाती है, जब कोई सहायक सबूत नहीं मिलता है. केस में ये मोड़ नाबालिग पहलवान और उसके पिता की ओर से जून 2023 में आरोप वापस लेने और नया बयान दर्ज कराने के बाद आया है. उन्होंने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने नया बयान दर्ज कराया है. लिहाजा, दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में पॉक्सो एक्ट के तहत केस रद्द करने की सिफारिश की है.







