Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home विशेष

क्‍यों मनाया जाता है आदिवासी दिवस, जानिए इतिहास

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 9, 2023
in विशेष, विश्व
A A
World Tribal Day
26
SHARES
862
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली : भारत ही नहीं, दुनिया के तमाम हिस्‍सों में आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं, जिनका रहन-सहन, खानपान, रीति-रिवाज वगैरह आम लोगों से अलग है. समाज की मुख्‍यधारा से कटे होने के कारण ये पिछड़ गए हैं. इस कारण भारत समेत तमाम देशों में इनके उत्‍थान के लिए, इन्‍हें बढ़ावा देने और इनके अधिकारों की ओर ध्‍यान आकर्षित करने के लिए कई तरह के कार्यक्रम चलाए जाते हैं. इसी कड़ी में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पहली बार 1994 को अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी वर्ष घोषित किया था. इसके बाद से हर साल ये दिन  9 अगस्‍त को मनाया जाता है. आइए आपको बताते हैं इस दिन से जुड़ी खास बातें.

क्‍यों पड़ी इस दिन को सेलिब्रेट करने की जरूरत

इन्हें भी पढ़े

डॉ. हेमंत शरद पांडे

आईएमआरसी 2026 में विश्व विजेता बनी वेकोलि माइन्स रेस्क्यू टीम का भव्य स्वागत एवं सम्मान

May 11, 2026
PM modi

ब्लूमबर्ग रिपोर्ट: 2030 के बाद भी सत्ता में रह सकते हैं पीएम मोदी, भाजपा के पक्ष में बन रहा माहौल !

May 11, 2026
Rashtriya Swayamsevak Sangh

स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को मीडिया ने सबसे अधिक भ्रामक रूप में प्रस्तुत किया: प्रखर श्रीवास्तव

May 11, 2026
AI

AI पर अरबों खर्च कर रहीं कंपनियां, फिर भी नहीं मिल रहा फायदा!

May 10, 2026
Load More

दुनिया के तमाम देशों में आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं. इनकी भाषाएं, संस्‍कृति, त्‍योहार, रीति-रिवाज और पहनावा सबकुछ अलग है. इस कारण ये समाज की मुख्‍यधारा से नहीं जुड़ पाए हैं. रिपोर्ट्स बताती हैं कि इनकी संख्‍या भी समय के साथ घटती जा रही है. आदिवासी लोगों को अपना अस्तित्व, संस्कृति और सम्मान बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. इस जनजाति को संरक्षण और बढ़ावा देने, इनकी संस्कृति व सम्मान को बचाने के लिए आदिवासी दिवस मनाया जाता है.

अमेरिकी आदिवासियों का बड़ा योगदान

विश्व आदिवासी दिवस मनाए जाने में अमरीका के आदिवासियों का बड़ा योगदान है. दरअसल अमेरिका में 12 अक्‍टूबर को हर साल कोलंबस दिवस मनाया जाता है. वहां के आदिवासियों का मानना था कि कोलंबस उस उपनिवेशी शासन व्यवस्था का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसके लिए बड़े पैमाने पर जनसंहार हुआ था. इसलिए कोलंबस दिवस की जगह पर आदिवासी दिवस मनाया जाना चाहिए. इसके लिए 1977 में जेनेवा में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस सम्‍मेलन में कोलंबस दिवस की जगह आदिवासी दिवस मनाने की मांग की गई. 1989 से आदिवासी समुदाय के लोगों ने इस दिन को सेलिब्रेट करना शुरू कर दिया. इसके बाद हर साल 12 अक्‍टूबर को कोलंबस दिवस की जगह आदिवासी दिवस मनाने लगे. इसके बाद यूनाइटेड नेशन ने साल 1994 में आधिकारिक रूप से आदिवासी दिवस 9 अगस्‍त को मनाने का ऐलान किया.

इस दिन दुनियाभर में संयुक्त राष्ट्र और कई देशों की सरकारी संस्थानों के साथ-साथ आदिवासी समुदाय के लोग, आदिवासी संगठन सामूहिक समारोह का आयोजन करते हैं. इस दौरान आदिवासियों की मौजूदा स्थिति और भविष्य की चुनौतियों को लेकर चर्चा होती है. कई जगहों पर जागरुकता अभियान चलाए जाते हैं.

भारत में आदिवासी लोगों की बड़ी तादाद

भारत की बात करें तो यहां मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्‍तीसगढ़, बिहार आदि तमाम राज्‍यों में आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं. मध्‍य प्रदेश में 46 आदिवासी जनजातियां निवास करती हैं. एमपी की कुल जनसंख्या के 21 फीसदी लोग आदिवासी समुदाय के हैं. वहीं झारखंड की कुल आबादी का करीब 28 फीसदी आदिवासी समाज के लोग हैं. इसके अलावा भी तमाम राज्‍यों में आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं.

मध्‍य प्रदेश में गोंड, भील और ओरोन, कोरकू, सहरिया और बैगा जनजाति के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं. गोंड एशिया का सबसे बड़ा आदिवासी ग्रुप है, जिनकी संख्या 30 लाख से अधिक है. मध्य प्रदेश के अलावा गोंड जनजाति के लोग महाराष्ट्र, बिहार, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी निवास करते हैं. वहीं में संथाल, बंजारा, बिहोर, चेरो, गोंड, हो, खोंड, लोहरा, माई पहरिया, मुंडा, ओरांव आदि आदिवासी समूह के लोग रहते हैं.

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
pm modi

मोदी मैजिक की कर्नाटक में हो रही परीक्षा

May 10, 2023
cough syrup

कफ सिरप बिक्री पर सख्त निगरानी, 350 से अधिक सैंपल लिए गए, दर्जनों मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस रद्द

October 12, 2025
Biden

व्हाइट हाउस में कोकीन मिलने के बाद मचा बवाल? टेंशन में बाइडन

July 16, 2023
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • भगवान विष्णु के लिए एकादशी व्रत रखने से पहले जान लें इससे जुड़े 10 बड़े लाभ
  • देश के 19 राज्यों के लिए तूफान और भारी बारिश की चेतावनी, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
  • भारत में कितने दिनों का पेट्रोल-डीजल बाकी, कोटा लागू करने पर क्या है सरकार का प्लान

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.