नई दिल्ली। तिहाड़ जेल में रह रहे कैदियों को मुफ्त कानूनी सहायता, जमानत, फर्लो, पैरोल, माफी, प्ली बार्गेनिंग, अपराधों के शमन और ऐसे अन्य अधिकारों से संबंधित विषयों पर जागरूक करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट विधिक सेवा कमेटी (डीएचसीएलएससी) ने कानूनी साक्षरता सबका अधिकार कार्यक्रम की शुरुआत की है।
इसके तहत तिहाड़, मंडोली व रोहिणी जेल में रह रहे कैदियों के लिए प्रत्येक शुक्रवार को कानूनी साक्षरता की कक्षा लगाई जाएगी। डीएचसीएलएससी ने यह कार्यक्रम तिहाड़ जेल के सहयोग से शुरू किया है। दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति मनमोहन ने शनिवार को तिहाड़ के सेंट्रल जेल नंबर-चार से इस कार्यक्रम का उद्याटन किया।
न्यायमूर्ति ने इस दौरान अदालतों में कैदियों की ओर से उचित कानूनी प्रतिनिधित्व के महत्व और उन कैदियों के हितों की रक्षा में डीएचसीएलएससी द्वारा निभाई गई भूमिका पर चर्चा की जो स्वयं उचित कानूनी प्रतिनिधित्व वहन करने में सक्षम नहीं हैं।
उन्होंने कैदियों के बीच उनके अधिकारों के बारे में जागरूकता की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कैदियों को कारावास की अवधि के दौरान सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने के लिए भी प्रोत्साहित किया, ताकि वह जेलों से रिहा होने पर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकें।
उन्होंने कैदियों को आश्वासन दिया कि डीएचसीएलएससी हमेशा की तरह कैदियों को उनके अधिकारों का लाभ उठाने में मदद करने के लिए प्रयास करना जारी रखेगा। डीएचसीएलएससी के सचिव सुशांत चंगोत्रा ने बताया कि एक दिसंबर तक तीनों जेलों में प्रत्येक शुक्रवार को कानूनी साक्षरता का सत्र लेने के लिए पैनल अधिवक्ताओं और जेल विजिटिंग अधिवक्ताओं को नामित किया गया है।
इस दौरान जेल महानिदेशक संजय बेनीवाल, डीएसएलएसए के सदस्य सचिव मुकेश कुमार गुप्ता, तिहाड़ जेल के जेल के अतिरिक्त महानिरीक्षक एचपीएस सरन, डीएसएलएसए के विशेष सचिव नवीन गुप्ता और डीआइजी जेल राजेश चोपड़ा उपस्थित थे। वहीं, कार्यक्रम के दौरान न्यायमूर्ति मनमोहन ने तिहाड़ के सेंट्रल जेल नंबर-चार में नवस्थापित पेपर क्राफ्ट यूनिट का भी उद्घाटन किया।






