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Home राष्ट्रीय

कभी चलता था सहारा का सिक्का, फिर एक दिन कैसे सब हो गया खत्म?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
November 15, 2023
in राष्ट्रीय
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Sahara
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नई दिल्ली. सहारा ग्रुप बहुत लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट टीम और भारतीय हॉकी टीम का स्पॉन्सर रहा था. एक समय पर यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता था. खबरों के मुताबिक, सहारा के पास लगभग 14 लाख कर्मचारी थे. कंपनी का मूल्यांकन 2 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक था. यह सब हासिल हुआ था एक सितारे के कारण जो बिहार के अररिया से निकलकर देश के व्यावसायिक आसमान पर छा गया था. इस सितारे का नाम था सुब्रत रॉय सहारा, जिन्हें उनकी कंपनी के कर्मचारी सहारा श्री के नाम से बुलाते थे.

सुब्रत रॉय सहारा का मंगलवार रात 75 वर्ष की आयु में मुंबई के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. वह लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे. सुब्रत रॉय का जन्म बिहार के अररिया में हुआ था. उनके पिता इंजीनियर थे और सुब्रत भी कोलकाता से शुरुआती पढ़ाई के बाद इंजीनियरिंग के लिए गोरखपुर चले गए. हालांकि, पढ़ाई में वहां उनका मन नहीं लगा.

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बिस्किट नमकीन बेचना किया शुरू

वह बिजनेस करना चाहते थे. उन्होंने अपने दोस्त के साथ मिलकर एक स्कूटर पर नमकीन-बिस्किट बेचना शुरू किया. यह उनके व्यावसायिक करियर की शुरुआत थी. उन्होंने दोस्त के साथ मिलकर ही सहारा चिट फंड कंपनी की नींव रखी. यह स्कीम ऐसी थी कि इसे गांवों तक पहुंच मिल गई. एक समय था जब 100 रुपये की कमाई वाले लोग भी इसमें 20 रुपये का निवेश करके रिटर्न पा सकते थे. हालांकि, इस स्कीम पर 1980 में सरकार द्वारा रोक लगा दी गई.

हाउसिंग डेवलपमेंट में पैर

इसके बाद सहारा ने हाउसिंग डेवलपमेंट के क्षेत्र में कदम रखा. हालांकि, वे यहीं नहीं रुके. रियल एस्टेट, फाइनेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर, मीडिया, एंटरटेनमेंट, हेल्थ केयर, हॉस्पिटैलिटी, रिटेल, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी हर तरफ उन्होंने अपने पैर पसारे. वह भारत के दूसरे सबसे बड़े नियोक्ता भी बने. हालांकि, ये उपलब्धि हासिल करने से पहले उन्हें एक हल्का झटका लगा जब एक इनकम टैक्स ऑफिसर की नजर उनके कारोबार पर पड़ी. प्रसनजीत सिंह नाम के इस अधिकारी को कुछ हेरफेर दिखाई दी तो उन्होंने इसकी जांच करनी चाही. लेकिन सहारा के पॉलिटिकल कनेक्शन उस समय बहुत मजबूत थे. इसी के बल पर अधिकारी का ट्रांसफर करा दिया गया.

जुटाई अकूत दौलत

सुब्रत रॉय ने मुंबई व लखनऊ समेत देश के कई इलाकों में जमीनें खरीदी. लखनऊ में तो उन्होंने सहारा नाम से एक पूरा इलाका ही बसा डाला था. उनके पास देशभर में 750 एकड़ से ज्यादा जमीन है. इतना ही नहीं सहारा के पास अमेरिका में 4400 करोड़ के 2 होटल भी हैं.

खराब समय की शुरुआत

सहारा के लिए बड़ी मुसीबत तब खड़ी हुई जब उन्होंने अपनी 2 कंपनियों के लिए 2009 में सेबी से आईपीओ लाने की अनुमति मांगी. जैसा कि आमतौर पर होता है सेबी ने उनसे कंपनी से जुड़े विस्तृत दस्तावेज जमा करने को कहा. सहारा ने ऐसा किया और सेबी को उसमें बड़ी गड़बड़ियां नजर आईं. सेबी ने पाया कि इन कंपनियों ने बिना लिस्ट हुए ही 3 करोड़ लोगों से 24000 करोड़ रुपये जुटाए थे. यह नियमों का उल्लंघन था और इसके लिए सहारा पर 12000 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया.

सुप्रीम कोर्ट से पंगा

सेबी ने जब सहारा से निवेशकों के दस्तावेज मांगे तो कंपनी की ओर से 127 ट्रक डॉक्यूमेंट्स भेजे गए. मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया. सुप्रीम कोर्ट ने भी सेबी के पक्ष में फैसला दिया. सहारा को तगड़ा झटका तब लगा जब सुप्रीम कोर्ट ने सहारा को 24000 करोड़ रुपये निवेशकों को वापस करने के लिए कहा. इतना ही नहीं उन्हें निवेशकों को 15 फीसदी ब्याज के साथ इस रकम को वापस करने का आदेश दिया गया. सहारा ने फैसले को नहीं माना और वह कोर्ट में पेश भी नहीं हुए. कोर्ट की आदेश की अवहेलना के मामले में उन्हें 2014 में गिरफ्तार कर लिया गया. हालांकि, 2 साल बाद वह बेल पर जेल से बाहर आ गए लेकिन उनकी परेशानियां खत्म नहीं हुईं.

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