नई दिल्ली: लोकतंत्र के मंदिर यानी संसद भवन में चार लोगों ने मिलकर जो हंगामा किया, उसने नए संसद भवन की सुरक्षा की पोल खोलकर रख दी. साथ ही संसद की सुरक्षा में चूक भी उजागर हो गई. 22 साल पहले भी आतंकी संसद की दहलीज़ तक जा पहुंचे थे. उस वक्त पांच आतंकवादियों ने संसद पर हमला कर दिया था. हालांकि कुछ देर बाद ही सुरक्षा बलों ने पांचों आतंकवादियों को ढेर कर दिया था. उस हमले के बाद संसद भवन के पूरे सुरक्षा इंतजाम को ही बदल दिया गया था. लेकिन अब 22 साल बाद जो हुआ.. उसने सांसदों को ही नहीं पूरे देश को सकते में डाल दिया.
इस पूरे घटनाक्रम में 6 आरोपियों की संलिप्तता सामने आई है. ये आरोपी पांच अलग-अलग राज्यों के रहने वाले हैं. सागर शर्मा उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं. मनोरंजन डी कर्नाटक के मैसूर का रहने वाला है. नीलम हरियाणा के जींद जिले के गांव घासो खुर्द की रहने वाली है. अमोल शिंदे लातूर (महाराष्ट्र) के रहने वाले हैं. इसके अलावा, एक्पोर्ट कंपनी में ड्राइवर विशाल शर्मा और हरियाणा का रहने वाला ललित झा है. सूत्रों का कहना है कि ललित झा इस पूरे कांड का मास्टरमाइंड माना जा रहा है.
संसद भवन पर हुए हमले की 22वीं बरसी थी. दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू होने से पहले बीते 21 सालों की तरह इस बार भी तमाम सांसदों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी. तब घड़ी में सुबह के 9 बजकर 20 मिनट हुए थे. उसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही सुबह ठीक 11 बजे शुरू होती है. संसद भवन पर हमले की बरसी में शामिल होने के बाद प्रधानमंत्री और गृह मंत्री संसद से निकल चुके थे. दोनों को भोपाल और रायपुर में नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में जाना था. पर बाकी विपक्ष के नेता और सांसद पार्लियामेंट हाउस में मौजूद थे. लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद अलग-अलग सांसद अपनी-अपनी बातें रख रहे थे.
सदन में रंगीन धुआं
इन नारों के साथ ही अब दोनों युवक सांसदों की बेंच पर कूदते-कूदते लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी की तरफ दौड़ने लगते हैं. दोनों को इस तरह सांसदों के बेंच पर दौड़ते देख संसद भवन में अफरातफरी मच जाती है. फिर इसी बीच आगे-आगे दौड़ रहा शख्स अपने जूते से कुछ निकालता है और हवा में उड़ा देता है. ये कोई रंगीन गैस थी. अब संसद भवन में धुआं फैलना शुरू हो जाता है. सांसद खगेन मुर्मू भी ये सब देख कर दहशत में आ जाते हैं.
इधर-उधर भागे कुछ सांसद
उधर, ये मंजर देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष भी आनन-फानन में लोकसभा की कार्यवाही को दो बजे तक के लिए स्थगित करने का ऐलान कर देते हैं. फिर बाद में समय बढ़ाकर चार बजे तक कर दिया जाता है. सदन के अंदर मौजूद सांसद अब इधर-उधर भाग रहे थे, लेकिन उन्हीं सांसदों में से कुछ ने हौसला दिखाया और दोनों संदिग्धों को दबोच लिया.
जब दोनों संदिग्धों पर काबू पा लिया गया, तब बाकी के सांसदों की जान में जान आई. इस बीच संसद भवन के अंदर का मंजर सड़क या नुक्कड़ जैसा नजर आने लगा. बाद में पार्लियामेंट के सुरक्षा गार्ड आए और दोनों को पकड़कर बाहर ले गए.







