Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

राम मंदिर जाने को लेकर फंसा INDIA गुट, 4 विकल्‍प हैं लेकिन सबमें मुश्किल

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
December 26, 2023
in राष्ट्रीय
A A
Opposition's
23
SHARES
755
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली : राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर राजनीति तो होनी ही थी. बीजेपी ने फिलहाल विपक्ष को आमंत्रण देकर गुगली फेंक दिया है. इंडिया गठबंधन के बहुत से साथियों के लिए ऊहापोह की स्थिति पैदा हो गई है. फिलहाल बीजेपी यही चाहती भी थी. इंडिया गठबंधन की 19 दिसंबर वाली बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी कि राम मंदिर का श्रेय लेने से किस तरह बीजेपी को रोका जाए. पर राममंदिर को लेकर बीजेपी की आक्रामक रणनीति में विपक्ष बुरी तरह फंस गया है. कम्युनिस्ट पार्टियों को छोड़कर अन्य दल अभी भी समझ नहीं पा रहे हैं कि उन्हें क्या स्टेप लेना है.

राम मंदिर मुद्दे से चिंतित वामपंथियों ने अपनी राय स्‍पष्‍ट कर दी

इन्हें भी पढ़े

PM modi

अच्छा स्वास्थ्य ही जीवन के चार पुरुषार्थों का आधार: पीएम मोदी

September 28, 2026
खेल मंत्री डॉ म.नसुख मांडविया

एआई के दौर में बदलेंगे औद्योगिक संबंध, मांडविया ने उद्योग और श्रमिकों को साझेदार बनने का किया आह्वान

September 28, 2026
jp nadda

विपक्ष के आरोपों पर नड्डा का पलटवार, कहा- ‘झूठ सौ बार बोलने से सच नहीं बनता’

September 28, 2026
lng train india

गृह मंत्री अमित शाह ने LNG से चलने वाली देश की पहली ट्रेन को दिखाई हरी झंडी

September 27, 2026
Load More

राम मंदिर मुद्दे का भाजपा किस तरह भुनाएगी और लोकसभा चुनाव में वह इसका कैसे फायदा उठाएगी, इस बात की सबसे पहली चिंता सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने की थी. इंडिया गुट की बैठक में उन्‍होंने सभी साझेदार दलों से आग्रह किया था कि वह राम मंदिर मुद्दे पर एक काउंटर स्‍ट्रेटेजी तैयार करे. पूरा विपक्ष इस बारे में कोई साझा रणनीति तय कर पाता, उससे पहले वामदलों की ओर से CPI(M) नेता बृंदा करात ने क्लियर कर दिया है कि हमारी पार्टी अयोध्या में राम मंदिर के ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह में शामिल नहीं होगी. हम धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हैं लेकिन वे एक धार्मिक कार्यक्रम को राजनीति से जोड़ रहे हैं. यह एक धार्मिक कार्यक्रम का राजनीतिकरण है. यह सही नहीं हैं. आयोध्‍या से आए निमंत्रण पर येचुरी ने कहा कि हमने किसी को कुछ नहीं कहा. वो आए थे निमंत्रण देने. हमने चाय कॉफी पूछी उनको. हमे निमंत्रण मिला. उद्घाटन समारोह में पीएम, योगी और पदाधिकारी रहेंगे. राजनीतिकरण होगा इसका. ये गलत है. राजनीतिकरण के खिलाफ हम हैं. इसलिए हम नहीं जाएंगे वहां. धर्म का मतलब उनको समझना पड़ेगा. बाकि का नहीं पता, लेकिन हम नही जाएंगे.

अखिलेश यादव और सुप्रिया सुले की हां में भी ना छुपी हुई है

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और एनसीपी की नेता सुप्रिया सुले ने इस हफ्ते जिस तरह की बातें की हैं उससे तो यही लगता है कि दोनों कन्फ्यूज हैं कि उन्हें क्या करना है? अखिलेश यादव ने इसी हफ्ते यह कहा था कि अगर राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट उन्हें आमंत्रित करता है तो वो प्राण प्रतिष्ठा समारोह में जरूर शामिल होंगे. पर इसी बीच उनकी पार्टी के दूसरे सांसदों और नेताओं के जो बयान आए हैं उससे तो यही लगाता है अखिलेश राम मंदिर समारोह में जाने के लिए उत्साहित नहीं होंगे.

उनकी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहान बर्क ने कहा है कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दिन वो बाबरी मस्जिद जो हमसे छीनी गई उसके लिए दुआ करेंगे.इसी बीच सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने हिंदू धर्म के खिलाफ फिर जहर उगला है. ऐसी दशा में यही लगता है कि अखिलेश बुलावा नहीं आने का बहाना बनाकर राममंदिर समारोह से दूरी बनाना चाहते हैं. पर दूसरी तरफ विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि सपा मुखिया अखिलेश यादव व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत सभी प्रमुख दलों के प्रमुखों को आदरपूर्वक आमंत्रित किया जाएगा.

उन्होंने यहां तक कहा है कि अगर आमंत्रण पत्र लेने के लिए विहिप व राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र के पदाधिकारियों को मिलने का वक्त अखिलेश नहीं देंगे तो उन्हें डाक के माध्यम से आमंत्रण पत्र भेजा जाएगा. सुप्रिया सुले ने भी राम मंदिर जाने के बारे में यही कहा है कि, राम मंदिर का न्योता आने के बाद देखते हैं कि क्या करना है.

कांग्रेस नेता नहीं खोल रहे अपने पत्ते

अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग लेने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को निमंत्रण भेजा गया है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की तरफ से ये न्योता भेजा गया है. इससे पहले, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी निमंत्रण भेजा गया है. लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी को भी प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान का आमंत्रण पत्र सौंपा गया है.हालांकि कांग्रेस की तरफ से अभी तक इस तरह का कोई बयान नहीं आया है कि वो प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग लेंगे या नहीं.इससे यही लगता है कि कांग्रेस भी पशोपेश में है कि समारोह में शामिल हुआ जाए या नहीं . तेलंगाना में जिस तरह मुस्लिम समुदाय ने बीआरएस को छोड़कर कांग्रेस के लिए वोट किया है उससे ये संदेश गया है कि देश में मुस्लिम वोटर्स का भरोसा कांग्रेस जीत रही है. ऐसी स्थिति में कांग्रेस इस समारोह से अपने को दूर रखने की ही कोशिश करेगी.

दरअसल इंडिया गठबंधन में शामिल अधिकतर पार्टियां मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए खुद को राम मंदिर आंदोलन से दूर रखती आईं हैं. आरजेडी और समाजवादी पार्टी की सरकारों ने राम मंदिर आंदोलन के खिलाफ अपने कठोर एक्शन के चलते इतिहास में अपना नाम दर्ज करा चुकी हैं. 1990 में लाल कृष्ण आडवाणी की रथयात्रा को बिहार में घुसते ही केवल रोका ही नहीं गया बल्कि आडवाणी की गिरफ्तारी भी हुई. बिहार के तत्कालीन मुख्य मंत्री लालू प्रसाद यादव मुस्लिम वोटर्स के बीच ऐसा हीरो बने कि आज भी अल्पसंख्यकों का वोट आरजेडी को ही जाता है. यूपी में 1990 में ही अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलवाकर आंदोलन को जबरन दबाने का श्रेय यूपी के तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव ले चुके हैं.

इंडिया गठबंधन के सामने अब 4 ऑप्शन बचे हैं:

  • समारोह में शामिल होने सभी दल एक साथ जाएं.
  • समारोह में कोई भी शामिल न होने जाए.
  • स्वतंत्र छोड़ दिया जाए, मतलब जो जाना चाहे जाए और जो नहीं जाना चाहे वो नहीं जाए. अगर सभी पार्टियां 2 नंबर ऑप्शन चूज करती हैं और कम्युनिस्ट पार्टियों की तरह इस समारोह का बहिष्कार करती हैं तो क्या हो सकता है?
  • और आखिर में यह विकल्‍प है कि इस मुद्दे को विपक्षी गुट छुए ही नहीं, ताकि भाजपा को कोई पलटवार का मौका मिले.

देखा जाए तो रामंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बहिष्कार से भी विपक्ष को कोई नुकसान नहीं होने वाला है. पिछले दिनों आए विधानसभा चुनावों के रिजल्ट को देखें तो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का खेला गया हिंदू कार्ड बुरी तरह असफल साबित हुआ है.

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल

हिंसक समाज अच्छा नहीं होता

July 21, 2022

महंगाई का विमर्श

December 31, 2022
नीतीश PK

अपनी ही राजनीति से घिरे राजनीति के सबसे धुरंधर खिलाड़ी

January 6, 2023
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • CM रेखा गुप्ता ने भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद से मिलाया हाथ, दिल्ली के कलाकारों को मिलेंगे अंतरराष्ट्रीय अवसर
  • गया जी में ही क्यों होता है पिंडदान! गयासुर से जुड़ा है विष्णुपद मंदिर का ये रहस्य
  • CM रेखा गुप्ता ने ऑनलाइन लाइसेंस, एनओसी के लिए ‘दिल्ली उद्योग मित्र’ पोर्टल शुरू किया

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.