Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

क्यों इन 64 देशों के चुनावी नतीजों पर टिकी रहेंगी दुनिया की नजरें?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
April 1, 2024
in राष्ट्रीय, विश्व
A A
election
16
SHARES
524
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली। देश में आम चुनाव का आयोजन होने वाला है, जो 19 अप्रैल से सात चरणों में होगा. इस दौरान करीब 96.8 करोड़ मतदाता वोट डालेंगे. इसी तरह दुनिया की भी लगभग आधी आबादी अपने-अपने देशों में नेता चुनने वाली है. मैक्सिको से साउथ अफ्रीका, और ब्रिटेन से लेकर बेल्जियम तक कुल 80 देशों में या तो हाल में चुनाव हुए, या आने वाले कुछ महीनों में होंगे. ऐसा इतिहास में पहली बार हो रहा है. वैसे तो हर देश के लिए उसका इलेक्शन और नतीजे जरूरी हैं, लेकिन कई डेमोक्रेसीज हैं, जिनके चुनावों में जीत-हार से दुनिया पर असर होगा.

अमेरिकी जीत-हार का असर काफी

इन्हें भी पढ़े

BJP and Congress

नागरिकता पर कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा, BJP ने किया पलटवार!

June 25, 2026
UGC NET

NEET के बाद अब UGC NET में भी री-एग्जाम, क्या है पूरा मामला?

June 23, 2026
Petrol-Diesel

तेल कंपनियों को बंपर मार्जिन, जनता परेशान, पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर आई बड़ी रिपोर्ट

June 23, 2026
suvendu adhikari

भारत की गर्दन पर थी दुश्मनों की नजर, सुवेंदु अध‍िकारी ने पलट द‍िया गेम

June 22, 2026
Load More

वहां राष्ट्रपति चुनाव नवंबर में होंगे लेकिन भूचाल अभी से आया हुआ है. पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी एक उम्मीदवार हैं. रिपब्लिकन पार्टी से इस दावेदार पर ज्यादातर वोटर भरोसा भी दिखा रहे हैं. जैसे न्यूयॉर्क टाइम्स के एक सर्वे में 59% वोटरों ने इकनॉमी के मामले में ट्रंप पर भरोसा किया, जबकि वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडन पर केवल 37% ने भरोसा जताया. ये उनका अंदरुनी मामला है, लेकिन असर लगभग सभी देशों पर दिखेगा.

जैसे डेमोक्रेटिक पार्टी को कम आक्रामक माना जाता है. वहीं रिपब्लिकन समेत उसका उम्मीदवार भी बेहद आक्रामक माना जाता है. ट्रंप की बात करें तो वे रूस में वर्तमान सत्ता के करीबी माने जाते रहे, जबकि चीन से तनाव अक्सर बयानों में दिखता रहा. इन बड़े देशों के साथ रिश्तों में उतार-चढ़ाव होते ही हरेक की इकनॉमी और डिप्लोमेसी पर असर हो सकता है. जैसे जो देश अमेरिका के दोस्त हैं, देखादेखी उन्हें भी किसी से कठोर या किसी के लिए नरम लहजा अपनाना पड़ सकता है.

नए तनाव पनप सकते हैं

कुछ समय पहले ही ट्रंप ने नाटो में कम पैसे लगाने वाले सदस्य देशों से नाराजगी दिखाते हुए जरूरत में मदद न करने की धमकी दी थी. ये भी एक खतरा है. हो सकता है कि इससे वर्तमान में चल रहे युद्धों के साथ नई लड़ाइयों की जमीन तैयार हो जाए. वैसे ट्रंप के आने से इजरायल और खाड़ी देशों के रिश्ते सुधरे. उनके दौर में यूएई, बहरीन और इजरायल के बीच शांति समझौता हुआ. तो इसमें ये भी हो सकता है कि मध्यस्थता से इजरायल और हमास का तनाव थोड़ा ढीला पड़ जाए. ऐसे कई कयास एक्सपर्ट लगातार लगा रहे हैं, लेकिन इतना तय है कि वहां जो भी लीडर होगा, उसका असर दुनिया पर होगा.

यूरोपियन यूनियन का असर शरणार्थी नीति पर

यूरोपियन पार्लियामेंट की 720 सीटों पर यानी 27 देशों में जून में चुनाव होंगे. इससे पूरे यूरोप का आने वाले समय में दुनिया के लिए रवैया तय हो सकता है. इसमें जर्मनी, फ्रांस और पोलैंड और डेनमार्क जैसे ताकतवर देश हैं. इन देशों में कथित तौर पर दक्षिणपंथ की हवा चल रही है. ऐसे में अगर इसी सोच या वायदे वाला कैंडिडेट जीतकर आए तो शरणार्थी पॉलिसी पर असर हो सकता है. हो सकता है कि बाहरी लोगों के लिए वहां जगह न बचे, या पहले से रहते लोगों के लिए मूल लोगों का रवैया बदल जाए. इससे पैदा हुए तनाव का असर हर कोने में दिखेगा.

भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में भी चुनाव है, जो बहुत खास माना जा रहा है. असल में साल 2022 में गंभीर आर्थिक संकट झेलने के बाद वहां राष्ट्रपति पद के लिए ये पहला चुनाव होगा. भारत और चीन दोनों की इसपर नजरें रहेंगी क्योंकि दोनों ही देशों ने श्रीलंका को भारी कर्ज भी दिया, साथ ही भारत इस देश का सबसे करीबी सहयोगी भी माना जाता रहा.

चूंकि देशों की नीतियों पर इससे भी असर पड़ता है कि कहां कौन लीडर चुना गया, इसलिए कई देश एक-दूसरे के चुनावों में दखल भी देते रहे. कम से कम ऐसा आरोप आपस में लगाते रहे, हालांकि क्योंकि हस्तक्षेप सीधा नहीं होता इसलिए कभी इसका सबूत भी नहीं मिल सका.

सीधे-सीधे असर नहीं डालता है

कोई भी देश फॉरेन इलेक्टोरल इंटरवेंशन सीधे-सीधे नहीं करता ताकि उसकी इमेज खराब न हो. वो चुपके से चुनावों पर असर डालता है. ये भी दो तरीकों से होता है. जब विदेशी ताकतें तय करती हैं कि उन्हें किस एक का साथ देना है. दूसरे तरीके में विदेशी शक्तियां लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव के लिए देशों पर दबाव बनाती हैं.

क्या फायदे हैं इसके

दूसरे देश के फटे में टांग अड़ाने से वैसे तो सारे देश बचते हैं लेकिन चुनाव अलग मुद्दा है. इसमें जो सरकार चुनकर आती है, उसकी फॉरेन पॉलिसी सिर्फ उसे ही नहीं, पड़ोसियों से लेकर दूर-दराज को भी प्रभावित करती है. वो किससे क्या आयात करेगा, क्या एक्सपोर्ट करेगा, किसका साथ देगा, या किसका विरोध करेगा, ये सारी बातें इसपर तय करती हैं कि वहां सेंटर में कौन बैठा है. ये वैसा ही है, जैसे पावर सेंटर पर किसी दोस्त का होना.

तनावपूर्ण रिश्तों वाले देशों में भी कोई न कोई पार्टी ऐसी होती है, जो विरोधियों से साठगांठ कर ले. यही कारण है कि बहुत से ताकतवर देश, अपने पड़ोसियों, दुश्मन देशों से लेकर लगभग सभी के चुनावों पर खास नजर रखते हैं. हमारे यहां कौन पीएम बन रहा है, इसका अमेरिका के लिए भी मोल है, और चीन के लिए भी.

किन तरीकों से चुनाव में लगती हैं सेंध

इसमें सबसे ऊपर है इंफॉर्मेशन मैनिपुलेशन. इसके तहत सूचनाओं से छेड़छाड़ करके उसे किसी एक पार्टी के पक्ष, और दूसरे के खिलाफ माहौल बनाया जाता है. टूलकिट जैसे टर्म इसी का हिस्सा हैं. इसके तहत किसी एक सरकार को निकम्मा या घूसखोर बताया जाता है. वोटर अगर कम जानकार है तो उसे गलत बातों से तुरंत प्रभावित किया जा सकता है. कुल मिलाकर भ्रम पैदा करके अपने पक्ष में माहौल बनाया जाता है. बहुत से फेक अकाउंट बन जाते हैं, जो ट्रोलिंग करते या फेक न्यूज को फैलाते रहते हैं.

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
bjp-aap

सीएम केजरीवाल के ‘लक्ष्मी-गणेश’ पर बीजेपी का काउंटर प्लान, किया ये बड़ा ऐलान?

October 29, 2022
Nishikant Dubey

निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट पर क्या कहा जिससे मचा हंगामा, बीजेपी ने किया किनारा ?

April 20, 2025
Ganesh Joshi and MP Ramesh Pokhriyal

कृषि मंत्री गणेश जोशी और सांसद रमेश पोखरियाल ने किया ‘कैलाश गंगा’ का उद्घाटन

September 26, 2023
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • नागरिकता पर कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा, BJP ने किया पलटवार!
  • निर्जला एकादशी का व्रत कैसे करें? जानें व्रत के नियम    
  • दिल्ली को बाढ़ से बचाने के लिए रेखा सरकार ने कसी कमर, ऐसा है पूरा प्लान

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.