शिमला. बीते वर्ष मानसून ने हिमाचल प्रदेश में भयानक तबाही मचाई थी, लेकिन इस वर्ष लोगों को मानसून से राहत मिलने की उम्मीद है. इस वर्ष का मानसून बेहतर होने वाला है. पूर्वानुमान के अनुसार, इस वर्ष का मानसून बेहतर रहेगा और आगामी एक सप्ताह में हिमाचल में प्रवेश कर सकता है.
मौजूदा समय में मानसून महाराष्ट्र से होते हुए और गुजरात के दक्षिणी तटों पर प्रवेश कर चुका है. इसमें यदि कोई विशेष परिवर्तन नहीं होता है तो मानसून हिमाचल में भी समय पर प्रवेश करेगा. कभी कभी विशेष परिवर्तन से मानसून के पहुंचने में देरी हो जाती है, लेकिन पूर्वानुमान के अनुसार ऐसा कोई भी विशेष परिवर्तन नहीं दिख रहा है. मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक सुरेंद्र पॉल ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि पूर्वानुमान के अनुसार 22 से 23 जून तक मानसून हिमाचल प्रदेश में प्रवेश कर सकता है. इस वर्ष का मानसून बेहतर रहेगा और लोगों को राहत मिलने की भी उम्मीद है.
बीते वर्ष के मानसून ने क्यों मचाई तबाही
बीते वर्ष के मानसून ने भयानक तबाही मचाई थी. बीते वर्ष मानसून पर पश्चिमी विक्षोभ का बहुत ज्यादा प्रभाव देखने को मिला. मानसून और पश्चिमी विक्षोभ के आपस में मिलने से बहुत ज्यादा बारिशें होती हैं. इतिहास में जब जब ऐसा देखने को मिला है तब तब भूस्खलन, बाढ़, कैचमेंट एरिया में ज्यादा बरिशें होना आदि घटनाएं देखने को मिली हैं. हालांकि पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव अमूमन मानसून पर देखने को मिलता है, लेकिन बीते वर्ष जुलाई, अगस्त और सितंबर महीने में इसका बहुत ज्यादा प्रभाव देखने को मिला था, जिससे भयानक तबाही का मंजर प्रदेश में देखने को मिला था. इस वर्ष भी पश्चिमी विक्षोभ का मानसून से मिलना संभव है और नदी नालों के आसपास के क्षेत्रों में भी नुकसान होने की आशंका है.
6 से 7 महीने लगातार बारिश होना आपदा का मुख्य कारण
हर वर्ष मानसून का स्वरूप अलग होता है. बीते वर्ष मार्च, अप्रैल, मई, जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर माह में बहुत ज्यादा बारिशें हुई थी. करीब 6 से 7 महीने लगातार बारिशें होना भी हिमाचल की आपदा का मुख्य कारण रहा था. इतने महीनों तक लगातार बारिशें होने से भूस्खलन, बाढ़ आदि देखने को मिले थे. वहीं इस वर्ष मार्च अप्रैल और मई में कम बारिशें हुई है, जिससे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है. हालांकि मानसून के बेहतर होने का यह तात्पर्य नहीं है कि इस वर्ष भूस्खलन, नदियों में जल स्तर बढ़ना या अन्य घटनाएं नहीं होंगी. इस वर्ष भी यह सब देखने को मिलेगा, लेकिन बीते वर्ष के मुकाबले बहुत कम होगा.







