अयोध्या: लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणाम बेहद चौंकाने वाले थे। 80 लोकसभा सीटों वाले इस राज्य में समाजवादी पार्टी को 37 तो बीजेपी को 33 सीटें मिली। बाकी पार्टियां दोहरे अंक में भी सीटें पाने में नाकाम रही। इन सब के बीच जिस चीज की सबसे अधिक चर्चा हुई वो थी अयोध्या जो फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है, से बीजेपी प्रत्याशी की हार।
दुर्भाग्य से हमारे देश में जिस क्षेत्र से सत्ताधारी पार्टी चुनाव जीतती है वहां विकास तेजी से होता है। वहीं, अन्य जगहों पर विकास की रफ्तार थोड़ी कम हो जाती है। अब लोगों के मन में अयोध्या को लेकर भी ऐसे ही सवाल उठ रहे हैं। दरअसल, राम मंदिर के निर्माण के बाद सभी को ऐसा लग रहा था कि फैजाबाद (अयोध्या इसी लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है) से बीजेपी की जीत निश्चित है। लेकिन नतीजे कुछ और ही थे।
क्या था माता सीता का श्राप?
लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद से ही लोग अयोध्या और माता सीता के श्राप की चर्चा कर रहे हैं। पौराणिक कथाओं और किवदंतियों के अनुसार जब लोगों की बातों में आकर श्री राम ने अपनी पत्नी, माता सीता को राज्य से निकाल दिया था तब माता सीता ने अयोध्या को श्राप दिया था। मान्यता है कि माता सीता के श्राप के कारण ही कभी भी अयोध्या में तेजी से विकास नहीं होता।
प्रशासन को मिले 100 से ज्यादा 5 सितारा होटल के आवेदन
अयोध्या, जहां कुछ वक्त पहले तक कोई ठीक-ठाक होटल भी नहीं था वहां राम मंदिर के निर्माण के बाद फाइव स्टार होटल बनाने की परमिशन मांगने वालों की लाइन लग गई है। अयोध्या में फाइव स्टार होटल बनाने की अनुमति मांगने के लिए 100 से ज्यादा आवेदन प्रशासन को मिले हैं।
अयोध्या की जनता का नहीं बैठता अपने शासक के साथ तालमेल!
मान्यताओं के अनुसार श्री राम ने अयोध्या किसी को नहीं दी। अपने दोनों पुत्रों में से कुश को कसूर (पंजाब) और लव को लाहौर में राज्य की स्थापना करने का आदेश दिया। छोटे भाई शत्रुघ्न के पुत्रों को मथुरा तो लक्ष्मण के पुत्रों को लखनऊ का क्षेत्र दिया।
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान राम अयोध्या की जनता और उसके सभी प्राणियों यहां तक की पशु पक्षियों को भी अपने साथ ब्रह्मलोक ले गए। श्री राम के ब्रह्मलोक जाने के बाद अयोध्या वीरान हो गई। मान्यता है कि अयोध्या की देवी ने खुद कुश के पास जा कर अयोध्या को फिर से बसाने की प्रार्थना की थी। अयोध्या बसी तो मगर वैसी नहीं रह गई जैसी श्री राम के वक्त में थी।
मान्यताओं के अनुसार अयोध्या की जनता का अपने शासकों के साथ तालमेल कम होता है। अयोध्या की जनता ने राम के पूर्वज, राजा सागर के पुत्र असमंजस को राज्य से निकालने के लिए विवश कर दिया था। कहा जाता है कि असमंजस अयोध्या के बच्चों को सरयू में डूबो कर मार डालता था।
अयोध्या ने राजा दशरथ के राम को वनवास पर भेजे जाने के फैसले का विरोध किया था और अपने शासक की आज्ञा के विरुद्ध राम के साथ चल पड़ी थी। अयोध्या की जनता ने सीता की पवित्रता पर सवाल उठाकर उनकी अग्नि-परीक्षा सुनिश्चित करवाई थी। ये सब उदाहरण हैं कि जब जो अयोध्या की गद्दी पर होता है यहां के जनता कि उनसे कम बनती है।







