नई दिल्ली: सात राज्यों की 13 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में इंडिया ब्लॉक का पलड़ा बहुत ही भारी रहा है। विपक्षी गठबंधन ने इनमें से 10 सीटें जीत ली हैं। इनमें से कांग्रेस को चार सीटें मिली हैं और वह बहुत ही उत्साहित है। लेकिन, पंजाब में पार्टी के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई है।
पंजाब में लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के शानदार प्रदर्शन के 6 हफ्ते बाद ही हुए जालंधर पश्चिम विधानसभा उपचुनाव में पार्टी सिर्फ हारी ही नहीं है, बल्कि वह भारतीय जनता पार्टी से भी पिछड़ गई है।
उपचुनावों में जीत पर बहुत ज्यादा गदगद हैं राहुल गांधी
सात राज्यों की 13 विधानसभा सीटों पर जो चुनाव परिणाम आए हैं, उसमें इंडिया ब्लॉक (पंजाब और बंगाल में गठबंधन नहीं) और खासकर कांग्रेस के प्रदर्शन से कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कितने गदगद हुए हैं, वह एक्स पर उनकी एक पोस्ट से पता चलता है।
राहुल ने उपचुनाव परिणाम देखने पर लिखा था,”7 राज्यों में हुए उपचुनाव के नतीजों ने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा द्वारा बुना गया ‘भय और भ्रम’ का जाल टूट चुका है।”
पंजाब में इतनी जल्दी क्यों खिसक गई कांग्रेस की सियासी जमीन?
लेकिन, अगर पंजाब की जालंधर पश्चिम विधानसभा उपचुनाव के नतीजों को देखें तो साफ हो जाता है कि राहुल जो दावे कर रहे हैं, जमीनी हकीकत पूरी तरह से वैसी नहीं है। एक तरह से यहां वोटरों ने लोकसभा चुनाव का परिणाम ही उल्टा-पुल्टा कर दिया है।
जालंधर विधानसभा उपचुनाव में तीसरे स्थान पर रही कांग्रेस
पंजाब की 13 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस को 7 सीटें मिली थीं और सत्ताधारी आम आदमी पार्टी को सिर्फ 3 सीटें प्राप्त हुई थी। बीजेपी का तो खाता भी नहीं खुल पाया। कांग्रेस जालंधर लोकसभा सीट भी जीती थी। लेकिन, इसके तहत आने वाली जालंधर पश्चिम सीट पर विधानसभा उपचुनाव में पार्टी तीसरे स्थान पर खिसक गई है।
जालंधर पश्चिम में बीजेपी से भी पिछड़ गई कांग्रेस
सिर्फ 6 हफ्तों में लोकसभा चुनावों के मुकाबले जालंधर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में आम आदमी पार्टी न सिर्फ चुनाव जीत गई है, बल्कि उसके वोट शेयर में चार गुना बढ़ोतरी हुई है। इस सीट पर पार्टी के उम्मीदवार मोहिंदर भगत को 55,246 (58.39%) वोट मिले हैं। वहीं कांग्रेस की सुरिंदर कौर मात्र 16,757 वोट लेकर तीसरी नंबर पर रही हैं।
खूब किया प्रचार फिर क्यों हुआ कांग्रेस का ऐसा हाल?
जालंधर पश्चिम विधानसभा सीट पर बीजेपी के शीतल अंगुराल को 17,921 वोट मिले हैं और वह दूसरे स्थान पर रहे हैं। जबकि, जालंधर पश्चिम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंकी थी। पूर्व मुख्यमंत्री और स्थानीय सांसद चरणजीत सिंह चन्नी खुद इसकी अगुवाई कर रहे थे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग और प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह वाजवा ने भी यहां जमकर प्रचार किया था, लेकिन वे भी ‘आप’ को जीतने से और बीजेपी को दूसरे नंबर पर आने से नहीं रोक सके।
हार कर भी क्योंक खुश हो रही है बीजेपी?
यहां बीजेपी भले ही आम आदमी पार्टी से बहुत दूर दूसरे नंबर पर रही है, लेकिन उसे इस बात का संतोष है कि उसने कांग्रेस को पछाड़ दिया है। केंद्रीय रेल राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिटट्ू इस चुनाव परिणाम को पंजाब कांग्रेस के लिए ‘शर्मनाक’ बताया है।
उनके मुताबिक जालंधर लोकसभा सीट जीतने के दो हफ्ते बाद ही कांग्रेस ने लोगों का भरोसा खो दिया था। उनका दावा है कि बीजेपी प्रत्याशी शीतल अंगुराल को चुनाव अभियान के दौरान आम आधी पार्टी ने ‘धमकाया’ और पार्टी के वोटरों को भी ‘धमकियां दी गईं।’
उन्होंने सत्ताधारी पार्टी पर चुनावी मशीनरी का दुरुपयोग करके चुनाव जीतने का आरोप लगाया है और कहा है कि अगले विधानसभा चुनावों में बीजेपी और मजबूत होकर उभरेगी।







