Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

भारत के लिए वैश्विक स्तर पर बदल रहे हैं राजनैतिक एवं रणनीतिक समीकरण

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
November 5, 2024
in राष्ट्रीय, विशेष
A A
India
14
SHARES
452
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

प्रहलाद सबनानी


नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर आज परिस्थितियां, विशेष रूप से राजनैतिक, रणनीतिक एवं आर्थिक क्षेत्र में, तेजी से बदल रही हैं। नए नए समीकरण बनते हुए दिखाई दे रहे हैं। जी-7, जी-20 एवं नाटो के सामने ब्रिक्स अपने पांव पसारता नजर आ रहा है। अमेरिका के साथ साथ यूरोपीयन देश अपनी चमक खो रहे हैं। इन देशों को विकसित देश तो कहा ही जाता रहा हैं, साथ ही, वैश्विक स्तर पर कई संगठनों को खड़ा करने में इन देशों की महत्वपूर्ण भूमिका भी रही है और इन संगठनों की मदद से इन देशों का दबदबा भी पूरे विश्व में कायम रहता आया है।

इन्हें भी पढ़े

pm modi

‘रील युग’ में रह रहे युवा ‘शॉर्टकट’ से दूर रहें : पीएम मोदी

August 12, 2026
loksabha

अब ‘वंदे मातरम्’ का अपमान करना होगा अपराध, तीन साल की जेल और होगा जुर्माना

August 12, 2026
air taxis and cars

भारत के आसमान में उड़ेंगी इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी और कारें, जानें सभी डिटेल्स

August 12, 2026
Gold

भारतीय घरों की तिजोरियों में बंद गोल्ड से क्यों परेशान है सरकार, जानें

August 12, 2026
Load More

यूनाइटेड नेशनस, विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, नाटो, फाइव आइज, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन, अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन, जी-7 एवं जी-20 जैसे अन्य कई संगठनों के माध्यम पूरे विश्व में ही लगभग प्रत्येक क्षेत्र को यह विकसित देश प्रभावित एवं नियंत्रित करते रहे हैं। परंतु, आज दक्षिणी अफ्रीकी उपमहाद्वीप के देशों, मध्य एशिया में अरब देशों एवं भारतीय उपमहाद्वीप स्थित देशों ने उक्त संगठनों में सुधार कार्यक्रम लागू करने के लिए आवाज उठाना शुरू कर दिया है। उक्त वर्णित लगभग समस्त अंतरराष्ट्रीय संगठनों की स्थापना 1900-2000 शताब्दी में की गई थी। इतने लम्बे अंतराल के बाद भी विश्व के अन्य देशों को इन संगठनों में महत्वपूर्ण भूमिका प्रदान नहीं की गई है। कुल मिलाकर, अमेरिका एवं यूरोपीयन देशों का दबदबा इन संगठनों की स्थापना के बाद से ही लगातार कायम रहा है।

भारत सदैव से ही एक शांतिप्रिय देश रहा है और वसुधैव कुटुम्बकम की भावना में विश्वास करता आया है। इन्हीं कारणों के चलते भारत के लगभग समस्त देशों से अच्छे सम्बंध रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध में रूस और यूक्रेन दोनों ही देश युद्ध को समाप्त करने में भारत की मदद चाहते हैं तो उधर इजराईल-हमास/लेबनान/ईरान युद्ध में ये समस्त देश भी युद्ध को समाप्त करने में भारत की मदद चाहते हैं। दूसरी ओर, ग्लोबल साउथ सहित कई अफ्रीकी देश भी आज भारत का नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार हैं।

इन परिस्थितियों के बीच वैश्विक स्तर पर यह मांग बहुत जोर पकड़ती जा रही है कि भारत को यूनाइटेड नेशन्स की सुरक्षा समिति में स्थाई सदस्यता प्रदान की जाए। परंतु रूस, अमेरिका, फ्रांन्स एवं अन्य वीटो प्राप्त देशों द्वारा भारत का समर्थन किए जाने के बावजूद यह कार्य सम्पन्न नहीं हो पा रहा है क्योंकि चीन नहीं चाहता कि भारत सुरक्षा समिति का स्थाई सदस्य बने और वीटो प्राप्त करने का अधिकारी बने।

उक्त संगठनों के इत्तर हाल ही में सम्पन्न हुई ब्रिक्स समूह देशों की बैठक में रूस, भारत एवं चीन की तिकड़ी बनती हुई दिखाई दे रही है। इस तिकड़ी द्वारा ब्रिक्स समूह की बैठक में लिए गए कुछ निर्णयों के चलते यदि भारत, रूस एवं चीन के बीच बदलते राजनीतिक एवं रणनीतिक सम्बंध इसी प्रकार आगे बढ़ते हैं तो इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर रणनीतिक, आर्थिक एवं राजनैतिक क्षेत्र पर भी पड़ेगा और आगे आने वाले दिनों में भारत के आर्थिक परिदृश्य में भी व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे। आज विदेशी व्यापार के मामले में अमेरिकी का भारत के साथ सबसे अधिक व्यापार होता है। दूसरे स्थान पर चीन है।

विशेष रूप से कोविड महामारी के बाद से भारत द्वारा किए जाने वाले तेल के आयात में, रूस से तेल के आयात में बहुत अधिक वृद्धि दर्ज हुई है इससे रूस के साथ भी भारत का विदेशी व्यापार तेजी से आगे बढ़ा है। इसके पूर्व तक भारत का विदेशी व्यापार यूरोपीयन देशों एवं अमेरिका के साथ ही अधिक मात्रा में होता आया है, परंतु हाल ही समय में इसमें कुछ परिवर्तन होता हुआ दिखाई दे रहा है क्योंकि एक तो यूरोपीयन देशों की आर्थिक वृद्धि दर कम हो रही है और दूसरे भारत को अपने विदेशी व्यापार में वृद्धि करने हेतु अब नए बाजार की तलाश करना आवश्यक हो गया है।

दक्षिणी अफ्रीकी देश, मध्य एशिया के अरब देश, भारतीय उपमहाद्वीप में स्थित देश एवं चीन आदि देशों के रूप में भारत के उत्पादों के लिए एक बड़ा बाजार खड़ा हो सकता है। इस प्रकार, चीन के साथ हुए हाल ही के समझौते से केवल दोनों देशों के बॉर्डर पर ही शांति स्थापित नहीं होगी बल्कि चीन सहित अन्य पड़ौसी देशों के साथ भी भारत के सम्बंध सुधर सकते हैं। अतः भारत, रूस एवं चीन की दोस्ती यदि इसी प्रकार मजबूत होना आगे भी जारी रहती है तो पश्चिमी देशों का दबदबा अब विश्व में कम हो सकता है।

भारत की नीतियों के चलते भारत के विचारों को विश्व के समस्त देश अब गम्भीरता से लेने लगे हैं। भारत वैसे भी विश्व मित्र की भूमिका का निर्वहन करना चाहता है। भारत के आज विश्व के समस्त प्रभावशाली देशों के साथ प्रगाढ़ सम्बंध है। हां, कुछ देशों जैसे चीन के साथ कुछ मुद्दे हैं, जिन्हें सुलझाना शेष हैं परंतु भारत की संघर्ष जैसी स्थिति किसी भी देश के साथ नहीं है। कुछ देशों के साथ हमारी प्रतिस्पर्धा जरूर है परंतु शत्रुता नहीं है।

अभी हाल ही में जून 2024 माह में भारत के प्रधानमंत्री ने इटली में जी-7 देशों के सम्मेलन में भाग लिया था, जुलाई 2024 माह में प्रधानमंत्री रूस में थे एवं रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन के साथ यूक्रेन युद्ध को हल करने एवं अन्य विषयों पर महत्वपूर्ण चर्चा में व्यस्त रहे। अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री यूक्रेन में पहुंचे एवं यूक्रेन के रूस के साथ युद्ध को हल करने सम्बंधी प्रयासों को गति देने का प्रयास किया। सितम्बर 2024 में प्रधानमंत्री अमेरिका पहुंचें एवं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ मुलाकात की एवं क्वाड सम्मेलन में जापान, आस्ट्रेलिया, एवं अमेरिका सहित भाग लिया। भारत के प्रधानमंत्री अक्टोबर 2024 में पुनः रूस में ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे।

अक्टोबर माह में ही जर्मन के चांन्सलर भारत में पधारे। देखिए, विश्व के मई महत्वपूर्ण मंचों पर आज भारत अपनी उपस्थिति मजबूत तरीके से दर्ज कराता हुआ दिखाई दे रहा है। जी-7, क्वाड एवं ब्रिक्स सभी सम्मेलनों में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका स्पष्टतः दिखाई दे रही है। आज विश्व के समस्त प्रभावशाली देश भारत के साथ अपने सम्बन्धों को प्रगाढ़ करना चाहते हैं क्योंकि भारत का आर्थिक विकास तेज गति से आगे बढ़ रहा है, तेज गति से हो रही इस आर्थिक प्रगति के कारण भारत में विभिन्न उत्पादों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है और भारत पूरे विश्व में एक बहुत बड़े बाजार के रूप में विकसित हो रहा है तथा ये देश भारत में अपने विभिन्न उत्पादों के निर्यात को बढ़ाना चाहते हैं। दूसरे, भारत में कुशल एवं युवा नागरिकों की पर्याप्त उपलब्धता है जिसका उपयोग विश्व के अन्य देश भी करना चाहते हैं। तीसरे, भारत आज विश्व के शक्तिशाली देशों की सूची में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है एवं सुरक्षा की दृष्टि से भी बहुत शक्तिशाली देश बन गया है, भारत ने बहुत अच्छे स्तर पर अपनी मिलिटरी क्षमता को विकसित किया है।

चीन की विस्तारवादी नीतियों के चलते अपने लगभग समस्त पड़ौसी देशों के साथ सम्बंध अच्छे नहीं है, साथ ही कोविड महामारी के दौरान चीन का व्यवहार विश्व के अन्य देशों के साथ ठीक नहीं रहा है, सप्लाई चैन पर आधारित कम्पनियों में समस्या खड़ी हुई थी जिससे लगभग पूरे विश्व में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर विपरीत प्रभाव पड़ा था। अतः विशेष रूप से विकसित देशों ने चीन+1 की नीति का अनुसरण करना प्रारम्भ किया है जिसका सबसे अधिक लाभ भारत को होने जा रहा है और ये देश भारत में अपने निवेश को बढ़ा रहे हैं एवं भारत में अपनी विनिर्माण इकाईयों की स्थापना कर रहे हैं। उक्त कारणों के अतिरिक्त, भारत में स्थिर लोकतंत्र, स्थिर आर्थिक व्यवस्था, स्थिर सरकार एवं भारत के एक शांतिप्रिय देश होने के चलते भी अन्य देशों से निवेशक आज भारत की आकर्षित हो रहे हैं। इस प्रकार आज विश्व के लगभग समस्त शंक्तिशाली देश भारत के साथ मजबूत सम्बंध स्थापित करने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

भारत ने भी पिछले वर्ष, अपनी अध्यक्षता में, जी-20 समूह में कुछ अफ्रीकी देशों को शामिल कर अफ्रीकी महाद्वीप के समस्त देशों को प्रभावित करने में सफलता प्राप्त की थी। इन देशों पर इसका बहुत अच्छा असर भी हुआ था। भारत आज विश्व के कई समूहों में अन्य देशों की बीच सेतु के रूप में उभर रहा है। जी-7 से लेकर ब्रिक्स देशों के समूहों में भारत उपस्थित है, रूस एवं यूक्रेन दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त करने में भारत प्रभावशाली भूमिका निभा सकने की स्थिति में हैं। इसी प्रकार, इजराईल एवं ईरान के बीच भी मध्यस्थता की भूमिका निभाने को भारत तैयार है। भारत को विश्व के लगभग समस्त देशों के साथ अपने मजबूत होते रिश्तों को भारत के विदेश व्यापार में वृद्धि करने के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
Lieutenant Vinay killed

Pahalgam Attack: आतंकी हमले में मारे गए लेफ्टिनेंट विनय, छह दिन पहले हुई थी शादी, दादा की भावुक अपील!

April 23, 2025
Dhami

प्रकृति को जोड़ने का घोड़ा लाइब्रेरी का प्रयास अत्यंत सराहनीय : CM धामी

December 29, 2025

दिल्ली : इन क्षेत्रों में 15 दिनों में ख़त्म होगी सीवर जाम की समस्या, लोगों को मिलेगी राहत

February 14, 2024
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • ‘रील युग’ में रह रहे युवा ‘शॉर्टकट’ से दूर रहें : पीएम मोदी
  • विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग, सच्ची श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना से मिलती है जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति
  • अब ‘वंदे मातरम्’ का अपमान करना होगा अपराध, तीन साल की जेल और होगा जुर्माना

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.