मुंबई: महाराष्ट्र सरकार की कमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथ में आते ही उन्होंने कई हैरान करने वाले फैसले लिए. अब उन्होंने अपनी ही सहयोगी और पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए बड़े फैसले पर रोक लगाकर विपक्ष को हमला करने का एक और मौका दे दिया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पूर्व की एकनाथ शिंदे सरकार के बस किराए पर लेने के फैसले पर रोक लगा दी है. सीएम फडणवीस ने इस फैसले की समीक्षा की और उसके बाद इसे फिलहाल रोकने का निर्णय लिया. हालांकि, यह साफ नहीं है कि वे शिंदे सरकार के अन्य फैसलों की भी समीक्षा करेंगे या नहीं. विपक्ष ने इस फैसले को लेकर घोटाले के आरोप लगाए हैं.
विपक्ष ने उठाए सवाल
विधानसभा में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने इस फैसले में गड़बड़ी का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि 1,310 बसों को किराए पर लेने के लिए जो राशि तय की गई थी, उसमें बड़ा अंतर है. दानवे के मुताबिक, 2022 में प्रति किलोमीटर बस किराए पर लेने की दर 44 रुपये थी, जिसमें तेल भी शामिल था. लेकिन नई योजना में यह दर बिना तेल के 34.7 रुपये से 35.1 रुपये प्रति किलोमीटर तय की गई. अगर तेल के साथ इसे जोड़ा जाए तो यह दर 56-57 रुपये प्रति किलोमीटर तक पहुंच सकती है. दानवे ने इसे एक बड़ा घोटाला बताया.
किन रूट्स पर चलनी थीं बसें?
यह बसें मुंबई-पुणे, नासिक-छत्रपति संभाजी नगर और नागपुर-अमरावती जैसे प्रमुख रूट्स पर चलाई जानी थीं. सितंबर 2024 में शिंदे गुट के विधायक भरत गोगावले को महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) का अध्यक्ष बनाया गया था. इसके बाद तीन प्राइवेट कंपनियों के साथ एक समझौता किया गया था. इसी समझौते को लेकर विवाद हुआ और अब मुख्यमंत्री ने इस पर रोक लगा दी है.
बीजेपी का क्या है रुख ?
इस मामले में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और रेवेन्यू मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि मुख्यमंत्री फडणवीस किसी प्रोजेक्ट को रोकने के पक्ष में नहीं हैं. लेकिन अगर किसी योजना में गड़बड़ी की आशंका हो तो उसकी समीक्षा करना जरूरी है. अगर कोई कमी पाई जाती है तो उसे सुधारने का काम किया जाएगा, और अगर सब कुछ सही हुआ तो योजना को हरी झंडी दी जाएगी.







