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Home राष्ट्रीय

रेपो दर में कमी के साथ ही भारत में ब्याज दरों के नीचे जाने का चक्र प्रारंभ!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
February 8, 2025
in राष्ट्रीय, विशेष, व्यापार
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प्रहलाद सबनानी


नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री संजय मल्होत्रा ने अपने कार्यकाल की प्रथम मुद्रानीति दिनांक 7 फरवरी 2025 को घोषित की। अभी तक प्रत्येक दो माह के अंतराल पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा घोषित की गई मुद्रा नीति के माध्यम से लिए गए निर्णयों का देश में मुद्रा स्फीति को नियंत्रण में रखने में विशेष योगदान रहा है। हालांकि पिछले लगभग 5 वर्षों में रेपो दर में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है। मई 2020 में अंतिम बार रेपो दर में वृद्धि की घोषणा की गई थी। इसके बाद घोषित की गई 29 मुद्रा नीतियों में रेपो दर को स्थिर रखा गया है और यह अभी भी 6.5 प्रतिशत के स्तर पर कायम है। परंतु,अब फरवरी 2025 माह में घोषित की गई मुद्रा नीति में रेपो दर में 25 आधार बिंदुओं की कमी करते हुए इसे 6.50 प्रतिशत से 6.25 प्रतिशत पर लाया गया है।

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केंद्र सरकार द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक को देश में मुद्रा स्फीति की दर को नियंत्रण में रखने हेतु मेंडेट दिया गया है और इस मेंडेट पर ध्यान रखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने देश में मुद्रा स्फीति को नियंत्रण में रखने में सफलता भी पाई है। परंतु, वित्तीय वर्ष 2024-25 के प्रथम एवं द्वितीय तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर घटकर 5.2 प्रतिशत एवं 5.4 प्रतिशत के निचले स्तर पर आ गई थी, जबकि वित्तीय वर्ष 2023-24 में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत की रही थी। अतः देश में आर्थिक विकास की दर पर भी अब विशेष ध्यान देने की आवश्यकता प्रतिपादित हो रही थी, इसीलिए भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर में 25 आधार बिंदुओं में कमी की घोषणा की है। रेपो दर में कमी करने का उक्त निर्णय मुद्रानीति समिति के समस्त सदस्यों ने एकमत से लिया है।

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकलन के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-45 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर 6.4% की रहेगी और वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 6.7 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच जाएगी। इस वर्ष खरीफ की फसल बहुत अच्छे स्तर पर आई है एवं आगे आने वाली रबी की फसल भी ठीक रहेगी क्योंकि मानसून की बारिश अच्छी रही थी और देश के जलाशयों में, क्षमता के अनुसार, पर्याप्त पानी इन जलाशयों में उपलब्ध है, जिसे कृषि सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जा रहा है और जो अंततः कृषि की पैदावार को बढ़ाने में सहायक होगा। इससे ग्रामीण इलाकों में उत्पादों की मांग में वृद्धि देखी गई है। हालांकि शहरी इलाकों में उत्पादों की मांग में अभी भी सुधार दिखाई नहीं दिया है।

परंतु हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा मध्यमवर्गीय करदाताओं को आय कर में दी गई जबरदस्त छूट के चलते आगे आने वाले समय में शहरी क्षेत्रों में भी उत्पादों की मांग में वृद्धि दर्ज होगी और विनिर्माण क्षेत्र में कार्यरत औद्योगिक इकाईयों की उत्पादन वृद्धि दर तेज होगी। सेवा क्षेत्र तो लगातार अच्छा प्रदर्शन कर ही रहा है। प्रयागराज में आयोजित महाकुम्भ मेले में धार्मिक पर्यटन के चलते देश की अर्थव्यवस्था में लगभग 2 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त योगदान होने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है। इस प्रकार, भारत की आर्थिक विकास दर के वित्तीय वर्ष 2023-24 में लगभग 7 प्रतिशत एवं वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 8 प्रतिशत रहने के प्रबल सम्भावना बनती है। भारतीय रिजर्व बैंक का आंकलन उक्त संदर्भ में कम ही कहा जाना चाहिए।

इसी प्रकार मुद्रा स्फीति के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमान के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई की दर वित्तीय वर्ष 2024-25 में 4.8 प्रतिशत एवं वित्तीय वर्ष 2025-26 में घटकर 4.2 प्रतिशत रह सकती है। भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई की दर मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों के महंगे होने के चलते ही बढ़ती है, जिसे ब्याज दरों को बढ़ाकर नियंत्रण में नहीं लाया जा सकता है। हेडलाइन मुद्रा स्फीति की दर अक्टूबर 2024 में अपने उच्चत्तम स्तर पर पहुंच गई थी परंतु उसके बाद से लगातार नीचे ही आती रही है। इसी प्रकार, कोर मुद्रा स्फीति की दर भी लगातार नियंत्रण में बनी रही है। केवल खाद्य पदार्थों में के महंगे होने के चलते उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई पर दबाव जरूर बना रहा है।

इस प्रकार महंगाई दर के नियंत्रण में आने से अब भारत में ब्याज दरों में कमी का दौर प्रारम्भ हो गया है। आगे आने वाले समय में भी भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में कमी की घोषणा की जाती रहेगी ऐसी सम्भावना व्यक्त की जा रही है और दिसम्बर 2025 तक रेपो दर में लगभग 100 आधार बिंदुओं की कमी की जा सकती है और रेपो दर घटकर 5.25 प्रतिशत तक नीचे आ सकती है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक का कहना है कि देश में आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर रेपो दर में परिवर्तन के बारे में समय समय पर विचार किया जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने नीति उद्देश्य को भी निष्पक्ष रखा है परंतु चूंकि ब्याज दरों में अब कमी करने का चक्र प्रारम्भ हो चुका है अतः इसे उदार रखा जा सकता था। इसका आश्य यह है कि आगे आने वाले समय में भी रेपो दर में कमी की सम्भावना बनी रहेगी।

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में की गई कमी की घोषणा के बाद अब विभिन्न बैकों को ऋणराशि पर ब्याज दरों को कम करते हुए ऋणदाताओं को लाभ पहुंचाने के बारे में शीघ्रता से विचार करना चाहिए जिससे आम नागरिकों द्वारा बैकों को अदा की जाने वाली किश्तों एवं ब्याज राशि में कुछ राहत महसूस हो सके। इससे अर्थव्यवस्था में भी कुछ गति आने की सम्भावना बढ़ेगी।

दिसम्बर 2024 माह में देश में तरलता में कुछ कमी महसूस की जा रही थी और बैकों के पास ऋण प्रदान करने योग्य फंड्ज की कमी महसूस की जा रही थी। भारतीय रिजर्व बैंक ने तुरंत निर्णय लेते हुए आरक्षित नकदी अनुपात (CRR) को 4.5 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया था, जिससे बैकों की तरलता की स्थिति में कुछ सुधार दृष्टिगोचर हुआ था। बैकों के लिए इसे अधिक सरल बनाने की दृष्टि से जनवरी 2025 में भी भारतीय रिजर्व बैंक ने लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपए बांड्ज विभिन्न बैकों से खरीदे थे ताकि इन बैकों की तरलता की स्थिति में और अधिक सुधार किया जा सके और बैकिंग सिस्टम में तरलता की वृद्धि की जा सके। उक्त वर्णित उपायों का परिणाम यह है कि आज भारतीय बैकों का ऋण:जमा अनुपात 80.8 प्रतिशत के स्तर पर बना हुआ है और बैकों की लाभप्रदता में भी लगातार सुधार होता दिखाई दे रहा है। विभिन्न बैकों द्वारा अभी तक घोषित किए गए परिणामों के अनुसार, बैकों ने लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपए का लाभ घोषित किया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जरूर परिस्थितियां अभी भी अस्थिर बनी हुई हैं और वैश्विक स्तर पर रुपए पर दबाव बना हुआ है। अभी हाल ही में डॉलर इंडेक्स 109 के स्तर तक पहुंच गया था और 10 वर्षीय यू एस बांड यील्ड भी 4.75 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, इससे अन्य देशों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ता जा रहा है और आज अमेरिकी डॉलर के मुकाबले में रुपए की कीमत अपने निचले स्तर 87.66 पर पहुंच गई थी। परंतु, आगे आने वाले समय में अमेरिका में भी यदि ब्याज दरों में कमी की घोषणा होती है तो भारत में भी ब्याज दरों में कमी का चक्र और भी तेज हो सकता है। ब्रिटेन एवं कुछ अन्य यूरोपीयन देशों ने भी हाल ही के समय में ब्याज दरों में कमी की घोषणा की है। चूंकि अब कई देशों में मुद्रा स्फीति नियंत्रण में आ चुकी है अतः अब लगभग समस्त देश ब्याज दरों में कमी की घोषणा करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इससे अब आने वाले समय में इन देशों में आर्थिक विकास दर में कुछ तेजी आते हुए भी दिखाई देगी।

अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने के चलते अमेरिका के शेयर बाजार में केवल जनवरी 2025 माह में ही 15,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि निवेशकों द्वारा डाली गई है, जबकि भारत के शेयर बाजार से 2.50 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा निकाली गई है, इससे भी भारतीय रुपए पर दबाव बना हुआ है। परंतु भारतीय रिजर्व बैंक को शायद आभास है कि यह समस्या अस्थायी है एवं भारतीय कम्पनियों की लाभप्रदता में सुधार होते ही विदेशी संस्थागत निवेशक पुनः भारतीय शेयर बाजार में अपने निवेश को बढ़ाएंगे। अमेरिका एवं चीन के बीच छिड़े व्यापार युद्ध का प्रभाव भी भारत पर सकारात्मक रहने की सम्भावना है क्योंकि इससे यदि चीन से अमेरिका को निर्यात कम होते हैं तो सम्भव हैं कि भारत से अमेरिका को निर्यात बढ़ें। भारत से निर्यात बढ़ने पर भारतीय रुपए पर दबाव कम होने लगेगा, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक को भारत में रेपो दर को कम करने में और अधिक आसानी होगी।

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