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अखिलेश यादव के बयान पर धीरेंद्र शास्त्री का जवाब- “बोलने से रोटी पच रही तो भगवान करे पचती रहे” !

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 1, 2025
in राज्य
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अखिलेश यादव और बागेश्वर धाम
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प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर


नई दिल्ली: अखिलेश यादव और बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बीच विवाद उत्तर प्रदेश के इटावा में एक कथावाचक के साथ हुई मारपीट की घटना से शुरू हुआ। इस घटना के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कथावाचकों की फीस पर टिप्पणी की और बिना नाम लिए बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री पर निशाना साधा। अखिलेश ने कहा कि “कुछ कथावाचक 50 लाख रुपये तक की फीस लेते हैं और धीरेंद्र शास्त्री “अंडर टेबल” (गुप्त रूप से) पैसे लेते हैं। इस बयान से राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया।

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बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की प्रतिक्रिया

लगभग एक महीने की विदेश यात्रा के बाद मध्य प्रदेश के छतरपुर लौटे धीरेंद्र शास्त्री ने अखिलेश के बयान पर पलटवार किया। उन्होंने बिना नाम लिए कहा, “हमारे ऊपर टिप्पणी करने वालों की रोटी पच रही है, भगवान करें उनकी रोटी पचती रहे। हम तो सनातन के लिए जिएंगे और सनातन के लिए मरेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि वे कठिनाइयों और आलोचनाओं को सहन करके आगे बढ़े हैं और उनका उद्देश्य हिंदू धर्म और सनातन संस्कृति की सेवा करना है। शास्त्री ने इटावा की घटना को निंदनीय बताया और जातिवाद, क्षेत्रवाद व भाषावाद के आधार पर राजनीति करने की निंदा की।

इटावा कथावाचक मारपीट मामला

इटावा में एक कथावाचक के साथ मारपीट का मामला तब सामने आया जब उन पर अपनी जाति छिपाने और खुद को ब्राह्मण बताने का आरोप लगा। इस घटना ने जातिगत राजनीति को हवा दी, जिसके बाद अखिलेश यादव ने पीड़ित कथावाचक को सम्मानित किया और बीजेपी पर जातिगत राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “यह घटना सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने वाली है।”

अखिलेश पर बीजेपी का पलटवार !

बीजेपी ने अखिलेश के बयान को सनातन धर्म और साधु-संतों का अपमान करार दिया। बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि अखिलेश का बयान “मजहबी तुष्टिकरण” का हिस्सा है और इसका मकसद सनातन धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाना है। बीजेपी नेताओं ने इसे समाज को बांटने की कोशिश बताया और कहा कि अखिलेश की टिप्पणियां उनकी पार्टी को नुकसान पहुंचाएंगी।

धीरेंद्र शास्त्री ने अपने जवाब में यह भी उल्लेख किया कि “उनकी विदेश यात्रा का उद्देश्य विश्व भर के हिंदुओं को एकजुट करना था। उन्होंने फिजी में बागेश्वर मठ के लिए जमीन मिलने की बात कही और अपने कैंसर अस्पताल प्रोजेक्ट के लिए दान की अपील की। उन्होंने कहा कि दक्षिणा (दान) न लेने पर उनके जैसे सामाजिक कार्य कैसे होंगे।

राजनीति में जातिगत और धार्मिक मुद्दे !

यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातिगत और धार्मिक मुद्दों को उजागर करता है। अखिलेश यादव का बयान जहां बीजेपी पर हमले और कथावाचकों की फीस पर सवाल उठाने का प्रयास था, वहीं धीरेंद्र शास्त्री ने इसे सनातन धर्म पर हमले के रूप में लिया। बीजेपी ने इस मुद्दे को सपा के खिलाफ हथियार बनाया, इसे धार्मिक भावनाओं के खिलाफ और तुष्टिकरण की राजनीति से जोड़ा। इस बीच, सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा गरम रहा, जहां दोनों पक्षों के समर्थकों ने अपने-अपने तर्क दिए।

धार्मिक और जातिगत संवेदनशीलता

यह पूरा मामला इटावा की घटना से शुरू होकर धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक बहस में बदल गया। अखिलेश यादव ने कथावाचकों की फीस और धीरेंद्र शास्त्री पर टिप्पणी कर बीजेपी को घेरने की कोशिश की, लेकिन शास्त्री और बीजेपी ने इसे सनातन धर्म के अपमान से जोड़कर पलटवार किया। यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक और जातिगत संवेदनशीलता को दर्शाता है, जो भविष्य में भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।

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