- मासूमों की जान से खेलने की खुली छूट
- आरटीओ व ट्रैफिक पुलिस के पास नहीं कोई पुख्ता योजना
सतीश मुखिया
मथुरा। भारतीय कानून में यह स्पष्ट शब्दों में अंकित है कि निजी वाहन को व्यावसायिक वाहन के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता लेकिन जनपद में हजारों प्राइवेट गाड़ियों को स्कूल वैन के तौर पर चलाया जा रहा है। ये प्राइवेट स्कूल वैन बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ भी कर रही हैं, प्राइवेट कारों का कमर्शल इस्तेमाल भी हो रहा है और बड़ी संख्या में अवैध गाड़ियां लोगों को लाने-ले जाने का काम कर रही हैं।
भगवान श्री कृष्ण की नगरी में वैन चालकों की मनमानी से सड़क हादसे हो रहे हैं और कल ही आगरा में बच्चों के साथ एक हादसा होते-होते बचा जिसमे छुट्टी के समय एक स्कूली वैन नाले में गिर पड़ी और बच्चों को मामूली चोटे आई।चालकों की लापरवाही के कारण कई हादसों में पहले भी बच्चों की मौत भी हो चुकी है, लेकिन इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
मथुरा शहर की सभी निजी स्कूलों में अधिकतर निजी वैन का भरपूर इस्तेमाल हो रहा है और चालक नियम-कानून की धज्जियां उड़ा कर बच्चों की जान खतरे में डाल रहे हैं। यह बच्चे जिस निजी ईको वैन से स्कूल आते-जाते थे, उसमें सीएनजी का सिलेंडर लगा था। भीषण टक्कर के दौरान वैन पलटने से अगर सिलेंडर फट जाता और आग लग जाती तब हादसे की गंभीरता ज्यादा हो सकती थी।
यातायात पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि वैन में आरसी एक्ट के तहत अधिकतम 9 बच्चों को ही बैठाना चाहिए, लेकिन चालक नियम का उल्लंघन कर उसकी जगह 15 से अधिक बच्चे भी बैठाते हैं। पुलिस इनके खिलाफ आरसी एक्ट के तहत चालान करती है। हालांकि, इस एक्ट में महज 2000 रुपये ही जुर्माने का प्रावधान होने के कारण वे उसी समय चालान जमा कर वाहन छुड़ा लेते हैं।
इस धारा के तहत अगर यातायात पुलिस सख्त कार्रवाई करते हुए वैन जब्त कर लेती है, तब भी अगले दिन कोर्ट से वैन छूट जाती है।
अभिभावकों का कहना है कि लचर कानून के कारण चालक नियमों का पालन नहीं करते हैं और मनमानी कर बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। स्कूलों को चाहिए कि वे पर्याप्त बसों की व्यवस्था रखें। परिवहन शुल्क भी उतना ही रखें, जिसे मध्यम व निम्न मध्यम वर्ग भी वहन कर सकें।
पुलिस का कहना है कि आरसी एक्ट में संशोधन कर सख्त कानून बनाने की जरूरत है। ऐसा नियम हो ताकि इस धारा का उल्लंघन करने पर वैन को एक माह तक जब्त रखा जाए। जब तक सख्त कानून नहीं बनाया जाएगा। इस तरह के हादसे पर रोक नहीं लग पाएगी। वैन चालकों के पास कई स्कूलों के बच्चों की बुकिंग रहती है। अमूमन सभी स्कूलों के खुलने और छुट्टी होने का समय एक ही होता है, इसलिए चालक जल्दबाजी कर बारी-बारी से बच्चों को स्कूल पहुंचाने व वापस घर छोड़ने का काम करते हैं। वह तेज रफ्तार में वैन चलाते हैं, जिससे हादसे होते हैं।
स्कूल वाहनों के लिए सुप्रीम कोर्ट की यह है गाइडलाइन
- स्कूली वाहन का रंग पीला होना चाहिए।
- स्कूल का नाम व फोन नम्बर लिखा होना चाहिए।
- ड्राइवर-स्टाफ यूनिफॉर्म में हो।
- वैन में ड्राइवर सहित 8 से ज्यादा बच्चे नहीं बैठेंगे।
- स्कूल वैन गैस सिलेंडर से चलने वाली नहीं होगी।
- सभी वैन में फस्र्ट एड बॉक्स व फायर फाइटर लगे होंगे।







