Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राजनीति

महाराष्ट्र: ठाकरे बंधुओं का ‘मराठी वॉर’, खोई सियासी जमीन की तलाश में एकजुटता की नई कोशिश!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 7, 2025
in राजनीति, राज्य
A A
Uddhav-Raj
14
SHARES
477
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

विशेष डेस्क/मुंबई : ठाकरे परिवार, विशेष रूप से शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की राजनीतिक विरासत, महाराष्ट्र की राजनीति में दशकों तक प्रभावशाली रही। हालांकि, हाल के वर्षों में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के नेतृत्व में इस परिवार की सियासी जमीन खिसकने की प्रक्रिया कई कारकों के कारण स्पष्ट दिखाई देती है। ‘मराठी वॉर’ के रूप में सामने आया हालिया विवाद, खासकर हिंदी भाषा को स्कूलों में तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य करने के मुद्दे पर, ठाकरे बंधुओं की एकजुटता और उनकी खोई हुई जमीन को पुनः प्राप्त करने की कोशिश का हिस्सा है। आइए इसका पूरा विश्लेषण एग्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा से समझते हैं।

सियासी जमीन खिसकने के कारण 

इन्हें भी पढ़े

CM Rekha Gupta

जनसुनवाई में बोलीं CM रेखा गुप्ता, जनता के लिए हमेशा खुला है सरकार का दरवाजा

September 3, 2026
CM Dhami

खेल महाकुंभ 2026: CM धामी बोले- उत्तराखंड को बनाएंगे देश की ‘खेलभूमि’

September 3, 2026
idfc first bank fraud

IDFC First बैंक फ्रॉड : कौन हैं वो 6 IAS अधिकारी जिन्हें बनाया गया आरोपी?

September 3, 2026
haridwar kumbh mela

‘वेलकम’ नहीं ‘स्वागतम्’ से गूंजेगा कुंभ, हरिद्वार-ऋषिकेश बनेंगे संस्कृत नगरी

September 3, 2026
Load More

शिवसेना का विभाजन और एकनाथ शिंदे का उदय:2022 में शिवसेना में बड़ा विभाजन हुआ, जब एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ बगावत की। शिंदे ने शिवसेना के बड़े हिस्से को अपने साथ ले लिया, जिसमें कई विधायक और कार्यकर्ता शामिल थे। इसके परिणामस्वरूप उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को पार्टी का मूल नाम और चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ खोना पड़ा।

शिंदे गुट ने बीजेपी के साथ गठबंधन कर महाराष्ट्र में सत्ता हासिल की, जिससे उद्धव ठाकरे की सियासी ताकत को गहरा झटका लगा। 2024 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) का प्रदर्शन कमजोर रहा, केवल 20 सीटें जीत पाईं, जबकि शिंदे की शिवसेना और बीजेपी ने भारी जीत दर्ज की।

राज ठाकरे का अलगाव और मनसे की कमजोरी

2005 में राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़कर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) बनाई, क्योंकि उन्हें बालासाहेब ठाकरे द्वारा उद्धव को उत्तराधिकारी बनाए जाने से निराशा हुई। शुरू में एमएनएस ने 2009 के विधानसभा चुनाव में 13 सीटें जीतकर ‘मराठी माणूस’ के मुद्दे पर अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन 2014 में यह 2 सीटों और 2019 में 1 सीट पर सिमट गई। 2024 के चुनाव में एमएनएस का खाता भी नहीं खुला, और राज के बेटे अमित ठाकरे भी हार गए। राज ठाकरे की आक्रामक मराठी अस्मिता की राजनीति ने उन्हें युवाओं में लोकप्रिय बनाया, लेकिन यह वोटों में तब्दील नहीं हुई, जिससे उनकी सियासी प्रासंगिकता कम हुई।

उद्धव ठाकरे का गठबंधन और हिंदुत्व से विचलन

2019 में बीजेपी के साथ गठबंधन टूटने के बाद उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ महाविकास अघाड़ी (एमवीए) बनाकर सरकार बनाई। यह गठबंधन शिवसेना की मूल हिंदुत्व विचारधारा से विचलन के रूप में देखा गया, क्योंकि कांग्रेस और एनसीपी की धर्मनिरपेक्ष नीतियां शिवसैनिकों के बीच भ्रम पैदा करती थीं।

इस गठबंधन ने उद्धव को मुख्यमंत्री बनाया, लेकिन पार्टी की वैचारिक पहचान कमजोर हुई, जिससे बीजेपी और शिंदे गुट ने बालासाहेब की हिंदुत्व विरासत को हथियाने का मौका पाया। ठाकरे परिवार की सियासी कमजोरी का एक प्रमुख कारण मराठी वोटों का बंटवारा रहा। उद्धव की शिवसेना (यूबीटी) और राज की एमएनएस के बीच प्रतिस्पर्धा ने मराठी अस्मिता के मुद्दे को कमजोर किया।

बीजेपी की रणनीति-ठाकरे परिवार की गलतियां

2024 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) को 10% और एमएनएस को 1.6% वोट मिले, जो 2009 में क्रमशः 16.3% और 5.7% थे। यह गिरावट दर्शाती है कि मराठी वोटर अब बंट चुके हैं, और बीजेपी-शिंदे गठबंधन ने इसका फायदा उठाया।

बीजेपी ने ठाकरे परिवार की कमजोरियों का फायदा उठाया। 2024 के चुनाव में बीजेपी ने 126 सीटों पर बढ़त बनाई, जबकि शिंदे की शिवसेना ने 53 सीटें हासिल कीं। उद्धव ठाकरे की संयमित और राज ठाकरे की आक्रामक शैली के बीच तालमेल की कमी ने दोनों की सियासी ताकत को और कमजोर किया।

‘मराठी वॉर’ का उदय,हिंदी-मराठी भाषा विवाद

2025 में महाराष्ट्र सरकार द्वारा स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य करने की नीति ने ठाकरे बंधुओं को एकजुट होने का मौका दिया। उद्धव और राज ने इस नीति को ‘हिंदी थोपने’ के रूप में प्रचारित किया और मराठी अस्मिता के नाम पर विरोध शुरू किया।

5 जुलाई को मुंबई के वर्ली में दोनों ने ‘मराठी विजय दिवस’ रैली निकाली, जब सरकार ने इस नीति को वापस लिया। इस रैली में उद्धव ने बीजेपी पर लोगों को बांटने का आरोप लगाया, जबकि राज ने कहा कि फडणवीस ने वह कर दिखाया जो बालासाहेब नहीं कर सके।

इस रैली में दोनों ने मराठी अस्मिता को भुनाने की कोशिश की, लेकिन कुछ बयानों, जैसे उद्धव का “गुंडागर्दी किए बिना न्याय नहीं मिलेगा” और राज का “पीटने का वीडियो न बनाएं” ने विवाद खड़ा किया। इसे हिंदीभाषियों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने के रूप में देखा गया।

अब क्या है सियासी मकसद !

ठाकरे बंधुओं का एकजुट होना आगामी बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) और स्थानीय निकाय चुनावों के लिए रणनीति का हिस्सा है। बीएमसी में मराठी वोटरों का हिस्सा करीब 40% है, और दोनों भाई इस वोट बैंक को एकजुट कर बीजेपी-शिंदे गठबंधन को चुनौती देना चाहते हैं।

उद्धव को लगता है कि राज के साथ गठबंधन उनकी खोई सियासी जमीन को वापस दिला सकता है, खासकर तब जब उनकी पार्टी का नाम और चिह्न छिन चुका है। राज ठाकरे के लिए यह एक मौका है अपनी पार्टी को पुनर्जनन देने का, क्योंकि एमएनएस की सियासी प्रासंगिकता लगभग खत्म हो चुकी है।

शरद पवार और सुप्रिया सुले की भूमिका

ठाकरे बंधुओं के एकजुट होने में एनसीपी नेता शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले की भूमिका अहम रही। सुप्रिया सुले ने इस रैली में उपस्थिति दर्ज कराकर ठाकरे परिवार की तीसरी और चौथी पीढ़ी को भी एक मंच पर लाने में मदद की। हालांकि, कांग्रेस ने इस रैली से दूरी बनाए रखी, क्योंकि वह गैर-मराठी वोटरों को नाराज नहीं करना चाहती थी।

क्या सियासी जमीन वापस पा सकते हैं?

ठाकरे बंधुओं की रैली को कुछ लोगों ने भाषाई कट्टरपंथ और हिंदी विरोध की राजनीति के रूप में देखा। एकनाथ शिंदे ने उद्धव पर सत्ता की हताशा में रैली करने का आरोप लगाया और कहा कि उनकी सरकार ने ही मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिलाया।

अगर उद्धव और राज ठाकरे मराठी वोटों को एकजुट कर पाते हैं, तो बीएमसी और स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी-शिंदे गठबंधन को कड़ी चुनौती दे सकते हैं। राज की आक्रामक शैली और उद्धव की अनुभवी रणनीति का मेल युवा और परंपरागत मराठी वोटरों को आकर्षित कर सकता है। शरद पवार जैसे सहयोगियों का समर्थन एमवीए को मजबूत कर सकता है।

क्या हैं चुनौतियां ?

दोनों भाइयों के बीच 20 साल की अदावत को पूरी तरह भुलाना मुश्किल है। बीजेपी और शिंदे की शिवसेना ने मराठी और हिंदुत्व के मुद्दों पर पहले ही मजबूत पकड़ बना ली है।ठाकरे बंधुओं के भड़काऊ बयानों से गैर-मराठी वोटरों का ध्रुवीकरण हो सकता है, जो उनकी हार का कारण बन सकता है। एमएनएस का वोट बैंक सीमित है, और यह गारंटी नहीं है कि राज के समर्थक उद्धव को वोट देंगे।

मराठी अस्मिता का मुद्दा

ठाकरे परिवार की सियासी जमीन खिसकने के पीछे शिवसेना का विभाजन, राज ठाकरे का अलगाव, उद्धव का गलत गठबंधन, और बीजेपी की चतुर रणनीति प्रमुख कारण रहे। ‘मराठी वॉर’ के जरिए उद्धव और राज ठाकरे अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह रणनीति कितनी कारगर होगी, यह बीएमसी और स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों पर निर्भर करता है। मराठी अस्मिता का मुद्दा भले ही उन्हें एकजुट कर रहा हो, लेकिन लंबे समय तक साथ रहना और वैचारिक मतभेदों को सुलझाना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
India-Canada

G-7 में मोदी की गैरमौजूदगी… क्या भारत-कनाडा तनाव तोड़ेगा 6 साल की परंपरा ?

June 2, 2025
Christina Grover from Faridabad

कृषि के क्षेत्र में बदलाव कर समृद्ध और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मार्ग प्रशस्‍त कर रही क्रीस्टीना ग्रोवर

December 29, 2024
Manmohan Singh

डॉ मनमोहन सिंह का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, स्मारक की मांग पर घमासान!

December 29, 2024
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • IAF ने किया Khagantak-243 बम का सफल परीक्षण, नए हथियार की पूरी ताकत समझिए
  • आर्कटिक-NSR पर PM मोदी-पुतिन करेंगे डील! मिनरल्स का भंडार मिलेगा
  • जनसुनवाई में बोलीं CM रेखा गुप्ता, जनता के लिए हमेशा खुला है सरकार का दरवाजा

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.