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Home राष्ट्रीय

स्पर्श हिमालय महोत्सव 2024: साहित्य, कला और संस्कृति का भव्य उत्सव

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
October 29, 2024
in राष्ट्रीय, विशेष
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Himalaya Festival
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ramesh pokhriyalडॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’
पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री


नई दिल्ली: भारत की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक धरोहर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दृष्टि से आयोजित स्पर्श हिमालय महोत्सव 2024 का आयोजन 23 से 27 अक्टूबर के बीच देहरादून के थानो स्थित लेखक गांव में हुआ। इस महोत्सव में 65 से अधिक देशों से प्रतिनिधि, लेखक, शोधकर्ता और छात्र एकत्र हुए और सत्रों, कार्यशालाओं, और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में भाग लिया।

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महोत्सव का शुभारंभ एक प्रेरणादायक सत्र से हुआ, जिसमें प्रमुख साहित्यिक हस्तियां और सांस्कृतिक प्रेमी शामिल हुए। नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) और लेखक गांव द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य उत्तराखंड की साहित्यिक धरोहर को संरक्षित करना और नए लेखकों को प्रेरित करना था। डॉ. सविता मोहन, पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक, ने सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता डॉ. हटवाल ने हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के वैश्विक विकास का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया, जबकि दूसरे दिन स्थानीय कलाकारों और साहित्यिक हस्तियों पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसमें क्षेत्रीय भाषाओं की विशिष्टता को प्रदर्शित करने के लिए “गढ़वाली-कुमाऊँनी कवि संगोष्ठी” का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी ने स्थानीय बोलियों की समृद्धि का उत्सव मनाया।

विशिष्ट अतिथि और उद्घाटन समारोह
25 अक्टूबर को महोत्सव का उद्घाटन पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने किया। अन्य विशिष्ट अतिथियों में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, सीबीएफसी के अध्यक्ष प्रसून जोशी और प्रख्यात साहित्यकार डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ भी शामिल थे। मुख्यमंत्री धामी ने डॉ. निशंक की प्रशंसा करते हुए उन्हें एक दूरदर्शी नेता बताया, जिनके प्रयास युवा कलाकारों को गहराई से प्रेरित करेंगे। राज्यपाल सिंह ने कहा, “आपके द्वारा लिखे गए प्रत्येक शब्द में ब्रह्मांड को आंदोलित करने की शक्ति है,” जो महोत्सव के उद्देश्य को और प्रबल बनाता है।

प्रसिद्ध लेखक डॉ. बी. एल. गौड़ और न्यूयॉर्क से इंदरजीत सिंह ने महोत्सव की महत्वाकांक्षा और उत्कृष्टता की सराहना की। डॉ. गौड़ ने इसे उत्तराखंड की सांस्कृतिक महत्ता को वैश्विक स्तर पर उठाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला बताया, जबकि इंदरजीत सिंह ने नवोदित और अनुभवी लेखकों को जुड़ने और सहयोग करने के लिए एक समावेशी मंच प्रदान करने की सराहना की।

संविधान, भारतीय भाषाएँ, और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर सत्र
महोत्सव के चौथे दिन “संविधान, भारतीय भाषाएँ, और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020” पर एक महत्वपूर्ण सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में जस्टिस सुधांशु धूलिया और विद्वान अतुल कोठारी ने देशी भाषाओं और मातृभाषा में शिक्षा के महत्व पर चर्चा की। आचार्य बालकृष्ण ने “स्वास्थ्य में योग, आयुर्वेद, और संगीत की भूमिका” पर सत्र का नेतृत्व किया, जिसमें प्राचीन स्वास्थ्य प्रथाओं के महत्व पर प्रकाश डाला गया। केंद्रीय मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत और अन्य प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों ने भी इसमें भाग लिया।

लेखक गांव देशी और स्थानीय ज्ञान के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जो संस्कृति, कला और गुणवत्तापूर्ण साहित्य के संवर्धन पर केंद्रित रहेगा। इसका एक मुख्य उद्देश्य हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं का विकास करना होगा, जहाँ इन भाषाओं को पनपने का अनुकूल वातावरण मिलेगा। इस पहल में नवोदित लेखकों के लिए कार्यशालाओं का आयोजन भी शामिल होगा, जिससे उन्हें साहित्यिक कौशल और समर्थन प्राप्त होगा।

नए लेखकों के समर्थन के साथ-साथ, लेखक गांव में ऐसी लाइब्रेरियों की स्थापना की जाएगी जो समुदाय के लिए ज्ञान केंद्र के रूप में कार्य करेंगी। ये पुस्तकालय न केवल साहित्यिक कृतियों को संग्रहीत करेंगी, बल्कि शोध और सीखने के संसाधन भी प्रदान करेंगी। महोत्सव पुस्तकों के प्रकाशन को सक्रिय रूप से बढ़ावा देगा, ताकि विविध विचारों और दृष्टिकोणों का साहित्यिक परिदृश्य में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके। यह नवोदित लेखकों को अपने कौशल को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक उपकरण प्रदान करने के उद्देश्य से प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित करेगा।

इसके अलावा, लेखक गांव शोधकर्ताओं के कार्यों के प्रकाशन में भी सहायता करेगा, जो ज्ञान के प्रसार और अकादमिक अनुसंधान की संस्कृति को बढ़ावा देगा। स्वदेशी लोगों, स्थानीय समुदायों और अन्य हितधारकों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देकर, लेखक गांव पर्यावरणीय चुनौतियों का अभिनव समाधान प्रदान करने में योगदान देगा, साथ ही पारंपरिक प्रथाओं का सम्मान करेगा।

देशी और स्थानीय ज्ञान के महत्व पर जोर देते हुए, साथ ही सांस्कृतिक संरक्षण, गुणवत्तापूर्ण साहित्य, और हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के साथ, लेखक गांव कला अभिव्यक्ति और साहित्यिक अन्वेषण के लिए एक समृद्ध वातावरण तैयार करने का उद्देश्य रखता है। यह पहल पीढ़ीगत शिक्षा का केंद्र भी बनेगी, जहाँ बुजुर्ग अपनी जानकारी अगली पीढ़ियों को सौंप सकेंगे। यह ज्ञान का हस्तांतरण सांस्कृतिक प्रथाओं और पारंपरिक ज्ञान की निरंतरता के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे भविष्य में स्वदेशी और स्थानीय ज्ञान के संरक्षक सशक्त बन सकें।

कुल मिलाकर, लेखक गांव का यह बहुआयामी दृष्टिकोण, जिसमें भाषा विकास, कार्यशालाएँ, पुस्तकालयों की स्थापना, प्रकाशन पहल, प्रशिक्षण और शोध समर्थन शामिल हैं, साहित्य और संस्कृति के महत्व को समझने और समकालीन चुनौतियों का सामना करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण है, जो क्षेत्र की समृद्ध धरोहर को संरक्षित और सम्मानित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

समापन समारोह के दौरान पर्यटन और संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लेखक गांव की स्थापना में डॉ. निशंक के दृष्टिकोण की सराहना की। इस अवसर पर 15 से अधिक नई पुस्तकों का विमोचन किया गया, जिनमें से दो प्रमुख पुस्तकें डॉ. टोनी नाडर की थीं, जो ध्यान और तंत्रिका विज्ञान पर अपने शोध के लिए विश्वप्रसिद्ध हैं। आरएनटीयू के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे ने इस साहित्यिक महोत्सव के प्रभाव के रूप में अपने पिता की स्मृति में एक नई चेयर की घोषणा की। विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खंडूरी ने घोषणा की, “कलम तलवार से अधिक शक्तिशाली है, और लेखक गांव से प्रकाशित होने वाली पुस्तकें राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।” संकल्प फाउंडेशन के अध्यक्ष संतोष जी, जिन्होंने हजारों आईएएस अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है, ने कहा कि लेखक गांव इस क्षेत्र के लिए एक साहित्यिक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेगा।

पर्यावरणीय पहल
महोत्सव का प्रारंभ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक प्रतीकात्मक वृक्षारोपण समारोह से हुआ। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज ने इसे “पुस्तकों की दिवाली” कहते हुए डॉ. निशंक की ‘स्पर्श गंगा’ पहल की सराहना की, जो प्रकृति संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

स्पर्श हिमालय महोत्सव 2024 का महत्व
स्पर्श हिमालय महोत्सव 2024 ने भारत की साहित्यिक और सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया है, जहाँ साहित्य, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का सुंदर समन्वय देखा गया। लेखक गांव की स्थापना के माध्यम से डॉ. निशंक का यह सपना साकार हो रहा है कि एक ऐसा संसार बने जहाँ पुस्तकों और विचारों के आदान-प्रदान से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।

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