प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
बेंगलुरु : बेंगलुरु में 4 जून को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की IPL जीत के जश्न के दौरान एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई भगदड़ में 11 लोगों की मौत और 50 से अधिक लोगों के घायल होने की घटना को लेकर कर्नाटक सरकार ने हाई कोर्ट में विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट में कई गंभीर लापरवाहियों का उल्लेख किया गया है, जिसमें RCB, कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (KSCA), इवेंट मैनेजमेंट कंपनी DNA नेटवर्क्स और बेंगलुरु पुलिस को जिम्मेदार ठहराया गया है। साथ ही, क्रिकेटर विराट कोहली का नाम भी इस मामले में सामने आया है।
अनियोजित आयोजन और अनुमति की कमी
RCB ने बिना उचित सरकारी अनुमति के विजय परेड का आयोजन किया। कर्नाटक सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, आयोजकों ने पुलिस को कार्यक्रम की जानकारी देर से दी, जिसके कारण सुरक्षा तैयारियों के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। पुलिस को केवल सीमित अनुमति दी गई थी, लेकिन आयोजकों ने सोशल मीडिया पर व्यापक प्रचार कर लाखों लोगों को जश्न में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। इससे स्टेडियम के बाहर 3.5-4 लाख लोग जमा हो गए, जबकि स्टेडियम की क्षमता केवल 33,000 थी।
जांच में पाया गया कि आयोजकों, KSCA और पुलिस के बीच समन्वय की भारी कमी थी। स्टेडियम के बाहर केवल 79 पुलिसकर्मी तैनात थे, और कोई अतिरिक्त सुरक्षा बल या एम्बुलेंस की व्यवस्था नहीं थी।अचानक 3:14 बजे आयोजकों ने घोषणा की कि प्रवेश के लिए पास अनिवार्य होगा, जिससे भीड़ में अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ की स्थिति पैदा हुई।
विराट कोहली की भूमिका
सामाजिक कार्यकर्ता एच. एम. वेंकटेश ने कब्बन पार्क पुलिस स्टेशन में विराट कोहली के खिलाफ शिकायत दर्ज की, जिसमें दावा किया गया कि कोहली न केवल RCB के स्टार खिलाड़ी हैं, बल्कि इस आयोजन के प्रचार से भी जुड़े थे। उनकी अपील के कारण भारी भीड़ जमा हुई। हालांकि, पुलिस ने अभी तक कोहली के खिलाफ औपचारिक FIR दर्ज नहीं की है, लेकिन उनकी शिकायत को पहले से दर्ज मामले (123/2025) की जांच में शामिल किया गया है।
RCB मैनेजमेंट, KSCA और DNA नेटवर्क्स पर लापरवाही और गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है। भारतीय दंड संहिता (IPC) और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं (105, 115(2), 118(1), 118(2), 3(5)) के तहत कार्रवाई की गई है। RCB के मार्केटिंग हेड निखिल सोसाले, DNA कंपनी के मैनेजर किरण और उनके सहयोगी मैथ्यू समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। KSCA के सचिव ए. शंकर और कोषाध्यक्ष ई. एस. जयराम ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया।
सोशल मीडिया और मुफ्त पास का प्रभाव
जांच में सामने आया कि RCB ने सोशल मीडिया पर मुफ्त पास की घोषणा की, जिससे उम्मीद से कहीं ज्यादा लोग स्टेडियम पहुंचे। टिकटों का वितरण डिजिटल विकल्पों के बजाय फिजिकल रूप में किया गया, जिसने स्थिति को और बिगाड़ दिया। स्टेडियम के गेट पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस योजना नहीं थी और गेट खोलने में देरी ने अफरा-तफरी को बढ़ावा दिया।
कोर्ट की कार्रवाई न्यायिक जांच
सेवानिवृत्त जस्टिस जॉन माइकल डी’कुन्हा की अध्यक्षता में गठित एकल सदस्यीय आयोग ने इस घटना की जांच की। आयोग ने चश्मदीदों, पुलिस अधिकारियों और KSCA के बयान दर्ज किए। कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया और सरकार से 10 जून तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। कोर्ट ने सरकार के गोपनीयता के अनुरोध को खारिज कर दिया और कहा कि ऐसी गोपनीयता का कोई कानूनी आधार नहीं है।
बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर बी. दयानंद सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया गया। मामले की जांच अब CID को सौंपी गई है। RCB ने मृतकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
विराट कोहली के खिलाफ शिकायत
सामाजिक कार्यकर्ता एच. एम. वेंकटेश और अन्य ने कोहली पर आयोजन के प्रचार में उनकी भूमिका के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। हालांकि, कोहली के खिलाफ अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है और पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष होगी।
कुछ स्रोतों में दावा किया गया है कि कोहली की लोकप्रियता और उनके सोशल मीडिया प्रचार ने भीड़ को आकर्षित करने में बड़ी भूमिका निभाई, जिसे नियंत्रित करने में आयोजक विफल रहे।
कर्नाटक सरकार की प्रतिक्रिया
सरकार ने इस घटना के बाद कर्नाटक भीड़ नियंत्रण विधेयक 2025 का मसौदा तैयार किया है, जिसमें बिना अनुमति सार्वजनिक आयोजन करने पर तीन साल की जेल और ₹5,000 तक का जुर्माना जैसी सख्त सजा का प्रावधान है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इसे “गंभीर लापरवाही” का मामला बताते हुए RCB, KSCA और आयोजकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
कर्नाटक सरकार की जांच रिपोर्ट में RCB, KSCA, DNA नेटवर्क्स और बेंगलुरु पुलिस की लापरवाही को भगदड़ का प्रमुख कारण बताया गया है। अपर्याप्त सुरक्षा, समन्वय की कमी और सोशल मीडिया के जरिए बिना योजना के प्रचार ने स्थिति को अनियंत्रित कर दिया। विराट कोहली का नाम शिकायतों में शामिल है, लेकिन उनकी प्रत्यक्ष जिम्मेदारी अभी जांच के दायरे में है। कर्नाटक हाई कोर्ट इस मामले की बारीकी से निगरानी कर रहा है, और CID की जांच से और विवरण सामने आने की उम्मीद है।







