रामपुर: रामपुर में दर्जनों ऐसे श्रमिक परिवार हैं, जो अब अपनी बेटियों के जन्म पर न सिर्फ खुश होते हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी पहले से ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं. इसकी वजह है मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना, जिसके तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को संतान के जन्म पर आर्थिक मदद दी जाती है. यह योजना उन परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं, जिनकी रोजी-रोटी मेहनत-मजदूरी से चलती है. योजना के अंतर्गत पंजीकृत पुरुष श्रमिकों को बच्चे के जन्म पर 6000 रुपये एकमुश्त दिए जाते हैं. वहीं महिला श्रमिक को अगर अस्पताल में प्रसव होता है तो उसे 3 माह के न्यूनतम वेतन के बराबर राशि और 1000 रुपये चिकित्सा बोनस दिया जाता है.
बेटे के जन्म पर 20 हजार तो बेटी के जन्म पर मिलते हैं 25 हजार रुपए
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि बेटियों के जन्म पर अधिक राशि दी जाती है. अगर बेटा हुआ है तो 20,000 रुपये जबकि बेटी के जन्म पर 25,000 रुपये की सहायता दी जाती है. यही नहीं अगर पहली संतान बेटी है या दूसरी भी बेटी है या कानूनी रूप से गोद ली गई बालिका है तो भी 25,000 रुपये की सावधि जमा का प्रावधान है.
जन्म से दिव्यांग बालिका के लिए सरकार करती है 50 हजार जमा
जन्म से दिव्यांग बालिका के लिए सरकार 50,000 रुपये जमा करती है, जो बालिका के 18 साल की उम्र तक अविवाहित रहने पर मिलती है. रामपुर में सहायक श्रमायुक्त राजकुमार ने जानकारी दी कि वर्ष 2025-26 में अब तक 255 श्रमिक परिवारों को योजना के तहत 95 लाख 71 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है.
इस योजना का लाभ उठाने के लिए श्रमिक की उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए और पिछले 12 महीनों में कम से कम 90 दिन तक निर्माण कार्य किया हो. पंजीकरण शुल्क 20 रुपये और सालाना अंशदान भी 20 रुपये रखा गया है. एक साथ तीन साल का अंशदान 60 रुपये में भी जमा किया जा सकता है. आवेदन के लिए आधार कार्ड और पासपोर्ट साइज फोटो जरूरी है. इच्छुक श्रमिक इस योजना के लिए किसी भी जन सेवा केंद्र (CSC) से या बोर्ड की वेबसाइट www.upbocw.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं







