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Home राष्ट्रीय

हर मामले में आगे भारत की हाइड्रोजन ट्रेन, तकनीक में चीन को भी पछाड़ा

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 14, 2025
in राष्ट्रीय
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hydrogen train
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नई दिल्ली। भारत ने हाईड्रोजन से चलने वाला इंजन बनाने में चीन को पछाड़ दिया है. देश में शून्य-उत्सर्जन तकनीक वाली हाइड्रोजन ट्रेन का परीक्षण शुरू हो गया है. दावा यह किया गया है कि पूरी दुनिया में सबसे अधिक हार्स पावर के हाइड्रोजन इंजन का भारतीय रेलवे ने निर्माण किया है. रेल मंत्री अश्विनी वैश्नव ने ट्वीट करके यह जानकारी दी कि भारत की पहली हाईड्रोजन ट्रेन जल्द आ रही है.

दुनिया की अगर बात करें तो जर्मनी पहला देश था, जिसने सितंबर 2022 में हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों की शुरुआत की थी. भारत जर्मनी, फ्रांस, स्वीडेन और चीन के बाद ऐसा देश होगा, जिसने इस हाइड्रोजन इंजन ट्रेन को विकसित किया है. इसकी खासियत यह है कि इसके इंजन के मुकाबले दुनियां में किसी भी देश ने इतने अधिक हार्सपावर का इंजन डेवलप नहीं किया है. इन ट्रेनों में 500 से 600 हॉर्स पावर वाले ट्रेन इंजन हैं.

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रेल मंत्री ने क्या कहा?
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह पहल भारत को वैश्विक हरित क्रांति के मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगी और 2070 तक नेट-जीरो कार्बन एमिशन लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी. इसके पहले अश्विनी वैष्णव ने जुलाई में बताया था कि पहले हाइड्रोजन चालित कोच (ड्राइविंग पावर कार) का ICF, चेन्नई में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया. भारत 1,200 HP हाइड्रोजन ट्रेन विकसित कर रहा है. इससे भारत हाइड्रोजन चालित ट्रेन प्रौद्योगिकी में अग्रणी देशों में शामिल हो जाएगा.

क्यों हम चीन से तुलना करते हैं?
भारत के हाइड्रोजन इंजन की क्षमता 2600 पैसेंजर को ढोने वाली है. इसके साथ ही हार्स पावर के लिहाज से भी अव्वल है. दूसरी तरफ चीन ने शून्य-उत्सर्जन तकनीक और हाइड्रोजन से चलने वाली अपनी जिस हाई-स्पीड ट्रेन का अनावरण किया है, उसकी अधिकतम गति 200 किलोमीटर (124 मील) प्रति घंटा है . चीन ने जर्मनी के बर्लिन में आयोजित परिवहन तकनीक व्यापार मेले इनोट्रांस 2024 में अपने देश की पहली ट्रेन, CINOVA H2 का अनावरण किया था.

वहीं भारत की चार डिब्बों वाली इस हाइड्रोजन ट्रेन की गति 160 किलोमीटर (99 मील) प्रति घंटा है और 15 मिनट में पूरी तरह ईंधन भरने के साथ ही ये 1,200 किलोमीटर की पूरी दूरी तय कर सकती है. इस ट्रेन का डिजाइन इसे 1,000 से ज्यादा यात्रियों को ले जाने की क्षमता देता है. इस ट्रेन का पहला परिचालन हरियाणा के जिन्द और सोनीपत के बीच किया जाएगा. यह रूट लंबाई और इंफ्रास्ट्रक्चर की दृष्टि से उपयुक्त माना गया है.

क्या है भविष्य की योजना?
इस मार्ग पर देश की पहली जीरो-एमिशन ट्रेन दौड़ेगी, जो भविष्य में अन्य गैर-विद्युतीकृत और हेरिटेज रूट्स पर तैनाती के लिए एक टेस्ट मॉडल बनेगी. ये ट्रेन भारतीय रेलवे के महत्वाकांक्षी “हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज” कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण-संवेदनशील और दर्शनीय मार्गों पर रेल यात्रा को डीकार्बोनाइज करना है. इसमें शिमला-कालका, दार्जिलिंग और ऊटी जैसे रूट शामिल हैं. इस कार्यक्रम के तहत 35 हाइड्रोजन ट्रेनें बनाई जाएंगी. हर ट्रेन की लागत 80 करोड़ रुपये होगी. प्रति रूट हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग और रखरखाव सुविधाओं के लिए 70 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे.

ऑसीलेशन ट्रायल का इंतजार
पर्यावरण के लिए बड़ा कदम हाइड्रोजन-संचालित ट्रेनें केवल जलवाष्प उत्सर्जित करती हैं, जिससे यह डीजल इंजन वाली ट्रेनों के लिए एक पर्यावरण-अनुकूल विकल्प बन जाती हैं. इसका हरियाणा के जिंद और सोनीपत के बीच ऑसीलेशन ट्रायल किया जाएगा. इस ट्रायल के दौरान ट्रेन में उतना ही वजन रख कर दौड़ाया जाएगा, जितने वजन के पैसेंजर्स इसमें चढ़ेंगे. प्लस्टिक के पीपे में मेटल पाउडर डाल कर 50-50 किलो का वजन बनाया गया है.

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