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ट्रंप का दांव उल्टा… भारत रूसी तेल की खरीद बढ़ाने को तैयार, पुतिन का तगड़ा ऑफर क्या है?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
September 3, 2025
in विश्व, व्यापार
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Crude oil
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प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर


नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रूस के खिलाफ सख्ती और भारत पर टैरिफ की धमकियां अब उल्टी पड़ रही हैं। ट्रंप ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 50% तक टैरिफ लगाने का ऐलान किया था, लेकिन इसके बजाय भारत रूस से तेल की खरीद बढ़ाने की तैयारी में है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को आकर्षक ऑफर दिया है, जिससे अमेरिका और तिलमिला सकता है। आइए पूरी रिपोर्ट में समझते हैं कि आखिर यह सब कैसे हो रहा है।

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रूस को अलग-थलग करने की कोशिश

ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए रूस पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई है। वे रूस के तेल खरीदने वाले देशों पर सेकेंडरी सैंक्शंस (अप्रत्यक्ष प्रतिबंध) लगाने की धमकी दे रहे हैं। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदता है। जनवरी से जून 2025 तक भारत ने रूस से औसतन 1.75 मिलियन बैरल प्रतिदिन (mbpd) तेल आयात किया, जो कुल आयात का 35% है।

ट्रंप ने 27 अगस्त 2025 को भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया। इसका कारण बताया गया कि भारत रूसी तेल खरीदकर मॉस्को को यूक्रेन युद्ध के लिए फंडिंग कर रहा है। ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो ने कहा, “भारत रूस से सस्ता तेल खरीदता है, रिफाइन करता है और यूरोप-एशिया को महंगे दामों पर बेचता है, जिससे रूस की ‘वॉर मशीन’ चल रही है।” ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “भारत रूस का सबसे बड़ा ऊर्जा खरीदार है, जबकि दुनिया चाहती है कि रूस यूक्रेन में हिंसा रोके।”

ट्रंप की उम्मीद थी कि यह दबाव भारत को रूस से दूर कर देगा, लेकिन भारत ने साफ कर दिया कि ऊर्जा खरीद आर्थिक हितों पर आधारित है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जयस्वाल ने कहा, “भारत-रूस का रिश्ता समय-परीक्षित है। हम बाजार की उपलब्धता और वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर ऊर्जा स्रोत चुनते हैं।”

तेल पर अतिरिक्त छूट, भारत खुश

ट्रंप के टैरिफ के ठीक बाद पुतिन ने जवाबी दांव चला। शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) समिट के दौरान चीन के तियानजिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन की 45 मिनट की गुप्त मुलाकात हुई। इसके बाद रूस ने भारत को यूरल्स क्रूड (रूस का प्रमुख तेल ग्रेड) पर भारी छूट का ऑफर दिया।

सितंबर-अक्टूबर 2025 के लिए यूरल्स क्रूड को ब्रेंट क्रूड से 3-4 डॉलर प्रति बैरल सस्ता बेचने का प्रस्ताव। पहले यह छूट 2.50 डॉलर थी, जो जुलाई में सिर्फ 1 डॉलर थी। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह छूट अमेरिकी तेल से 5-7 डॉलर सस्ता बनाती है (अमेरिकी तेल ब्रेंट से 3-5 डॉलर महंगा है)।

क्या होंगे इसके फायदे और प्रभाव !

27 अगस्त से 1 सितंबर 2025 के बीच भारत ने 11.4 मिलियन बैरल रूसी तेल आयात किया। अगले महीने आयात में 10-20% बढ़ोतरी (1.5-3 लाख बैरल प्रतिदिन अतिरिक्त) होने का अनुमान है। रूस के डिप्टी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव एवगेनी ग्रिवा ने कहा, “भारतीय कंपनियों को 5% छूट मिलेगी।”

रूस ने भारत को S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की अतिरिक्त डिलीवरी का भी ऑफर दिया। रूसी अधिकारी दिमित्री शुगायेव ने कहा, “नई डिलीवरी पर बात चल रही है।” अगर अमेरिकी बाजार बंद होता है, तो भारत रूस को टेक्सटाइल, फार्मा और कृषि उत्पाद निर्यात कर सकता है।

रूस ने ट्रंप की आलोचना की और कहा, “अमेरिका का दबाव अवैध है। भारत जैसे देशों पर व्यापार रोकने का प्रयास गलत है।” क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इसे “धमकी” बताया।

आर्थिक हित पहले, दबाव का जवाब

भारत ने ट्रंप के दबाव को साफ इग्नोर किया। सरकारी रिफाइनरियां (IOC, HPCL, BPCL) और निजी (रिलायंस, नायरा एनर्जी) रूसी तेल खरीद रही हैं। एनआईओसी ने कहा, “खरीद आर्थिक फैक्टर पर आधारित है।” भारत ने तर्क दिया कि रूसी तेल ने वैश्विक महंगाई रोकी, अगर भारत न खरीदता तो तेल $137/बैरल से ऊपर चढ़ जाता।

भारत ने अमेरिका को आईना भी दिखाया “शुरुआत में अमेरिका ने ही रूसी तेल खरीदने को कहा था ताकि बाजार स्थिर रहे।” ऊर्जा मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने CNBC को बताया, “हमने कीमतें स्थिर रखीं।” भारत अमेरिकी तेल आयात भी बढ़ा रहा है (जनवरी-जून 2025 में 51% बढ़ोतरी), लेकिन रूस पर निर्भरता बनी रहेगी क्योंकि रिफाइनरियां रूसी क्रूड के लिए डिजाइन की गई हैं।

वैश्विक तेल बाजार और भारत-अमेरिका रिश्ते

रूस अब भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है (इराक-सऊदी को पीछे छोड़कर)। 2022 से आयात 68,000 bpd से बढ़कर 2.15 mbpd (2023 पीक) हो गया। छूट से भारत को सालाना $9-11 बिलियन की बचत। भारत-अमेरिका ट्रेड $44 बिलियन का ट्रेड डेफिसिट। टैरिफ से टेक्सटाइल, ज्वेलरी, ऑटो पार्ट्स प्रभावित ($37 बिलियन नुकसान का अनुमान)। लेकिन अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, “भारत-अमेरिका अंततः समझौते पर पहुंचेंगे।”

ट्रंप-पुतिन की अलास्का मीटिंग (अगस्त 2025) से कोई ब्रेकथ्रू नहीं, लेकिन ट्रंप ने कहा, “2-3 हफ्तों में सैंक्शंस पर सोचेंगे।” भारत SCO-BRICS के जरिए रूस-चीन से करीब आ रहा है, जो ट्रंप को BRICS का डर दे रहा है।

ट्रंप की रणनीति फेल, भारत का स्मार्ट मूव

ट्रंप का दांव उल्टा पड़ गया क्योंकि पुतिन ने छूट से भारत को और आकर्षित कर लिया। भारत ने अपनी ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ पॉलिसी बरकरार रखी—अमेरिका से साझेदारी, लेकिन रूस से आर्थिक फायदा। अगर टैरिफ बढ़े, तो भारत रूस को निर्यात बढ़ा सकता है। यह घटना दिखाती है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की ताकत बढ़ रही है। कुल मिलाकर, पुतिन का ऑफर ट्रंप के लिए झटका है, लेकिन भारत के लिए राहत।

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